जलवायु और पर्यावरण: अनुकूलन की अनिवार्यता (Climate And Environment: Adaptation Matters) | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

जलवायु और पर्यावरण: अनुकूलन की अनिवार्यता (Climate And Environment: Adaptation Matters)

18 Sep 2025
1 min

परिचय

  • भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत का एक तिहाई है, जबकि यह विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
  • भारतीय वन सर्वेक्षण 2024 के अनुसार 2005 और 2021 के बीच 2.29 बिलियन टन CO2 के बराबर का अतिरिक्त कार्बन सिंक निर्मित किया गया है।

अनुकूलन को सबसे आगे लाना

  • जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत 7 वां सबसे सुभेद्य देश है।
  • भारत का अनुकूलन हेतु व्यय वित्त वर्ष 2016 में सकल घरेलू उत्पाद के 3.7% से बढ़कर वित्त वर्ष 2022 में 5.6% हो गया है।इसका वित्त-पोषण बड़े पैमाने पर घरेलू संसाधनों द्वारा किया गया है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्रक अग्रणी रहा है।
  • हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वित्त-पोषण अपर्याप्त है और अनुकूलन की तुलना में शमन पर अधिक केंद्रित है।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) राष्ट्रीय अनुकूलन योजना (National Adaptation Plan: NAP) विकसित कर रहा है, जो भारत की अनुकूलन संबंधी प्राथमिकताओं को रेखांकित करने वाला एक प्रमुख दस्तावेज है।
 

विभिन्न क्षेत्रकों में रेसिलिएंस के लिए शुरू की गई अन्य पहलें

  • कृषि में अनुकूलन: इसमें जलवायु-अनुकूल बीजों के अनुसंधान और विकास पर अधिक ध्यान देना, भूजल संसाधनों को संरक्षित और संवर्धित करने के उपाय, मृदा स्वास्थ्य में सुधार और फसल पद्धतियों में संशोधन करना शामिल है।
  • शहरी क्षेत्रों में रेसिलिएंस का निर्माण करना: जैसे-जैसे शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन बढ़ रहे हैं, शहरों में गर्मी के दबाव, शहरी बाढ़ और घटते भूजल स्तर से निपटने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
  • प्रमुख हस्तक्षेप: राष्ट्रीय संधारणीय आवास मिशन (National Mission on Sustainable Habitat: NMSH), अमृत/AMRUT, स्मार्ट सिटी मिशन, शहरी नदी प्रबंधन योजना, नदीय शहर गठबंधन (River Cities Alliance: RCA)।
  • तटीय क्षेत्रों में अनुकूलन: भारत की लंबी तटरेखा अत्यधिक वर्षा, भयंकर तूफान, उच्च ज्वार जनित बाढ़ आदि जैसी चरम जलवायु घटनाओं का सामना करती है।
    • प्रमुख हस्तक्षेप: 'मेंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटैट्स एंड टेंजिबल इनकंस (मिष्टी/ MISHTI)मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियों का संरक्षण और प्रबंधन योजना, तटीय विनियमन क्षेत्र (Coastal Regulation Zones)।
  • जल प्रबंधन के लिए अनुकूलन कार्रवाई: जल शक्ति अभियान, राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण परियोजना (National Aquifer Mapping Project: NAQUIM), भू-नीर पोर्टल, द फ्लड वॉच इंडिया ऐप।

