जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने यूरेनस (अरुण) ग्रह के 29वें चंद्रमा की खोज की है। इस चंद्रमा को S/2025 U1 अस्थायी नाम दिया गया है। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा अभी इसका आधिकारिक नाम चुना जाना बाकी है।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के बारे में
- प्रक्षेपण: इसे दिसंबर 2021 में नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) ने मिलकर लॉन्च किया।
- मिशन अवधि: 5 से 10 वर्ष।
- टेलीस्कोप का प्रकार: यह परिक्रमा कर रही इंफ्रारेड वेधशाला है।
- कक्षा: यह हबल की तरह पृथ्वी की परिक्रमा नहीं करता है, बल्कि यह सूर्य की परिक्रमा करता है। यह पृथ्वी से 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर दूसरे लैग्रेंज पॉइंट (L2) से सूर्य की परिक्रमा कर रहा है।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य हमारे ब्रह्मांड के इतिहास के हर चरण का अध्ययन करना है। इसमें बिग बैंग विस्फोट के बाद की पहली चमकदार रोशनी से लेकर सौर मंडल के निर्माण तक की प्रक्रियाएं शामिल हैं।
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1 sourceमाना जाता है कि भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान AI-आधारित एक्स-गार्ड फाइबर-ऑप्टिक टोड डिकॉय (FOTD) प्रणाली तैनात की थी।
X-गार्ड FOTD प्रणाली के बारे में
- इसे इजरायल की रक्षा कंपनी राफेल ने विकसित किया है। यह किसी भी विमान के ऑनबोर्ड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) उपकरण के साथ मिलकर संचालित होती है। यह सबसे अत्याधुनिक रडार को भी चकमा दे सकती है।
- इस प्रणाली का उपयोग कम और अधिक, दोनों तरह की ऊँचाई पर और सबसोनिक से सुपरसोनिक गति तक किया जा सकता है।
- इसे या तो तब तैनात किया जाता है जब विमान किसी खतरे वाले क्षेत्र के करीब पहुंचता है या फिर किसी आसन्न ख़तरे का पता चलने पर। इसे उड़ान के दौरान वापस भी लिया जा सकता है।
- यह उड़ान भरते समय संचार के लिए बिजली और फाइबर-ऑप्टिक, दोनों तरह की प्रणालियों का उपयोग करना जारी रखता है।
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1 sourceसुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि उपभोक्ता फोरम अपने सभी आदेशों को लागू कर सकते हैं, केवल अंतरिम आदेशों को ही नहीं, और उन्हें दीवानी (सिविल) अदालत की डिक्री या निर्णय की तरह माना जाएगा।
- नए निर्णय के माध्यम से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 में वर्ष 2002 में किए गए संशोधन की गलती को सुधारा गया है। संशोधन के तहत उपभोक्ता फोरम की शक्तियों को सीमित कर दिया गया था।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की जगह अब उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (CPA) 2019 लागू किया गया है।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) का गठन करने और उपभोक्ता संरक्षण आयोगों में न्याय-निर्णयन प्रक्रिया को सरल बनाने से संबंधित प्रावधान हैं।
असम राइफल्स के अनुसार लगभग 42,000 म्यांमार नागरिक नयी मुक्त आवागमन व्यवस्था के तहत भारत में प्रवेश किए हैं।
‘मुक्त आवागमन व्यवस्था’ के बारे में
- यह भारत और म्यांमार के बीच एक द्विपक्षीय व्यवस्था है। इसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली जनजातियों को पासपोर्ट या वीजा के बिना एक-दूसरे देश की सीमा में एक निश्चित दूरी तक आने-जाने की अनुमति है।
- इसे 2018 में स्थलीय सीमा-पार समझौते के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया। समझौता के तहत दोनों देशों में सीमा रेखा से 16 किलोमीटर भीतर तक मुक्त आवाजाही की अनुमति है।
- फरवरी 2024 में, केंद्रीय गृह मंत्री ने सुरक्षा और जनसांख्यिकीय चिंताओं का हवाला देते हुए इसे समाप्त करने की घोषणा की थी।
- हालांकि, इस व्यवस्था को समाप्त करने की औपचारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं की गई है।
- दिसंबर 2024 में, केंद्र सरकार ने भारत-म्यांमार सीमा-पार आवाजाही के लिए नई व्यवस्था शुरू की।
नई आवगमन-व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं
