'इंडियन वीमेन इन लॉ' के प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने न्यायपालिका में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर बल दिया।
न्यायपालिका में महिलाओं की वर्तमान स्थिति
- उच्चतम न्यायालय: केवल 1 महिला न्यायाधीश (कुल 33 में से)।
- उच्च न्यायालय: 14.85% न्यायाधीश महिलाएं हैं।
- जिला अदालतें: लगभग 37% न्यायाधीश महिलाएं हैं।

कम प्रतिनिधित्व के कारण
- वरिष्ठता-सह-योग्यता मानदंड: यह उन लोगों के पक्ष में है जिनका कार्यकाल लंबा रहा है, जहां पारंपरिक रूप से पुरुषों का वर्चस्व रहा है।
- संरचनात्मक बाधाएं: पुरुष-प्रधान कॉलेजियम नियुक्ति प्रणाली के कारण बार (Bar) के वरिष्ठ पदों पर प्रतिनिधित्व सीमित है।
- कार्यस्थल संबंधी मुद्दे: महिलाएं लैंगिक पूर्वाग्रह, खराब अवसंरचना आदि का सामना करती हैं, जो उनके पेशेवर विकास में बाधा डालते हैं।
- प्रगति में बाधा: महिलाएं न्यायपालिका में प्रवेश तो करती हैं, लेकिन योग्यता होने के बावजूद उच्च न्यायालयों तक कम ही पहुंच पाती हैं।
न्यायपालिका में महिलाओं का महत्त्व
- लैंगिक समानता सुनिश्चित करना: यह निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान भागीदारी को बढ़ावा देता है।
- लैंगिक-संवेदनशील न्याय: महिला न्यायाधीश अपने साथ विविध जीवन अनुभव लाती हैं, जो न्यायिक तर्क को प्रभावित करते हैं।
- जन विश्वास और वैधता: एक प्रतिनिधित्वपूर्ण न्यायपालिका न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता को बढ़ाती है।
- रोल मॉडल: यह अधिक से अधिक महिलाओं को कानूनी पेशे और न्यायपालिका में आने के लिए प्रोत्साहित करता है।