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जन योजना अभियान (Jan Yojana Abhiyan)

30 Nov 2024
32 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, पंचायती राज मंत्रालय ने जन योजना अभियान शुरू किया है। इसे 2025-26 की अवधि के लिए ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (Gram Panchayat Development Plans: GPDPs) बनाने के लिए आरंभ किया गया है।

जन योजना अभियान (People's Plan Campaign) के बारे में

  • उद्देश्य: पंचायत के विकास से संबंधित योजनाओं को तैयार करने की प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी को बढ़ाना।
  • आरंभ: इसे पहली बार 2 अक्टूबर, 2018 को पंचायती राज मंत्रालय ने "सबकी योजना सबका विकास" के रूप में शुरू किया था। 
  • कार्यान्वयन: पंचायतों के सभी तीन स्तरों पर इसका कार्यान्वयन किया जाएगा। इसे निर्वाचित प्रतिनिधियों, अग्रिम पंक्ति के सरकारी कर्मियों, समुदाय आधारित संगठनों {जैसे- स्वयं सहायता समूहों (SHGs)} और अन्य हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ सफल बनाया जाएगा।
  • जन योजना अभियान के मुख्य घटक:
    • वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), ब्लॉक पंचायत विकास योजना और जिला पंचायत विकास योजना तैयार करने हेतु सुनियोजित तरीके से गठित वार्ड सभा/ महिला सभा/ ग्राम सभा/ ब्लॉक सभा/ जिला सभा का आयोजन किया जाएगा।
    • ग्राम सभा-वार कैलेंडर तैयार करना तथा पंचायत विकास सूचकांक (Panchayat Development Index: PDI) के आधार पर विषयगत विकास संबंधी अंतरालों की पहचान करना, जिसे ग्राम सभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
    • पंचायत विकास सूचकांक (Panchayat Development Index: PDI) का उपयोग कर, प्रत्येक ग्राम सभा के लिए एक विकास कैलेंडर तैयार किया जाएगा। इसमें थिमैटिक आधार पर विकास संबंधी कमियों (Thematic developmental gaps) की पहचान की जाएगी और उन्हें ग्राम सभाओं के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
      • थिमैटिक या विषयगत एप्रोच 'समग्र सरकार और समग्र समाज दृष्टिकोण' को अपनाकर सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Developmental Goals: SDGs) के स्थानीयकरण पर आधारित है।
      • पंचायत विकास सूचकांक (PDI) एक मल्टी-डोमेन और मल्टी-सेक्टोरल इंडेक्स है। इसका उपयोग पंचायतों के समग्र विकास, प्रदर्शन और प्रगति का आकलन करने के लिए किया जाता है।
    • समावेशी भागीदारी: ग्राम पंचायत विकास योजना की तैयारी में सहायता के लिए युवाओं और 75 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों को शामिल कर समावेशी भागीदारी पर भी जोर दिया गया है।
      • उन्नत भारत अभियान (UBA) के साथ सहयोग: इस वर्ष उच्चतर शिक्षा संस्थानों (HEI) से 15,000 से अधिक स्टूडेंट्स को जन योजना अभियान में शामिल किया जाएगा।
    • मंजूरी प्राप्त प्रत्येक ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रकाशित किया जाएगा।

इस संबंध में कुछ संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 40 (राज्य की नीति के निदेशक तत्व): राज्य ग्राम पंचायतों का गठन करने के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियां व प्राधिकार प्रदान करेगा, जो उन्हें स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों।
  • 73वां और 74वां संविधान संशोधन अधिनियम: इन कानूनों के जरिये स्थानीय स्वशासन की प्रणाली को संवैधानिक वैधता प्रदान की गई।
  • अनुच्छेद 243G: पंचायतों को स्वशासन की संस्थाओं के रूप में मान्यता देते हुए, उन्हें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने का अधिकार दिया गया है।
    • यह कार्य संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची के अंतर्गत सूचीबद्ध 29 विषयों के आधार पर किया जाना है।

 

 

