तदर्थ न्यायाधीश (Ad Hoc Judge) | Current Affairs | Vision IAS
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सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को अस्थायी कार्यकाल के लिए हाई कोर्ट्स में तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य लंबित आपराधिक मामलों का शीघ्र निपटारा करना है।

 तदर्थ न्यायाधीश के बारे में

  • संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 224A के अनुसार किसी हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से किसी भी हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अपने यहां न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का अनुरोध कर सकता है। 
  • नियुक्ति की प्रक्रिया: मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MOP), 1998 में उल्लेखित है। 

नोट: संविधान के अनुच्छेद 127 में सुप्रीम कोर्ट में कोरम पूरा न होने की स्थिति में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।

हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने “शत्रु संपत्ति” से संबंधित एक मामले में याचिकाकर्ता को अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष याचिका दायर करने को कहा है।

शत्रु संपत्ति के बारे में

  • ऐसी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत विनियमित किया जाता है।
  • 1968 के अधिनियम में 'शत्रु' को ऐसे देश और उसके नागरिक के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसने भारत पर बाह्य आक्रमण किया हो। इन देशों में पाकिस्तान और चीन शामिल हैं। 
  • शत्रु संपत्ति से तात्पर्य किसी शत्रु देश, उसके नागरिक या उसकी कंपनी द्वारा भारत में स्वामित्वाधीन या धारित या प्रबंधित किसी संपत्ति से है। 
  • इस अधिनियम में 2017 के संशोधन द्वारा ‘शत्रु’ की परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें निम्नलिखित को भी शामिल किया गया:
    • शत्रु देश का कानूनी वारिस या उत्तराधिकारी- चाहे वह भारत का नागरिक हो या न हो, या किसी ऐसे देश का नागरिक हो जो शत्रु देश न हो।
    • कोई भी शत्रु जिसने किसी अन्य देश की नागरिकता ले ली है। 

हाल ही में, केंद्रीय वित्त मंत्री ने बैंकों से वित्तीय धोखाधड़ी की जांच के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के साथ एकीकरण को पूरा करने को कहा।

  • I4C के साथ एकीकरण के बाद, वित्तीय धोखाधड़ी की कोई भी शिकायत, त्वरित आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित बैंक को भेजी जाएगी।

‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)’ के बारे में

  • मंत्रालय: इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत स्थापित किया गया है। 
  • उद्देश्य:
    • विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के मामलों से निपटने के लिए एक केंद्रीय हब के रूप में कार्य करना। साथ ही, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान बनाना और रुझानों का विश्लेषण करना भी शामिल है।
    • जन जागरूकता बढ़ाते हुए साइबर अपराधों के बारे में सचेत करना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा सक्रिय कार्रवाई सुनिश्चित करना। 
    • साइबर-अपराध से संबंधित क्षेत्रों में पुलिस, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण में मदद करना।

हाल ही में संसद की लोक लेखा समिति ने ‘विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (AERA)’ से देश भर में विमानपत्तन संचालकों द्वारा लगाए जाने वाले उपयोगकर्ता विकास शुल्क के बारे में विवरण प्रस्तुत करने को कहा है।

विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (AERA) के बारे में

  • यह भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है।
  • मुख्य कार्य:
    • वैमानिकी सेवाओं के लिए प्रशुल्क तय करना: प्रशुल्क तय करते समय पूंजीगत व्यय, दक्षता लागत, आर्थिक व्यवहार्यता, सरकारी रियायतें आदि पर विचार किया जाता है। 
    • यह विमान नियमावली, 1937 के अंतर्गत विकास शुल्क और यात्री सेवा शुल्क निर्धारित करता है।
    • यह विमानपत्तनों पर उपलब्ध सेवाओं की गुणवत्ता, निरंतरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है। 
    • केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य या प्रशुल्क संबंधी अन्य कर्तव्यों का पालन करता है।

हाल ही में, नासा ने एक अनोखे ब्लैक होल (LID-568) की खोज की है। इससे सुपरमैसिव ब्लैक होल के बारे में जानकारी मिलेगी। 

