अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की नेतृत्व और परिचालन संबंधी भूमिकाओं का विस्तार राष्ट्रीय रक्षा में उनके बढ़ते योगदान को रेखांकित करता है।
- भारत में महिला अधिकारियों की संख्या 2014 में लगभग 3,000 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई है।
सशस्त्र बलों में महिलाओं का महत्त्व
- परिचालन क्षमता: यह युद्ध तत्परता और परिचालन संबंधी विविधता को मजबूत करता है।
- उदाहरण: कैप्टन हंसजा शर्मा 'रुद्र' लड़ाकू हेलीकॉप्टर की पहली महिला पायलट बनीं।
- नेतृत्व का विस्तार: यह युद्धक, तत्परता और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में भागीदारी को बढ़ाता है।
- उदाहरण: लेफ्टिनेंट जनरल साधना एस. नायर सेना की पहली महिला महानिदेशक, चिकित्सा सेवाएं (DGMS) बनीं।
- लैंगिक समावेशन और वैश्विक भूमिका: यह रक्षा क्षेत्रक में लैंगिक समानता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जहां महिलाएं संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति स्थापना मिशनों में भी योगदान दे रही हैं।
- उदाहरण: भारत ने संयुक्त राष्ट्र की 'लैंगिक समानता रणनीति' के 25% के लक्ष्य के मुकाबले स्टाफ ऑफिसर/ पर्यवेक्षक भूमिकाओं में 22% महिला प्रतिनिधित्व हासिल कर लिया है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- भारतीय सेना की 12 शाखाओं और सेवाओं में महिलाओं को स्थायी कमीशन प्रदान किया गया है।
- 2022 से महिलाओं को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में प्रवेश दिया जा रहा है।
- 2021-22 से सैनिक स्कूलों में लड़कियों के लिए 10% सीटें आरक्षित की गई हैं।
- भारतीय वायु सेना में महिलाओं को फाइटर पायलट स्ट्रीम और लड़ाकू भूमिकाओं में शामिल किया गया है।
- उदाहरण: स्क्वाड्रन लीडर भावना कांत लड़ाकू मिशनों के लिए अर्हता प्राप्त करने वाली पहली महिला फाइटर पायलट हैं।
- अग्निपथ योजना के माध्यम से वायु सेना और नौसेना में महिला 'अग्निवीरों' की भर्ती की जा रही है।