- इसके तहत असम राइफल्स भारत की सीमा से 10 किलोमीटर भीतर तक 7 दिनों के लिए आने के लिए ‘वैध एकल-प्रवेश पास’ जारी करेगा।
- ‘एकल-प्रवेश पास’ को भारत से वापस लौटने पर उसी क्रॉसिंग पॉइंट पर वापस करना होगा जहां से प्रवेश किया गया था।
- प्रत्येक क्रासिंग पॉइंट्स पर असम राइफल्स के जवान के साथ पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारी तैनात रहेंगे।
एक रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेनी ड्रोन हमले के कारण रूस के कुर्स्क परमाणु ऊर्जा संयंत्र में कुछ समय के लिए आग लग गई।
कुर्स्क क्षेत्र के बारे में
- अवस्थिति: यह रूस के यूरोपीय भाग में स्थित है। इसकी पश्चिमी सीमा यूक्रेन से लगती है।
- इतिहास: यह क्षेत्र कुर्स्क की लड़ाई (1943) के लिए प्रसिद्ध है, जो इतिहास का सबसे बड़ा टैंक-युद्ध था। यह लड़ाई द्वितीय विश्व युद्ध में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई थी।
- भूगोल: यह क्षेत्र नीपर और डॉन नदियों की घाटियों में स्थित है।
- प्राप्त खनिज: यहाँ कुर्स्क चुंबकीय विसंगति (Kursk Magnetic Anomaly) प्राप्त होती है, जो विश्व की सबसे बड़ी चुंबकीय विसंगति है। यह विश्व के सबसे समृद्ध लौह अयस्क भंडारों में से एक है।
हाल ही में, हवाई द्वीप में किलाउआ ज्वालामुखी में उद्गार हुआ। हवाई, मध्य प्रशांत महासागर में स्थित ज्वालामुखीय द्वीपों का एक समूह है।
- हवाई, संयुक्त राज्य अमेरिका का एकमात्र ऐसा राज्य है जो पूरी तरह से द्वीपों से बना है।
किलाउआ ज्वालामुखी के बारे में
- हालिया उद्गार हलेमाउमाउ क्रेटर (Halemaumau Crater) में हो रहा है जो हवाई ज्वालामुखीय राष्ट्रीय उद्यान का हिस्सा है।
- यह दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
- हालिया उद्गार से रुक-रुक कर लावा (episodic lava fountaining) निकल रहा है। इस तरह का उद्गार इससे पहले 1983-86 में देखा गया था।
- ज्वालामुखी उद्गार से उत्सर्जित गैसें: मुख्य रूप से जल वाष्प (H2O), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और सल्फर डाइऑक्साइड (SO2)।
नेपाल आधिकारिक तौर पर इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) में शामिल हो गया है। IBCA भारत के नेतृत्व में शुरू की गई एक वैश्विक पहल है।
इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के बारे में
- शुरुआत: भारत के प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अप्रैल 2023 में शुरू किया गया।
- उद्देश्य: विश्व में सात बिग कैट्स प्रजातियों का संरक्षण सुनिश्चित करना। ये सात बिग कैट्स प्रजातियां हैं: बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा।
- सचिवालय मुख्यालय: भारत में।
- संरचना: यह एक बहु-देशीय और बहु-एजेंसी गठबंधन है। इसमें बिग कैट्स के प्राकृतिक पर्यावास वाले 95 देश (रेंज देश) और वे देश शामिल हैं जहां बिग-कैट्स के प्राकृतिक पर्यावास नहीं हैं लेकिन वे बिग-कैट्स के संरक्षण में रुचि रखते हैं।
- वर्तमान सदस्य देश: भारत सहित 13 सदस्य देश।
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि फसल अवशेष का खेती पर गंभीर असर पड़ता है और यह कृषि-पारिस्थितिकी की विविधता को नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण खेतों में कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है।
- फसल काटने के बाद खेत में बची हुई सामग्रियों (डंठल/पराली, पत्ते, भूसी आदि) को फसल अवशेष (Crop residues) कहते हैं।
हालिया अध्ययन के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- फसल अवशेष जलाने से मृदा के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे दीर्घकाल में फसल उत्पादकता घट जाती है।
- फसल अवशेष जलाने से निकलने वाला धुआं वायु को प्रदूषित करता है, और इससे कीट-पतंगों व पक्षियों के प्राकृतिक कार्य बाधित होते हैं।
- मकड़ियों, लेडीबर्ड्स, मेंढकों, केंचुओं जैसे प्राकृतिक शिकारियों की संख्या में कमी आ रही है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ रहा है।
- कीटों और उनका शिकार करने वाले जीवों की आबादी में कमी का पोषण स्तरों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और खाद्य श्रृंखला बाधित होती है।