चीन विश्व का पहला फ्यूजन-फिशन हाइब्रिड पावर प्लांट, शिंघुआ (Xinghuo) विकसित कर रहा है | Current Affairs | Vision IAS
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30 से अधिक टार्गेटेड Q फैक्टर वाली 100 MW की यह परियोजना, 2030 तक वास्तविकता बन सकती है।

  • Q-फैक्टर, संलयन रिएक्टर (Fusion reactor) में संलयन प्रक्रिया के दौरान प्लाज्मा को गर्म करने के लिए आवश्यक ऊर्जा और उत्पन्न ऊर्जा के बीच का अनुपात है।

फ्यूजन-फिशन हाइब्रिड रिएक्टर के बारे में

  • संकल्पना: संलयन रिएक्टर द्वारा उत्पादित उच्च तीव्रता वाले न्यूट्रॉन फ्लक्स का उपयोग करके परमाणु विखंडन अभिक्रिया को संचालित करना। साथ ही, फर्टाइल मटेरियल से विखंडनीय ईंधन का उत्पादन करना।
  • डिजाइन: इसमें एक परमाणु संलयन रिएक्टर कोर होता है, जहां ड्यूटेरियम और ट्रिटियम नाभिक को संयोजित कर हीलियम तथा एक तीव्र न्यूट्रॉन का विकास किया जाता है। ये फर्टाइल मटेरियल (जैसे यूरेनियम-238 या थोरियम-232) के आवरण से घिरे होते हैं। 

हाइब्रिड रिएक्टर की प्रमुख विशेषताएं

  • संलयन और विखंडन दोनों की विशेषताओं का लाभ उठाता है: संलयन रिएक्टर न्यूट्रॉन रिच (न्यूट्रॉन बहुल)’ और ‘पावर पुअर’ होते हैं, जबकि विखंडन रिएक्टर ‘न्यूट्रॉन पुअर (कम)’ और ‘पावर रिच’ होते हैं।
    • यहां पावर पुअर का अर्थ यह है कि वर्तमान में संलयन रिएक्टरों को चालू करने और उन्हें संचालित करने के लिए जितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उतनी निवल ऊर्जा (net power) वे उत्पन्न नहीं कर पाते।
  • कम ऊर्जा की आवश्यकता: हाइब्रिड रिएक्टर के लिए संलयन शक्ति, शुद्ध संलयन की तुलना में कम होती है, क्योंकि हाइब्रिड रिएक्टर का उद्देश्य न्यूट्रॉन का उत्पादन करना है, न कि ऊर्जा का।
  • रेडियोधर्मी अपशिष्टों में कमी: कवर के भीतर न्यूट्रॉन फ्लक्स का लंबे समय तक रहने वाले रेडियोधर्मी अपशिष्ट को कम हानिकारक बनाने, उसे कम समय तक बने रहने वाले तथा आसानी से निपटान योग्य अपशिष्ट में परिवर्तित करने में उपयोग किया जा सकता है।
  • ईंधन की आपूर्ति: हाइब्रिड रिएक्टर ब्रीडिंग के माध्यम से पर्याप्त विखंडनीय ईंधन का उत्पादन करेंगे।
    • संलयित न्यूट्रॉन फर्टाइल मटेरियल को विखंडनीय पदार्थों (जैसे प्लूटोनियम-239 या यूरेनियम-233) में परिवर्तित कर सकते हैं। इससे ईंधन की आपूर्ति बढ़ जाती है।

नाभिकीय विखंडन (Fission) और नाभिकीय संलयन (Fusion) के बारे में  

  • नाभिकीय विखंडन के अंतर्गत एक बड़ा परमाणु दो या दो से अधिक छोटे परमाणुओं में विभाजित होता है। इससे ऊर्जा और न्यूट्रॉन्स मुक्त होते हैं। 
  • नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है, जिसमें दो हल्के परमाणु नाभिक आपस में मिलकर एक भारी परमाणु नाभिक का निर्माण करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।
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