इस विधेयक के द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन किए गए हैं।
NCDC (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से प्रमुख संशोधन:
क्षेत्र | 1962 के अधिनियम में प्रावधान | विधेयक में प्रस्तावित संशोधन |
कार्य-क्षेत्र | NCDC कुछ निश्चित क्षेत्रकों/वस्तुओं में सहकारी कार्यक्रमों के लिए वित्त-पोषण उपलब्ध कराता था। | सहकारी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने और वित्त-पोषण उपलब्ध कराने का दायरा बढ़ाया गया है। NCDC प्रत्यक्ष या अन्य मध्यवर्ती संस्थाओं के माध्यम से वित्त-पोषण प्रदान कर सकेगा। |
खाद्य पदार्थ | दूध, मांस, अंडे और सब्जियों जैसी मदें शामिल थीं। | प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, अन्य खाद्य उत्पाद और सरकार द्वारा अधिसूचित खाद्य वस्तुएं भी शामिल की गई हैं। |
औद्योगिक मदें | केवल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कुछ सहकारी और संबंधित उद्योगों को शामिल किया गया था। | ग्रामीण क्षेत्र संबंधी शर्त हटा दी गई है। अब ऐसे उद्योगों को केवल ग्रामीण क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा जाएगा। |
ऋण और अनुदान | प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता मुख्य रूप से राष्ट्रीय और बहुराज्यीय सहकारी समितियों तक सीमित थी। | पात्र सहकारी समितियों और सहकारी विकास से संबंधित संस्थाओं को सहायता दी जा सकेगी, जिसमें राज्य स्तर की सहकारी समितियां भी शामिल हैं। |
इक्विटी में निवेश | निवेश केवल राष्ट्रीय और बहुराज्यीय सहकारी समितियों तक सीमित था। | केंद्र सरकार की अनुमति से राज्य स्तरीय सहकारी समितियों और पात्र संस्थाओं में भी निवेश किया जा सकेगा। |
विधेयक की आवश्यकता क्यों है?
- सहकारी क्षेत्र का विस्तार: सहकारी क्षेत्र की बढ़ती और बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए NCDC के कार्यक्षेत्र का विस्तार करना आवश्यक है।
- वित्त की सीमित व्यवस्था: वर्तमान कानून में प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता मुख्य रूप से पंजीकृत सहकारी समितियों तक सीमित थी।
- सहायक संस्थाओं को सहायता: सहकारी क्षेत्र को सहयोग देने वाली अवसंरचना, प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य विशेष संस्थाओं को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था नहीं थी।
- संस्थागत लचीलापन: NCDC के कार्यक्षेत्र को व्यापक बनाने और सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने के लिए इसकी क्षमता बढ़ाना आवश्यक है।