केरल सरकार ने जहाज डूबने की वजह से पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए एडमिरल्टी अधिनियम 2017 (Admiralty (Jurisdiction and Settlement of Maritime Claims) Act) के तहत मुआवजे की मांग की है।
अधिनियम के बारे में
- लागू होना: यह अधिनियम हर प्रकार के पोत (जहाज) पर लागू होता है, चाहे उसके मालिक का निवास स्थान या डोमिसाइल किसी भी देश में हो।
- कवर किए गए सामुद्रिक क्लेम के प्रकार: जहाजों को हुई क्षति, स्वामित्व और समझौते संबंधी विवाद, समुद्री जीव-जंतुओं की हानि, समुद्री क्षेत्र के कर्मियों के पारिश्रमिक संबंधी मुद्दे, पर्यावरण को नुकसान।
- न्यायिक-अधिकार क्षेत्र: संबंधित उच्च न्यायालयों में निहित होना चाहिए।
- क्षति के लिए मुआवजा: यह अधिनियम, हुए नुकसान, सुधारात्मक कदम और पूर्व-स्थिति बहाली पर हुए खर्च के लिए मुआवजे की व्यवस्था करता है।
- क्लेम का निपटारा होने या सिक्योरिटी राशि जमा किए जाने तक जहाज को रोककर रखा जा सकता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) अब शैडो बैंक नहीं रह गई हैं।
शैडो बैंकिंग के बारे में
- शैडो बैंकिंग का मतलब है वित्तीय मध्यवर्तियों और संस्थाओं का एक नेटवर्क जो पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली के दायरे से बाहर कार्य करते हैं। इन्हें पारंपरिक बैंकों की तरह सख्त विनियामकीय कानूनों का पालन नहीं करना होता है।
- मुख्य चिंताएं: ऐसी संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता की कमी होती है। साथ ही, संचालन के क्रम में इन पर कई प्रकार के वित्तीय संकटों का सामना करने का खतरा बना रहता है।
- भूमिका: ये संस्थाएं अलग-अलग क्षेत्रकों को ऋण और लिक्विडिटी प्रदान करके वैश्विक वित्तीय प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- उदाहरण: मनी मार्केट फंड्स, हेज फंड्स, प्राइवेट इक्विटी फंड्स, सिक्यूरिटाइज़ेशन और एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज़।
कैट बॉण्ड (Catastrophe Bonds) अपेक्षाकृत नए प्रकार का वित्तीय साधन है। यह प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की योजना बनाने में मदद कर सकता है।
कैट बॉण्ड्स के बारे में
- यह एक वित्तीय साधन (Financial instrument) है, जो विनाशकारी आपदा को कवर करने वाले बीमा जोखिम को निवेशकों के बीच वितरित कर देता है। ऐसे बॉण्ड्स के निवेशकों को उच्च लाभ प्राप्त होता है, लेकिन यदि कोई सूचीबद्ध आपदा घटित होती है तो मूलधन का नुकसान भी हो सकता है।
- इनमें भूकंप, हरिकेन, बाढ़ और अन्य चरम आपदाएं शामिल हो सकती हैं।
- इसमें निवेशकों को उच्च यील्ड (ब्याज) प्राप्त हो सकता है। हालांकि, यदि बॉण्ड की परिपक्वता से पहले कोई सूचीबद्ध प्राकृतिक आपदा घटित हो जाती है, तो उन्हें मूलधन का नुकसान भी हो सकता है।
- जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं बीमा उद्योग में कैट बॉण्ड्स को और अधिक लोकप्रिय बना रही हैं।
भारत ने स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट प्रणाली का परीक्षण किया है।
एक्सटेंडेड रेंज एंटी-सबमरीन रॉकेट (ERASR) के बारे में
- यह एक पूर्णतया स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट है। इसका उपयोग शत्रुओं की पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। इसे भारतीय नौसेना के जहाजों से दागा जाता है।
- इसमें ट्विन-रॉकेट मोटर कॉन्फ़िगरेशन होता है, जो उच्च सटीकता और निरंतरता के साथ अलग-अलग दूरी पर स्थित लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।
