विकलांग कैदियों के लिए जेल सुधारों पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 21 अप्रैल, 2026 को विकलांग कैदियों के लिए जेल की स्थितियों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक उच्च-स्तरीय समिति को सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करते हुए जेलों को अधिक सुलभ बनाने के लिए एक व्यापक योजना विकसित करने का निर्देश दिया।
प्रमुख निर्देश और अवलोकन
- इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट कर रहे हैं।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समान व्यवहार का अधिकार) और 21 (गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार) के तहत विकलांग कैदियों के अधिकारों को बनाए रखने के लिए मानवीय, अधिकार-आधारित दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।
पृष्ठभूमि
यह आदेश सत्यन नरवूर द्वारा दायर याचिका के बाद आया है, जिनका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता कालीस्वरम राज और तुलसी के. राज ने किया। याचिका में जी. साईबाबा और स्टेन स्वामी जैसे कार्यकर्ताओं द्वारा झेली जा रही अमानवीय जेल स्थितियों को उजागर किया गया था। अदालत का ध्यान विकलांग कैदियों के दर्दनाक अनुभवों और अपर्याप्त सुविधाओं की ओर भी दिलाया गया था।
तत्काल कार्रवाई
- विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम (RPWD) के तहत विकलांग कैदियों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले कारागार अधिकारियों को दंडित करना।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कारागार नियमों में संशोधन करने का निर्देश ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि:
- गतिशीलता के लिए सहायक उपकरणों का प्रावधान।
- विशेष चिकित्सा देखभाल।
- परिवार को निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए मुलाकात के अधिकारों में सुधार।
समिति की संरचना और कार्य
- इस समिति में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव और जेल महानिदेशक, राष्ट्रीय अधिकारी और सरकारी विभागों के विभिन्न सचिव शामिल हैं।
- नव नियुक्त सदस्यों में विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग के सचिव और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग के सचिव शामिल हैं।
कार्य योजना और कार्यान्वयन
- समिति को विकलांग कैदियों को उपयुक्त सहायक उपकरण और सहायता प्रदान करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार करने का कार्य सौंपा गया है, जिसमें निम्नलिखित बातों पर ध्यान दिया जाएगा:
- सहायक उपकरणों के लिए एकसमान मानक।
- खरीद और रखरखाव प्रोटोकॉल।
- सुरक्षा उपाय।
- चार महीने के भीतर सर्वोच्च न्यायालय को एक समेकित स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
अदालत के इस निर्देश का उद्देश्य विकलांग कैदियों के लिए सुधारों का राष्ट्रव्यापी, सुसंगत कार्यान्वयन सुनिश्चित करना, खंडित कार्यवाही को रोकना और पूरे देश में एक समान मानक सुनिश्चित करना है।