भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने “घरेलू प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंकों (D-SIBs)” की 2024 की सूची जारी की | Current Affairs | Vision IAS
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भारतीय स्टेट बैंक (SBI), HDFC बैंक और ICICI बैंक को RBI की 2024 की D-SIBs की सूची में बरकरार रखा गया है।

D-SIBs के बारे में

  • D-SIBs भारत की आर्थिक प्रणाली का संचालन जारी रखने के लिए अधिक महत्वपूर्ण बैंक हैं। 
  • D-SIBs का दर्जा अग्रलिखित आधारों पर दिया जाता है- उनका आकार, उनकी अंतर्संबंधता, उनका विकल्प या वित्तीय संस्थान अवसंरचना आसानी से उपलब्ध न होना और जटिलता।
  • D-SIBs परस्पर संबद्ध संस्थाएं होती हैं। इनकी विफलता पूरी वित्तीय प्रणाली को प्रभावित कर सकती है और अस्थिरता पैदा कर सकती है। इस कारण इन्हें असफल नहीं होने दिया जा सकता।
  • यदि D-SIBs सूची का कोई बैंक विफल होता है तो बैंकिंग प्रणाली और समग्र अर्थव्यवस्था की आवश्यक सेवाओं में बड़ा व्यवधान पैदा हो सकता है।

D-SIBs सूची की घोषणा के प्रावधान

  • यह सूची RBI द्वारा 2014 में जारी D-SIB फ्रेमवर्क पर आधारित है।
    • यह फ्रेमवर्क बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल समिति (BCBS) के फ्रेमवर्क पर आधारित है।
    • D-SIBs के रूप में सूचीबद्ध होने के लिए, किसी बैंक के पास राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद के 2 प्रतिशत से अधिक की परिसंपत्ति होनी चाहिए।
  • बैंकों को उनकी D-SIB की श्रेणी के आधार पर उनकी जोखिम भारित परिसंपत्तियों (RWAs) का कुछ हिस्सा अतिरिक्त कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET-1) के रूप में रखना होता है। इस आधार पर उन्हें 5 बकेट्स में वर्गीकृत किया जाता है।
    • बकेट 1 श्रेणी के बैंकों को सबसे कम CET-1 और बकेट 5 श्रेणी के बैंकों को सबसे अधिक CET-1 बनाए रखना होता है।
  • इसी प्रकार, यदि किसी विदेशी बैंक की भारत में शाखा है और यदि वह प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण वैश्विक बैंक (G-SIB) है, तो उसे G-SIB से संबंधित नियमों के अनुरूप भारत में अतिरिक्त CET-1 पूंजी अधिभार को बनाए रखना होगा।
    • G-SIBs की सूची फाइनेंसियल स्टेबिलिटी बोर्ड (FSB) जारी करता है।

मुख्य शब्दावलियां

  • जोखिम भारित परिसंपत्तियां (Risk Weighted Assets: RWAs): इसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि बैंक को अपने ऋण वितरण और अन्य परिसंपत्तियों से जुड़े जोखिम के आधार पर अपने पास निर्धारित न्यूनतम पूंजी सुरक्षित रखनी चाहिए।
    • इसकी गणना बैंक की अलग-अलग परिसंपत्तियों के जोखिम स्तर के आधार पर की जाती है।
  • कॉमन इक्विटी टियर 1 (CET 1): यह टियर 1 पूंजी का एक घटक है। इसमें मुख्य रूप से बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान द्वारा रखे गए कॉमन स्टॉक शामिल होते हैं।
    • यह उच्चतम गुणवत्ता वाली विनियामक पूंजी होती है। यह वास्तव में किसी बैंक की मूल पूंजी यानी कोर कैपिटल है। किसी नुकसान की स्थिति में इस पूंजी को तुरंत नकदी में बदला जा सकता है।
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