भारत को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने (एनर्जी ट्रांजीशन), उत्सर्जन में कमी करने, जलवायु अनुकूलन और सतत विकास के लिए पर्याप्त जलवायु वित्त की आवश्यकता है।
प्रमुख सरकारी पहलें
- राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन अनुकूलन निधि (NAFCC): इस निधि से जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से प्रभावित होने वाले राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों (UTs) में जलवायु-अनुकूलन कार्यों को सहायता प्रदान की जाती है।
- राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण निधि (NCEEF): इसके तहत स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और इनसे संबंधित अनुसंधान व नवाचार को वित्तपोषण और प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं।
- सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड्स (SGBs): हरित परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए ₹477 बिलियन के सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड्स जारी किए गए।
- प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक को ऋण (PSL) रूपरेखा: इसमें हरित (पर्यावरण अनुकूल) कार्य और सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड जारी करना शामिल हैं।

अन्य पहलें:
- जलवायु वित्त के लिए क्षेत्रकों का वर्गीकरण (Taxonomy),
- ग्रीन स्टील का वर्गीकरण/टेक्सोनोमी (कार्बन फुटप्रिंट के आधार पर स्टील का वर्गीकरण);
- RBI के जलवायु वित्त और जलवायु जोखिम प्रबंधन दिशा-निर्देश (2025), आदि।
मुख्य चुनौतियां
- जलवायु वित्त की व्यापक कमी है और अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त संबंधी प्रतिबद्धताएं पर्याप्त नहीं हैं।
- एक व्यापक जलवायु वित्त रूपरेखा और हरित कार्यों के स्पष्ट वर्गीकरण का अभाव है।
- हरित प्रौद्योगिकियों में निवेश अधिक जोखिम वाला होने और कम लाभ के कारण निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित रही है।
- वित्तीय निर्णयों में जलवायु से जुड़े जोखिमों का पर्याप्त रूप से ध्यान नहीं रखा जाता है।
- अन्य चुनौतियां:
- 'ग्रीनवाशिंग' जैसे अनैतिक आचरण (कंपनियों द्वारा पर्यावरण अनुकूल होने के झूठे दावे करना);
- राज्य सरकारों द्वारा उधार लेने की सीमित क्षमता और सीमित विकल्प, आदि।
निष्कर्ष
जलवायु वित्त में कमी को दूर करने के लिए भारत को प्रभावी जलवायु वित्त वर्गीकरण (Climate Finance Taxonomy) को शीघ्र लागू कर चाहिए, हरित वित्त पर RBI के नियमों को सुदृढ़ बनाना चाहिए, प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक ऋण (PSL) में जलवायु अनुकूलन को शामिल करना चाहिए, राज्यों के लिए विशेष रूप से 'राज्य जलवायु वित्त सुविधा' स्थापित करनी चाहिए तथा सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड्स विकल्प का अधिक उपयोग करना चाहिए।
विश्व के प्रमुख जलवायु वित्त तंत्र
|