एनर्जी-ट्रांजिशन विकसित देशों के अनुभव से सीखना और विकल्पों पर विचार करना

  • कोयला: कई विकसित देशों के विपरीत भारत कोयले पर बहुत अधिक निर्भर है। भारत में कोयले के वैश्विक भंडार का लगभग 10% है, लेकिन प्राकृतिक गैस भंडार का केवल 0.7% ही है।
  • भारत में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 2,13,701 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है, जो कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 46.8% है।
  • एनर्जी ट्रांजिशन को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा नीतियों/योजनाओं पर नई पहलें और अपडेट्स: पी.एम. जनमन और धरती आभा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA JGUA) के तहत नई सौर ऊर्जा योजना (आदिवासी और PVTG बस्तियों/गांवों के लिए); पी.एम. - सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना; हरित ऊर्जा गलियारा (Green Energy Corridor: GEC), राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम, पी.एम. कुसुम, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन।
  • अनुभव से सीख: विकसित अर्थव्यवस्थाओं के अनुभव से हमें यह सीख मिलती है कि हमें ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति के लिए विश्वसनीय तकनीकी विकल्पों के बिना तापीय ऊर्जा संयत्रों को बंद नहीं करना चाहिए।
  • हरित निवेश के संबंध में वित्तीय विनियमन का निर्माण: सेबी (SEBI) ने ESG मापदंडों- बिजनेस रिस्पांसिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR)हरित ऋण प्रतिभूतियां जारी करने, सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड (SGrBs) आदि पर रिपोर्टिंग को अनिवार्य कर दिया है।

संधारणीय विकास के लिए जीवनशैली का अनुकूल

  • भारत ने COP26 (2021) में LiFE मिशन शुरू किया जिसका लक्ष्य पर्यावरण अनुकूल और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली को बढ़ावा देना है।
  • एक अनुमान के अनुसार, हर साल विश्व स्तर पर 17% उपभोक्ता खाद्य पदार्थ बर्बाद होते हैं, जिससे 8% से अधिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है।
  • 2030 तक, LiFE उपायों की वजह से उपभोग कम होने और कीमतें घटने के कारण वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं को लगभग 440 अरब USD की बचत हो सकती है।
  • प्रमुख हस्तक्षेप: पी.एम. कुसुम, पी.एम. सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, इकोमार्क योजना, गो इलेक्ट्रिक' अभियान, परफॉर्म अचीव एंड ट्रेड (PAT) योजना, एक पेड़ मां के नाम, ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम।

चक्रीय अर्थव्यवस्था और संसाधन दक्षता

  • संसाधन चक्रीयता से 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद में 11% तथा 2050 तक 30% की बचत हो सकती है।
  • प्रमुख हस्तक्षेप: कर लाभ, सब्सिडी, और रीसाइक्लिंग उद्योग के लिए कम ब्याज ऋण, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढांचा।
  • प्लास्टिक प्रदूषण : 2050 तक, प्लास्टिक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 15% हिस्सा होगा। भारत में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक खपत दर सबसे कम है , जो 14 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 35 किलोग्राम है।
  • वायु प्रदूषण: विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों से पता चलता है कि विश्व की 99% आबादी सुरक्षित सीमा से अधिक प्रदूषक स्तर वाली हवा में सांस लेती है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इसका सबसे अधिक जोखिम है।
  • प्रमुख हस्तक्षेप: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष

भारत का लक्ष्य 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करना है, जो 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की उसकी महत्वाकांक्षा के साथ संरेखित है। इस दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ निम्न-कार्बन विकास को संतुलित करना आवश्यक है।

एक-पंक्ति में सारांश

भारत की जलवायु नीति अनुकूलन और ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित है, जो आर्थिक विकास को संधारणीय और चरम मौसमी घटनाओं के प्रति रेसिलिएंस के साथ संतुलित करती है।

 

UPSC के लिए प्रासंगिकता

  • जलवायु परिवर्तन और भारत की नीतियां (GS-3: पर्यावरण, जलवायु कार्य योजनाएं)
  • एनर्जी ट्रांजिशन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (GS-3: बुनियादी ढांचा, सतत विकास)
  • शहरी संधारणीयता और प्रदूषण नियंत्रण (GS-3: पर्यावरण, शहरी विकास)
  • अंतर्राष्ट्रीय जलवायु समझौते (GS-2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, जलवायु वित्त)
Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet