समुद्री जैव विविधता संधि के प्रिपरेटरी कमीशन का दूसरा सत्र संपन्न हुआ | Current Affairs | Vision IAS
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इस संधि को औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) के तहत राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों की समुद्री जैविक विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग पर समझौता (BBNJ एग्रीमेंट) के रूप में जाना जाता है।

BBNJ एग्रीमेंट के बारे में

  • इसे 2023 में संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों की समुद्री जैव विविधता पर अंतर-सरकारी सम्मेलन में अपनाया गया था।
    • यह UNCLOS का तीसरा कार्यान्वयन समझौता बन गया है। अन्य दो समझौते निम्नलिखित हैं:
      • UNCLOS के कार्यान्वयन से संबंधित 1994 का भाग 11) समझौता तथा 
      • 1995 का संयुक्त राष्ट्र फिश स्टॉक समझौता। 
  • उद्देश्य: राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्र (ABNJ) की समुद्री जैविक विविधता का संरक्षण और सतत उपयोग सुनिश्चित करना।
    • ABNJ को अक्सर हाई सीज भी कहा जाता है। ये समुद्री क्षेत्र सभी देशों के लिए खुले होते हैं। इनका उपयोग नेविगेशन, ओवरफ्लाइट, जल के भीतर केबल बिछाने, पाइपलाइन बिछाने आदि के लिए किया जाता है।
  • यह समझौता ‘हाई सीज़’ और ‘एरिया’ पर लागू होता है, तथा निम्नलिखित चार मुख्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है:
    • समुद्री आनुवंशिक संसाधन, जिसमें लाभों का उचित और न्यायसंगत बंटवारा शामिल है;
    • क्षेत्र-आधारित प्रबंधन उपकरण, जिसमें समुद्री संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं;
    • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन; तथा 
    • क्षमता-निर्माण और समुद्री प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण।
  • इसमें वित्त-पोषण तंत्र की व्यवस्था की गई है और संस्थागत व्यवस्थाएं निर्धारित की गई हैं। इसमें एक कांफ्रेंस ऑफ द पार्टीज, एक समाशोधन-गृह तंत्र और एक सचिवालय शामिल है।
  • भारत ने इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, लेकिन अभी इसका अनुसमर्थन नहीं किया है।
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