अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम: "सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिकार, न्याय एवं कार्रवाई।"
- भारत का विकास दृष्टिकोण अब 'महिलाओं के विकास' से बदलकर 'महिला-नेतृत्व वाला विकास' हो गया है। यह महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक प्रगति के चालक के रूप में मान्यता देता है।

भारत में महिला-नेतृत्व वाले विकास के लिए उठाए गए कदम:
- लैंगिक रूप से उत्तरदायी सार्वजनिक निवेश: वित्त वर्ष 2026 में भारत का अब तक का सबसे बड़ा 'जेंडर बजट' ₹5.01 लाख करोड़ प्रस्तुत किया गया है, जो कुल केंद्रीय बजट का 9.37% है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण करती महिलाएं
- लखपति दीदी: 3 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्थायी और उच्च आय वाली आजीविका बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रही हैं।
- नमो ड्रोन दीदी योजना: यह योजना 15,000 स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को 80% सब्सिडी के साथ कृषि ड्रोन प्रदान करती है। इससे महिलाओं को तकनीकी तंत्र से जोड़ा जा सकेगा।
- उद्यमिता को बढ़ावा देता वित्त
- वित्तीय समावेशन: पीएम मुद्रा योजना (PM MUDRA) के ऋण लाभार्थियों में 68% महिलाएं हैं और कुल जन धन खातों में से 56% महिलाओं के हैं।
- स्टैंड-अप इंडिया: इस योजना ने 2 लाख से अधिक महिला उद्यमियों को ग्रीनफील्ड उद्यम शुरू करने में सहायता दी है।
- स्टार्ट-अप इंडिया: इसने 75,000 से अधिक महिला-नेतृत्व वाले स्टार्ट-अप्स को समर्थन प्रदान किया है।
- कौशल, नवाचार और नेतृत्व
- कौशल विकास कार्यक्रम: प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के प्रशिक्षुओं में लगभग 45% महिलाएं हैं।
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता: 'तीन बार तलाक अभिव्यक्ति' की समाप्ति ने तत्काल तलाक को अपराध घोषित कर दिया है। इससे मुस्लिम महिलाओं के लिए गरिमा और समानता सुनिश्चित हुई है।