  • LID-568 एक कम द्रव्यमान वाला सुपरमैसिव ब्लैक होल है, जो बिग बैंग के 1.5 अरब वर्ष बाद अस्तित्व में आया है। 

सुपरमैसिव ब्लैक होल के बारे में 

  • यह सबसे आम प्रकार का ब्लैक होल है। इसमें तीव्र गुरुत्वाकर्षण होता है, जिसके कारण तारे एक विशेष तरीके से इसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं। 
    • ब्लैक होल ब्रह्मांडीय पिंड हैं, जिनमें बहुत छोटे स्थान में पदार्थ की विशाल सांद्रता होती है। 
  • एडिंगटन सीमा: यह सीमा ब्लैक होल द्वारा मैटर को ग्रहण करने की दर को नियंत्रित करती है। 
    • एक बार जब यह सीमा पार हो जाती है, तो इसे सुपर-एडिंगटन अभिवृद्धि कहा जाता है। 
    • LID-568 अपनी एडिंगटन सीमा से 40 गुना अधिक दर से मैटर को ग्रहण कर रहा है।

हाल ही में, INCOIS (हैदराबाद) को सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार-2025 के लिए चुना गया।

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती (23 जनवरी) के अवसर पर भारत में आपदा प्रबंधन में योगदान के लिए व्यक्तियों और संगठनों को सम्मानित करने हेतु वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा की गई थी।

INCOIS के बारे में 

  • उत्पत्ति: इसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के तहत 1999 में गठित किया गया था। यह पृथ्वी प्रणाली विज्ञान संगठन (ESSO) की एक इकाई है। 
    • यह यूनेस्को के समुद्र विज्ञान आयोग (IOC) का स्थायी सदस्य है। 
  • महत्वपूर्ण कार्य
    • समुद्र से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी और सलाहकारी सेवाएं प्रदान करता है। 
    • भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र (ITEWC) के माध्यम से सुनामी, तूफानी लहरों, ऊंची लहरों आदि के लिए चेतावनी जारी करता है। 

हाल ही में, कश्मीरी चिनार को QR-कोड के साथ जियो-टैगिंग के माध्यम से डिजिटल सुरक्षा मिली है। 

कश्मीर चिनार (प्लैटैनस ओरिएंटलिस) के बारे में 

  • मूल स्थान: यह मूलतः ग्रीस से संबंधित है। यह पूरे कश्मीर में पाया जाता है, विशेष रूप से पूर्वी हिमालय में उगता है। 
    • श्रीनगर की डल झील के एक द्वीप चार चिनार का नाम इसके नाम पर ही रखा गया है। 
  • प्रमुख विशेषताएं:
    • विशाल एवं पर्णपाती तथा 30 मीटर तक ऊंचे होने वाले इस वृक्ष को पूरी ऊंचाई तक पहुंचने में लगभग 150 वर्ष लगते हैं। 
    • यह अपनी दीर्घायु और रंग बदलती पत्तियों के लिए जाना जाता है। जैसे- गहरी हरी (ग्रीष्म), रक्त-लाल, अंबर और पिली (शरद ऋतु)। 
    • उपयोग: इसका औषधीय उद्देश्यों, इंटीरियर फर्नीचर के लिए लकड़ी, रंग बनाने आदि के लिए उपयोग किया जाता है। 

हाल ही में, मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने स्थानीय निकायों को वैगई नदी के पुनरुद्धार के लिए एक कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया। 

वैगई नदी के बारे में 

  • उद्गम: वरुशनद क्षेत्र में पश्चिमी घाट के पहाड़ी क्षेत्रों की पूर्वी ढलान से होता है। 
    • कावेरी और पम्बर कोट्टाकरैयार बेसिन (उत्तर), गुंडर बेसिन (दक्षिण), पेरियार बेसिन (पश्चिम) तथा बंगाल की खाड़ी (पूर्व) से घिरा हुआ चापाकार बेसिन। 
  • प्रमुख सहायक नदियां: वरात्तर, नागालर, वराहनाधी, मंजालार, मरुधनधी, सिरुमलियार, सथैयार आदि।
  • प्रवाह: तमिलनाडु के थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम जिले से होकर बहती है। 
  • अपवाह: पाक खाड़ी में मिलती है। 
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