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यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

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हाल ही में, उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एक पैनल ने गोवा में टाइगर रिज़र्व्स को अधिसूचित करने की सिफ़ारिश की। 

  • इसने कोटिगाओ वन्यजीव अभयारण्य और नेत्रावली वन्यजीव अभयारण्य को कोर तथा भगवान महावीर राष्ट्रीय उद्यान को बफर ज़ोन के रूप में अनुशंसित किया है।
    • कोटिगाओ वन्यजीव अभयारण्य और नेत्रावली वन्यजीव अभयारण्य कर्नाटक के काली टाइगर रिज़र्व से सटे हुए हैं।
    • भगवान महावीर राष्ट्रीय उद्यान दूधसागर जलप्रपात के लिए प्रसिद्ध है।

टाइगर रिज़र्व के बारे में

  • अधिसूचना: राज्य सरकारें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38V के प्रावधानों के अनुसार टाइगर रिज़र्व अधिसूचित करती हैं। इसके लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से सलाह ली जाती है।
    • NTCA वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक वैधानिक निकाय है। इसका अध्यक्ष पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री होता है।
  • भारत में 58 टाइगर रिज़र्व हैं। सबसे नया मध्य प्रदेश में माधव टाइगर रिज़र्व है।

एक हालिया अध्ययन में बिहार में स्तनपान कराने वाली माताओं के स्तन के दूध में यूरेनियम-238 की उपस्थिति का पता चला है।

U-238 सांद्रता और विषाक्तता के बारे में

  • प्रकृति: यूरेनियम-238 (U-238) प्रकृति में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला यूरेनियम समस्थानिक है। प्राकृतिक यूरेनियम में इसका हिस्सा 99.3% होता है,
  • उपस्थिति: यह मृदा, चट्टानों और भूजल में तथा प्राकृतिक परिस्थितियों में पेयजल में पाया जाता है।
  • विषाक्तता का आधार: U-238 रेडियोधर्मिता की तुलना में अधिक जोखिम पैदा करता है। ऐसा इस कारण, क्योंकि यह भारी धातु के रूप में रासायनिक विषाक्तता उत्पन्न करता है। इससे गुर्दे खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। 
  • सुरक्षित सीमाएं: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पेयजल में यूरेनियम की अनंतिम सीमा (provisional limit) 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर निर्धारित की है।
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बस्तर क्षेत्र में बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों में अबूझमाड़िया युवाओं की बढ़ती भागीदारी देखी जा रही है।

अबूझमाड़िया जनजाति के बारे में

  • यह आदिम कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) हैं। यह जनजाति बीजापुर जिले के नारायणपुर, दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ क्षेत्रों में रहती है।
  • यह पैतृक और पितृसत्तात्मक जनजाति है। यह कई वंशों में विभाजित है तथा अबूझमाड़िया गोंडी बोली बोलती है।
  • अबूझमाड़िया महिलाएं गोदना टैटू को एक स्थायी आभूषण मानती हैं।

PVTG मान्यता के मानदंड {ढेबर आयोग (1960-61)}

  • कृषि-पूर्व (Pre-agricultural) युग का प्रौद्योगिकी स्तर;
  • साक्षरता का निम्न स्तर;
  • आर्थिक पिछड़ापन; तथा 
  • घटती हुई या स्थिर आबादी।

गावी (GAVI) और यूनिसेफ ने R21/मैट्रिक्स-एम मलेरिया वैक्सीन की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए एक नए समझौते की घोषणा की।

गावी (GAVI) (वैक्सीन और प्रतिरक्षीकरण के लिए वैश्विक गठबंधन) के बारे में

  • स्थापना: इसे एक वैश्विक सार्वजनिक-निजी भागीदारी के रूप में वर्ष 2000 में स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना निम्न आय वाले देशों में वैक्सीन की उपलब्धता में सुधार के लिए की गई है।
    • भारत इसका सदस्य है। ज्ञातव्य है कि जून 2025 से संयुक्त राज्य अमेरिका ने गावी को वित्त-पोषण देना बंद कर दिया है।
  • मिशन: बच्चों को घातक बीमारियों से बचाना और राष्ट्रीय टीकाकरण प्रणालियों को मजबूत करना।
  • प्रभाव: इसने 1.2 अरब से ज़्यादा बच्चों की सुरक्षा की है और 2 करोड़ से ज़्यादा मौतों को टाला है।
  • बाजार-आकार: यह टीकों की कीमतों पर वार्ता करता है और IFFIm (टीकाकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्त सुविधा) जैसे नवीन वित्त-पोषण साधनों का उपयोग करता है।
  • चुनौतियां: इसे वित्त-पोषण की कमी और समन्वय के अभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

