बहुपक्षवाद (Multilateralism) कमजोर हो रहा है | Current Affairs | Vision IAS
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विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बहुपक्षवाद के पतन से वैश्विक समन्वय में बाधा आ रही है, जिससे क्षेत्रीय साझेदारियों की ओर बदलाव आ रहा है तथा उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए संस्थागत सुधारों की आवश्यकता है।

In Summary

विशेषज्ञों ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला है कि बहुपक्षवाद ऐसे समय में कमजोर हो रहा है, जब विश्व को समन्वित वैश्विक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है। 

  • बहुपक्षवाद: साझी समस्याओं के समाधान के लिए व्यक्तिगत क्षमता से परे कम-से-कम तीन पक्षों के बीच समन्वित कार्रवाई बहुपक्षवाद कहलाती है। 

बहुपक्षवाद का कमजोर होना

  • वैश्विक संगठन की प्रभावशीलता में कमी: उदाहरण के लिए- संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा WTO के नए अपीलीय निकाय की नियुक्तियों को अवरुद्ध करना, जिससे अपीलों का समाधान नहीं हो रहा है तथा समाधानों के प्रवर्तन में भी देरी हो रही है। 
  • ग्लोबल फ़्रेमवर्क्स से हटना: उदाहरण के लिए- अमेरिका मानवाधिकार परिषद और यूनेस्को से बाहर हो गया है। 
  • संघर्षों का समाधान: उदाहरण के लिए- रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान में संयुक्त राष्ट्र की विफलता।  
  • मिनिलेटरलिज़्म और क्षेत्रीय साझेदारियों का उदय: बहुपक्षीय संस्थाओं में निर्णय लेने में देरी के कारण, राष्ट्र मिनिलेटरलिज़्म की ओर बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए- ब्रिक्स, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP), आदि।
  • अन्य: एकतरफा आर्थिक प्रतिबंध, संरक्षणवादी नीतियां लागू करना आदि।

आगे की राह 

  • संस्थागत सुधार: उदाहरण के लिए- भारत, जापान और ब्राजील जैसे देशों को वीटो शक्ति प्रदान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार करना चाहिए, ताकि इस संस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण एवं प्रभावी बनाया जा सके।
  • नई एवं उभरती वैश्विक चुनौतियों का समाधान: डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उभरते क्षेत्रकों में नए वैश्विक मानक स्थापित करने चाहिए। 
  • अन्य: ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं (जैसे- जलवायु वित्त) का समाधान करना चाहिए, संरक्षणवादी नीतियों का समाधान करना चाहिए आदि।
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