- इसमें स्वदेशी रूप से विकसित इलेक्ट्रॉनिक टाइम फ्यूज का उपयोग किया गया है।
- इसका डिजाइन और विकास DRDO की पुणे स्थित आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) द्वारा किया गया है।
हाल ही में, स्वदेशी रूप से डिजाइन और विनिर्मित भारत का पहला डाइविंग सपोर्ट पोत 'आईएनएस निस्तार' भारतीय नौसेना को सौंपा गया।
INS निस्तार के बारे में
- यह अत्याधुनिक डाइविंग उपकरणों से लैस है। यह 300 मीटर की गहराई तक डीप-सी सैचुरेशन डाइविंग करने में सक्षम है।
- इसमें समुद्र में 75 मीटर गहराई तक डाइविंग ऑपरेशन करने के लिए एक साइड डाइविंग स्टेज भी है।
- यह पोत डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल (DSRV) के लिए ‘मदर शिप’ के रूप में कार्य करेगा, जो समुद्र में कर्मियों को बचाने और निकालने के कार्य में सहायक होगा।
- यह कई रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROVs) के संयोजन में कार्य करता है, जो 1000 मीटर की गहराई तक डाइवर मॉनिटरिंग और बचाव कार्यों को अंजाम दे सकते हैं।
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी रूप से निर्मित ‘एडवांस्ड टोड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम्स (ATAGS)’ परियोजना को "अनुकरणीय मिशन मोड सफलता" करार दिया।
ATAGS के बारे में
- डिज़ाइनर: यह सिस्टम DRDO की पुणे स्थित आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) प्रयोगशाला द्वारा डिज़ाइन की गई है।
- यह एक बड़ी तोप (गन) है। यह लंबी दूरी तक सटीक हमला करने के लिए गाइडेड मिसाइलें दाग सकती है।
- इसमें एक इलेक्ट्रिक प्रणाली है, जिसे कम रखरखाव की आवश्यकता होती है। इस तरह यह लंबे समय तक विश्वसनीय रूप से कार्य करती है।
- इसमें एक ऑटोमेटिक एम्युनिशन हैंडलिंग सिस्टम है, जिसमें क्रेन भी शामिल है।
हाल ही में, गुजरात में माही नदी पर बना एक पुल ढह गया।
माही नदी के बारे में
- नदी का प्रकार: यह पश्चिम दिशा की ओर बहने वाली बड़ी अंतरराज्यीय नदी है। इसकी विशालता के कारण इसे ‘महिसागर’ भी कहा जाता है।
- उद्गम स्थल: यह नदी मध्य प्रदेश में धार जिले के सरदारपुर के पास विंध्याचल की उत्तरी ढलान से निकलती है।
- संगम: यह नदी अरब सागर के खंभात की खाड़ी में जाकर मिल जाती है।
- अंतर्राज्यीय नदी: यह नदी मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से होकर बहती है।
- स्थलाकृतिक सीमाएँ
- उत्तर और उत्तर-पश्चिम : अरावली पहाड़ियाँ,
- पूर्व : एक कटक (रिज), जो इसे चंबल बेसिन से अलग करता है।
- दक्षिण : विंध्य पर्वतमाला,
- पश्चिम : खंभात की खाड़ी।
- अनन्य विशेषताएं:
- यह भारत की उन कुछ नदियों में शामिल हैं जो कर्क रेखा को दो बार काटती हैं।
- यह नदी टेढ़ी-मेढ़ी धारा या विसर्प बनाती है। पश्चिम दिशा की ओर बहने वाली अन्य नदियों में ऐसी विशेषता कम दिखती है।
वैज्ञानिकों ने तुर्काना झील में खोजी गई विलुप्त स्तनधारियों के दांतों की एनामेल से 18 से 20 मिलियन वर्ष पुराने प्रोटीन निकालने में सफलता प्राप्त की है।
तुर्काना झील के बारे में
- इस झील का मूल नाम रुडोल्फ झील था। इसे जेड सागर भी कहा जाता है।
- अवस्थिति: इस झील का अधिकांश हिस्सा उत्तरी केन्या में है। इसका कुछ हिस्सा इथियोपिया में भी है।
- सतह क्षेत्रफल की दृष्टि से यह अफ्रीका की चौथी सबसे बड़ी झील है। साथ ही, यह दुनिया की सबसे बड़ी स्थायी रेगिस्तानी-झील है।
- लेक तुर्काना नेशनल पार्क को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया है। तुर्काना झील इस पार्क का हिस्सा है।
- झील में मिलने वाली एकमात्र बारहमासी सहायक नदी: ओमो नदी।