यूक्रेन युद्ध में रूस और गाजा संघर्ष में इजरायल जैसे देश आक्रमण को उचित ठहराने के लिए 'आत्मरक्षा' का सहारा लेते हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का युद्ध को रोकने की बजाय उसे वैध बनाने के लिए उपयोग किए जाने का खतरा विद्यमान हो गया है।

अनुच्छेद 51 के बारे में

  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, संयुक्त राष्ट्र चार्टर ने देशों को बल प्रयोग की धमकी या व्यवहार में लाने से रोकने के लिए कानूनी रूप से बाध्य किया है (अनुच्छेद 2)।
    • अनुच्छेद 51, आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता देता है। यह मूल रूप से अनुच्छेद 2 का एक लघु अपवाद था। हालांकि, समय के साथ इसके दायरे की अधिक व्यापक रूप से पुनर्व्याख्या की गई है।
  • अनुच्छेद 51 की दो व्याख्याएं:
    • प्रतिबंधात्मक: आत्मरक्षा का अधिकार सशस्त्र हमले के बाद ही उत्पन्न होता है।
    • विस्तृत: आत्मरक्षा सशस्त्र हमले के आसन्न खतरे की प्रतिक्रिया में उत्पन्न हो सकती है और गैर-राज्य अभिकर्ताओं के विरुद्ध भी लागू हो सकती है। जैसा कि अमेरिका के नेतृत्व वाले ऑपरेशन इराकी फ्रीडम (2003) में देखा गया था।

ईरान ने दशकों के सबसे भीषण सूखे के दौरान, देश में वर्षा लाने के लिए उर्मिया झील बेसिन पर क्लाउड-सीडिंग का प्रयास किया।

उर्मिया झील के बारे में

  • अवस्थिति और आकार: यह उत्तर-पश्चिमी ईरान में स्थित है तथा ज़रीनेह एवं सिमीनेह जैसी नदियों से जल प्राप्त करती है। 
  • ह्रास: बांध निर्माण, सिंचाई में जल के उपयोग और जलवायु परिवर्तन के कारण इसकी मूल जल मात्रा का 90% से अधिक नष्ट हो गया है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: झील के नितल का खुला लवण हवा से उड़ने वाली धूल को भी लवणीय बनाते हैं। इससे पूरे क्षेत्र में मृदा, स्वास्थ्य और आजीविका को नुकसान पहुंच रहा है।
  • संरक्षण स्थिति: रामसर स्थल तथा यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व (जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र) के रूप में संरक्षित। 

भारत की BEL और फ्रांस की सफ्रान (Safran) मिलकर भारत में हैमर (HAMMER) सटीक-निर्देशित हथियार का निर्माण करेंगी।

हैमर (HAMMER) के बारे में

  • यह युद्धक क्षमता से युक्त तथा सभी प्रकार के मौसमों में परिचालन करने वाला स्मार्ट हवा से सतह पर मार करने वाला हथियार है। इसे नजदीकी हवाई सहायता और गहन हमले के अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • रेंज: 70+ किमी।
    • GNSS (वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली)-निषिद्ध या जाम किए गए परिवेश में भी उच्च सटीकता के साथ दागो और भूल जाओ सिद्धांत पर आधारित।
    • एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता से युक्त।
    • 125, 250, 500 और 1000 किलोग्राम के मानक बम निकायों के साथ संगत है।
    • कम ऊंचाई और उबड़-खाबड़ क्षेत्रों पर भी प्रक्षेपित किया जा सकता है।
    • स्वायत्त है और जैमिंग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है।
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हाल ही में, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने हरियाणा के रेवाड़ी में अत्याधुनिक बायोमास पेलेट संयंत्र का उद्घाटन किया।

बायोमास पेलेट्स के बारे में

  • परिभाषा: ये नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त कार्बनिक पदार्थों के छोटे, बेलनाकार व संघनित रूप होते हैं।
  • कच्चा माल: कृषि अवशेष जैसे- धान, सोया, कपास, चना, ज्वार की पराली/ भूसा/ डंठल/ भूसी; मूंगफली का छिलका; नारियल का छिलका; बांस; सूखे पत्ते और इसी तरह का बायोमास।
  • उपयोग: इनका विद्युत संयंत्रों में ऊष्मा और विद्युत उत्पादन के लिए तथा पशुओं हेतु बिछावन सामग्री (bedding material) के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • लाभ: प्रदूषण कम करने, कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने और ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करने में मदद करते हैं।
  • नीतिगत अधिदेश:
    • राष्ट्रीय बायोमास नीति सभी कोयला-आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में 5% बायोमास पेलेट्स या टोरेफाइड नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (MSW) चारकोल के सह-दहन को अनिवार्य बनाती है। हालांकि,  दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के संयंत्रों के लिए यह 7% निर्धारित किया गया है। 
    • प्रोत्साहन: बायोमास पेलेट्स विनिर्माण को प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक को ऋण (PSL) के अंतर्गत एक पात्र गतिविधि के रूप में मान्यता दी गई है।
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