रक्षा मंत्रालय द्वारा रक्षा आपूर्तिकर्ताओं के लिए नए दिशानिर्देश
रक्षा मंत्रालय ने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं के लिए दंड संबंधी अपडेटेड दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें जवाबदेही और नैतिक आचरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
दिशा-निर्देशों की प्रमुख विशेषताएं
- प्रतिबंध की अवधि:
- संविदात्मक दायित्वों को पूरा करने में विफल रहने वाले या घटिया प्रदर्शन वाले उपकरण प्रदान करने वाले आपूर्तिकर्ताओं को 5 साल तक की अवधि के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है।
- भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और अवैध गतिविधियों सहित नैतिक दुराचार के कारण 10 साल तक का प्रतिबंध लग सकता है।
- शून्य सहनशीलता नीति:
- इन दिशा-निर्देशों में भ्रष्टाचार के प्रति शून्य-सहिष्णुता का रुख अपनाया गया है और देरी तथा खराब प्रदर्शन के लिए विक्रेताओं की जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।
- सत्यनिष्ठा समझौते का उल्लंघन:
- धोखाधड़ी या नैतिक उल्लंघन जैसे सत्यनिष्ठा संबंधी समझौते (IP) के उल्लंघन के परिणामस्वरूप 10 साल तक का प्रतिबंध लग सकता है।
- यह प्रतिबंध शुरू में एक वर्ष के लिए होगा, जिसकी समीक्षा एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा की जाएगी और यह 10 वर्ष से अधिक नहीं होगा।
- निष्पादन न करने पर लगने वाले दंड:
- कार्य निष्पादन न होने पर प्रारंभिक प्रतिबंध छह महीने के लिए निर्धारित किया गया है, जिसे डिलीवरी समयसीमा, सेवायोग्यता, डाउनटाइम और विफलता दर जैसे कारकों के आधार पर अधिकतम पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है।
- सहयोगी फर्मों के लिए विस्तार:
- यह प्रतिबंध "संबद्ध फर्मों," संयुक्त उद्यमों और विलय या अधिग्रहण से संबंधित संस्थाओं पर भी लागू होता है।
- यदि कोई प्रतिबंधित कंपनी पुनर्गठन करती है या देनदारियों को स्थानांतरित करती है, तो नई इकाई को भी प्रतिबंधित इकाई के रूप में माना जाएगा।
- प्रतिक्रिया विंडो:
- विक्रेताओं को किसी भी आरोप का जवाब देने के लिए अनिवार्य रूप से 30 दिन की अवधि दी जाएगी।