प्रधान मंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) की शुरुआत 2008 में 'जन औषधि योजना' के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य जनता को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराना था।
- 2015 में इसका नाम बदलकर PMBJP कर दिया गया था।
- नोडल एजेंसी: औषध विभाग (रसायन और उर्वरक मंत्रालय)।
- कार्यान्वयन एजेंसी: फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (PMBI)।
PMBJP के तहत प्रमुख पहलें
- जन औषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन: महिलाओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता को किफायती बनाने हेतु ₹1 प्रति पैड की दर से 'ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल' सैनिटरी पैड प्रदान करना।
- जन औषधि सुगम मोबाइल ऐप: एक डिजिटल प्लेटफॉर्म जो नागरिकों को नजदीकी केंद्र खोजने, दवाओं की उपलब्धता जांचने और कीमतों की तुलना करने में मदद करता है।
- जन औषधि केंद्रों (JAK) का विस्तार: देश भर में सस्ती दवाओं तक पहुंच सुधारने और केंद्रों का विस्तार करने के लिए फ्रैंचाइज़ी-आधारित JAK विस्तार।
- सहकारी क्षेत्रक की भागीदारी: सस्ती दवाओं की 'लास्ट-माइल डिलीवरी' (अंतिम छोर तक पहुंच) सुनिश्चित करने के लिए सहकारी समितियों के ग्रामीण नेटवर्क का उपयोग करना।
- रेलवे स्टेशनों पर जन औषधि केंद्र: यात्रियों और प्रवासी श्रमिकों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना।

प्रमुख उपलब्धियां
- नेटवर्क का व्यापक विस्तार: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों सहित पूरे भारत में 18,000 से अधिक जन औषधि केंद्र स्थापित किए गए हैं।
- जनता की भारी बचत: जून 2025 तक ₹7,700 करोड़ की दवाएं बेची गई, जिससे नागरिकों को लगभग ₹38,000 करोड़ की बचत हुई।
- विस्तृत मेडिसिन बास्केट: 2,000 से अधिक दवाएं और 300 से अधिक सर्जिकल आइटम्स उपलब्ध हैं, जो विभिन्न चिकित्सीय श्रेणियों को कवर करते हैं।