संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी एंटिटी लिस्ट से भारतीय परमाणु संस्थानों को हटाएगा | Current Affairs | Vision IAS
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  • एंटिटी लिस्ट ऐसे मटेरियल के अनधिकृत व्यापार को रोकती है, जो आतंकवाद व सामूहिक विनाश के हथियार (WMD) कार्यक्रमों का समर्थन कर सकता है।
    • भारतीय संस्थाओं को इस सूची से हटाने से 2008 के भारत-अमेरिका परमाणु सहयोग समझौते को फिर से सक्रिय करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

भारत-अमेरिका परमाणु सहयोग समझौता

  • पृष्ठभूमि:
    • इस समझौते को 123 समझौता भी कहा जाता है। 123 समझौता जुलाई 2005 में पेश किया गया था। इस समझौते का यह नाम अमेरिकी परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1954 की धारा 123 के नाम पर रखा गया है।
    • यह समझौता भारत पर 30 साल से लगे अमेरिकी परमाणु व्यापार प्रतिबंध को समाप्त करता है। ये प्रतिबंध परमाणु परीक्षण और उसके बाद लगे प्रतिबंधों के चलते लगाए गए थे।
  • भारत के परमाणु कार्यक्रम के लिए सहयोग: यह समझौता अमेरिकी कंपनियों को भारत को परमाणु ईंधन, प्रौद्योगिकी और रिएक्टर बेचने की अनुमति देता है।
  • भारत की प्रतिबद्धता: भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों का विस्तार करने; अंतर्राष्ट्रीय परमाणु एवं मिसाइल निर्यात दिशा-निर्देशों का पालन करने; परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक रोक जारी रखने आदि पर सहमति व्यक्त की थी।

समझौते का महत्त्व 

  • यह भारत के परमाणु अप्रसार के मामले में मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड तथा परमाणु कार्यक्रम पर स्वैच्छिक सुरक्षा उपायों को लागू करने के इतिहास को मान्यता देता है।
  • यह भारत को ऐसी परमाणु सुविधाओं पर अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिनका पहले अंतर्राष्ट्रीय रूप से निरीक्षण नहीं किया गया था।
  • परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) का औपचारिक सदस्य न होते हुए भी भारत द्वारा इसके निर्यात मानकों का पालन करने की प्रतिबद्धता को मान्यता दी गई है।
    • भारत अन्य बहुपक्षीय हथियार और तकनीकी निर्यात नियंत्रण समूहों का सदस्य है, जैसे:
      • मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR);
      • ऑस्ट्रेलिया ग्रुप; 
      • वासेनार अरेंजमेंट आदि। 
  • समझौते के कार्यान्वयन में मुख्य चुनौतियां
    • भारत का परमाणु दायित्व (Nuclear Liability): परमाणु आपदा पीड़ितों हेतु मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए भारत ने ‘परमाणु नुकसान के लिए सिविल दायित्व अधिनियम (CLNDA), 2010’ बनाया है। इसके चलते अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के साथ तनाव बना हुआ है।
    • परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर न करना: भारत द्वारा परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर न करना भी इसके कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न करता है।
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