एसोचैम-ईग्रो (ASSOCHAM-Egrow) ने “व्यापार करने में चुनौतियों का सामना कर रहे MSMEs” रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • वित्त वर्ष 2024 में MSMEs द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 30%, विनिर्माण उत्पादन में 45% और निर्यात में 46% का योगदान किया गया है।
  • यह अनुमान लगाया गया है कि 2047 तक विनिर्माण और सेवा क्षेत्रकों में देश के 67% कार्यबल को रोजगार मिलेगा और ये क्षेत्रक GDP में 75% से अधिक का योगदान करेंगे।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रक के बारे में

  • MSMEs वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक स्तर पर 90% कारोबार MSMEs के तहत आते हैं और ये वैश्विक GDP में लगभग 50% का योगदान करते हैं।
  • भारतीय MSMEs क्षेत्रक का आकार 2028 तक लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक हो जाने की संभावना है।

MSMEs क्षेत्रक के समक्ष चुनौतियां

  • पंजीकरण में देरी: इसके लिए बोझिल पंजीकरण प्रक्रिया और अदक्ष सिंगल विंडो  क्लीयरेंस प्रणाली जिम्मेदार है।
  • सरकारी योजनाओं के बारे में अस्पष्टता की स्थिति: ऐसा योजनाओं के बारे में जागरूकता की कमी और भ्रम की स्थिति तथा केंद्र-राज्यों के मध्य समन्वय के अभाव के कारण होता है।
    • उदाहरण के लिए- GST के तहत जटिल पंजीकरण और उसमें बार-बार संशोधन से व्यापार करने की लागत बढ़ रही है।
  • प्रशासनिक बोझ: प्रोफेशनल टैक्स, कॉन्ट्रैक्ट लेबर, न्यूनतम मजदूरी आदि के मामले में डॉक्यूमेंट संबंधी दोहराव के कारण व्यापार संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही है। 
  • श्रम संबंधी मुद्दे: इसमें नई नियुक्ति वाले कर्मचारियों के लिए स्पष्ट ट्रायल पीरियड का अभाव, अकुशल श्रमिक, राज्यों के मध्य वेतन के संबंध में भिन्नता, अक्षम प्रशिक्षण केंद्र आदि शामिल हैं।
  • वित्तीय मुद्दे: MSMEs के विकास में संस्थागत वित्त तक सीमित पहुंच, अस्पष्ट ऋण आवेदन प्रक्रिया और जमानत की कमी आदि बाधा डालते हैं।
  • निर्यात संबंधी मुद्दे: अपर्याप्त अवसंरचना, भारतीय MSMEs के लिए पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस (ESG) रिपोर्ट्स की अनिवार्यता के अभाव आदि के कारण निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ता है।

रिपोर्ट में की गई सिफारिशें

  • समर्पित हेल्पलाइन और दस्तावेजों के लिए मानकीकृत चेकलिस्ट के साथ सिंगल विंडो   क्लीयरेंस के जरिए पंजीकरण व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जाना चाहिए।
  • योजनाओं के कार्यान्वयन को सुगम बनाने, GST पंजीकरण को सरल बनाने और बार-बार संशोधन करने से बचने के लिए समर्पित MSME समन्वय परिषद का गठन किया जाना चाहिए।
  • कर्मचारियों के लिए समान वेतन, किफायती श्रम बीमा योजनाएं और उद्योग से संबंधित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यबल का बेहतर प्रबंधन किया जाना चाहिए।
  • पर्याप्त वित्त-पोषण, मुद्रा (MUDRA) योजना की भूमिका और उस तक पहुंच को बढ़ाना, फिनटेक समाधान विकसित करना और वित्तीय साक्षरता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • MSMEs की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और उनके लिए एक अनुकूल ESG फ्रेमवर्क तैयार करना चाहिए।
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