राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला (NESL) का महत्व
भारत की राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला (NESL) की स्थापना पर्यावरण प्रशासन को बेहतर बनाने और विदेशी प्रमाणन प्रणालियों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उद्देश्य और कार्य
- स्वदेशी क्षमताएं: NESL विशेष रूप से वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों के लिए स्थानीय परीक्षण और अंशांकन क्षमताओं का विकास करेगा।
- वर्तमान निर्भरता: भारत में वायु गुणवत्ता निगरानी के अधिकांश उपकरण वर्तमान में आयात किए जाते हैं और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों, मुख्य रूप से यूरोप और अमेरिका द्वारा प्रमाणित होते हैं।
- पर्यावरणीय परिस्थितियाँ: विदेशी परिस्थितियों के लिए प्रमाणित उपकरणों को अक्सर भारत में भिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण प्रदर्शन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
वैश्विक संदर्भ
- अंतर्राष्ट्रीय मानक: वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास इसी तरह की सुविधा है।
- प्रदर्शन में गिरावट: भारतीय परिस्थितियों में लंबे समय तक संचालन से आयातित उपकरणों के प्रदर्शन और सटीकता में गिरावट आ सकती है।
उद्घाटन और प्रभाव
- उद्घाटन: CSIR-NPL के 80वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने NESL का उद्घाटन किया।
- विसंगतियों का समाधान: यह प्रयोगशाला भारत और प्रमाणन प्राप्त करने वाले देशों के बीच पर्यावरणीय स्थितियों में असमानताओं से उत्पन्न होने वाले मुद्दों का समाधान करेगी।
- मानकीकरण के लिए समर्थन: यह सुविधा मानकीकृत वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरणों के विकास और निर्माण में भी सहायता करेगी।
वायु गुणवत्ता निगरानी में चुनौतियाँ
- परिवर्तनशीलता कारक: तापमान, आर्द्रता, प्रदूषण का मिश्रण और उच्च धूल भार भारत में वायु गुणवत्ता डेटा की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।
- दीर्घकालिक विश्वसनीयता: NESL का लक्ष्य देश में उत्पन्न वायु गुणवत्ता डेटा की दीर्घकालिक विश्वसनीयता और पारदर्शिता में सुधार करना है।