लोगों की भागीदारी अर्थात् जन भागीदारी

  • जन भागीदारी का अर्थ निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी हितधारकों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने से है। इससे उनके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना होती है।

विकास संबंधी योजना निर्माण में जन भागीदारी का महत्त्व

  • कार्यान्वयन दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार: विकास संबंधी योजना निर्माण में आम लोगों की भागीदारी से परियोजना की स्वीकार्यता बढ़ती है। साथ ही, लाभों का अधिक न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित होता है और स्थानीय संसाधन जुटाने को बढ़ावा मिलता है।
    • उदाहरण के लिए- मनरेगा (MGNREGA) में ग्राम सभाएं न केवल योजना की प्रगति की समीक्षा करती हैं, बल्कि प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) के माध्यम से इसकी निगरानी भी करती हैं। इसके अलावा, कार्य पूरा होने के बाद सामाजिक लेखा परीक्षा के माध्यम से इसकी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।
  • समावेशी तरीके से निर्णय लेना: जन-भागीदारी नागरिकों को जिम्मेदारीपूर्ण विकास योजनाओं का निर्माण करने के लिए सशक्त बनाती है और उनमें स्वामित्व की भावना पैदा करती है। इसके परिणामस्वरूप, नागरिक संतुष्टि में सुधार होता है।
    • उदाहरण के लिए- MyGov साथी 2.0 नागरिकों को गवर्नेंस प्रक्रिया में शामिल करता है और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देता है।
  • आत्मनिर्भरता: जागरूकता और सक्रिय भागीदारी लोगों को निर्भरता से मुक्त करके आत्मनिर्भर बनाती है। यह उनके आत्मविश्वास को बढ़ाती है और विकास प्रक्रियाओं पर अधिक नियंत्रण रखने में सक्षम बनाती है।
    • उदाहरण के लिए- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत स्वयं-सहायता समूह (SHGs)।  
  • कवरेज: निर्णय लेने की प्रक्रिया में जन भागीदारी से वंचित और कमजोर वर्गों सहित सभी वर्गों के बीच विकासात्मक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद मिलती है।
    • उदाहरण के लिए- स्वच्छ भारत अभियान में सरकार ने प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित करने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए व्यवहार-जन्य परिवर्तन शुरू करने हेतु सामुदायिक स्वयंसेवकों को संगठित किया है।
  • स्थिरता: योजनाओं के संचालन में जन भागीदारी से स्थानीय क्षमता और संसाधनों पर स्वामित्व का निर्माण होता है। इससे स्थानीय समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान भी मिलता है।
    • उदाहरण के लिए- संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) में वनों की सुरक्षा और प्रबंधन का कार्य राज्य वन विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर करते हैं।
  • बेहतर परियोजना डिजाइन: योजना निर्माण में सक्रिय सामुदायिक भागीदारी स्थानीय ज्ञान एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना के डिजाइन को और बेहतर बनाने में सहायता करती है।

आगे की राह

  • नीतियों का एकीकरण: पारंपरिक योजना निर्माण फ्रेमवर्क और सरकारी नीतियों के साथ सहभागी नियोजन का एकीकरण किया जाना चाहिए।
  • स्थानीय शासन को मजबूत करना: जन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्वशासन की संरचना और कार्यप्रणाली में सुधार किया जाना चाहिए।
  • तकनीकी एकीकरण: बेहतर भागीदारी के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी आधारित उपकरणों को बढ़ावा देना चाहिए, जैसे कि सहभागी GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आदि।
  • सामुदायिक क्षमता निर्माण: लोगों को उनकी भागीदारी के महत्त्व के बारे में जागरूक करने और उनकी भागीदारी (विशेष रूप से महिलाएं और हाशिए पर रहे समुदाय की भागीदारी) को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
  • व्यवहार में परिवर्तन: लोगों की स्थायी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उनके दृष्टिकोण में बदलाव लाना होगा और उन्हें सशक्त बनाना होगा ताकि वे गवर्नेंस में सक्रिय रूप से भाग लें।

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