असम विधान सभा ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (असम संशोधन) विधेयक, 2025 पारित किया। इस विधेयक के द्वारा ‘मोह जूज’ (Moh Juj) खेल को पशु क्रूरता कानून से बाहर कर दिया गया है। इस तरह मोह जूज खेल को अनुमति मिल गई है।
मोह जूज के बारे में
- मोह जूज असम के कुछ हिस्सों में आयोजित भैंसों की पारंपरिक लड़ाई को कहते हैं।
- असमिया भाषा में अर्थ: “मोह” का मतलब भैंस और “जूज” का मतलब एक-साथ लड़ाई, यानी “भैंस की लड़ाई”।
- ये लड़ाइयां माघ बिहू (या भोगाली बिहू) के सांस्कृतिक त्यौहार का हिस्सा होती हैं।
- माघ बिहू असम में फसल-कटाई का त्योहार है।
केंद्र सरकार ने ‘वस्त्र-केंद्रित अनुसंधान, मूल्यांकन, निगरानी, परियोजना एवं स्टार्ट-अप (Textiles Focused Research, Assessment, Monitoring, Planning and Start-up: Tex-RAMPS) योजना को स्वीकृति दी।
‘Tex-RAMPS’ योजना के बारे में
- क्रियान्वयन मंत्रालय: केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय
- वित्त पोषण: 2025-26 से 2030-31 तक के लिए 305 करोड़ रुपये;
- उद्देश्य: भारत के वस्त्र एवं परिधान (T&A) उद्योग को भविष्य-उन्मुख बनाना, तथा वस्त्र क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना।
- योजना के मुख्य घटक
- अनुसंधान एवं नवाचार: स्मार्ट टेक्सटाइल्स, सततता, आदि में अनुसंधान।
- डेटा, एनालिटिक्स एवं डायग्नोस्टिक्स: इसमें रोजगार सृजन का आकलन, आपूर्ति श्रृंखला की पहचान, आदि शामिल हैं।
- वास्तविक समय एकीकृत वस्त्र सांख्यिकीय प्रणाली (ITSS): व्यवस्थित तरीके से निगरानी करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए।
- क्षमता विकास एवं ज्ञान प्रणाली: राज्य स्तर पर योजना-निर्माण को बढ़ावा देने और सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों का प्रसार करने के लिए।
- स्टार्ट-अप एवं नवाचार को मदद करना: इनक्यूबेटर्स, हैकाथॉन, तथा शिक्षा-संस्थान–उद्योग जगत में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए।
Article Sources
1 sourceIAU के ग्रहीय प्रणाली नामकरण हेतु कार्य समूह द्वारा तैयार की गई एक नवीनतम सूची में सात भारतीय नाम शामिल किए गए।
- उदाहरण: मंगल ग्रह पर भूवैज्ञानिक विशेषताओं के लिए पेरियार नदी, बेकल किला, वर्कला समुद्र तट आदि।
अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) के बारे में
- स्थापना: 1919 में।
- मुख्यालय: पेरिस (फ्रांस)।
- उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से अनुसंधान, संचार, शिक्षा और विकास सहित खगोल विज्ञान के सभी पहलुओं को बढ़ावा देना तथा उनकी सुरक्षा करना।
- राष्ट्रीय सदस्य: भारत की भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी सहित 85 सदस्य।
- प्रमुख योगदान: ग्रहों की परिभाषाएं, मानक खगोलीय निर्देशांक प्रणाली आदि।
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1 sourceप्रधान मंत्री ने विक्रम-1 का अनावरण किया। यह भारत का नया निजी क्षेत्रक का कक्षीय-श्रेणी प्रक्षेपण यान है।
विक्रम-1 के बारे में
- विकासकर्ता: स्काईरूट एयरोस्पेस। यह हैदराबाद स्थित एक भारतीय निजी अंतरिक्ष स्टार्ट-अप है।
- उद्देश्य: उपग्रहों को निम्न भू कक्षा (LEO) या सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (SSO) में प्रक्षेपित करना। इसे लघु उपग्रहों और राइडशेयर मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- पेलोड क्षमता: यह LEO में 350 किलोग्राम और SSO में 260 किलोग्राम तक भार ले जा सकता है।
- प्रणोदन: चार-चरणीय रॉकेट - पहले तीन चरणों में ठोस-ईंधन बूस्टर का उपयोग किया जाता है, जबकि अंतिम (ऊपरी) चरण में सटीक कक्षीय प्रविष्टि के लिए द्रव-प्रणोदक "रमन" इंजन का उपयोग किया जाता है।
- संरचना: यह रॉकेट पूरी तरह से कार्बन-फाइबर से बना है। इसमें 3D-प्रिंटेड इंजन हैं। ये इंजन रॉकेट को हल्का बनाए रखने व उसे कुशल डिज़ाइन प्रदान करने पर केंद्रित हैं।
मणिपुर की इंफाल घाटी में चिरांग नदी के गाद-युक्त निक्षेपों में 37,000 वर्ष पुराना कांटेदार बांस का जीवाश्म खोजा गया है। यह एशिया में कांटेदार बांस के सबसे पुराने प्रमाणों का प्रतिनिधित्व करता है।
- बांस का कांटेदार होना शाकाहारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
बांस या हरे सोने के बारे में
- यह एक प्रकार का काष्ठीय पादप है, जो घास कुल से संबंधित है।
- यह सबसे तेजी से बढ़ने वाले पादपों में से एक है। इसकी कुछ किस्में एक घंटे में 4 सेमी तक बढ़ जाती हैं।
- बांस में लकड़ी, ईंट या कंक्रीट की तुलना में अधिक संपीडन शक्ति होती है। इसका उपयोग कागज उद्योग, फर्नीचर निर्माण, सिविल निर्माण, भोजन, दवा आदि में होता है।
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1 sourceचीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ ने 2047 तक भारतीय थल सेना को एक एकीकृत व भविष्य के लिए तैयार सेना में बदलने के लिए एक व्यापक तीन-चरणीय रोडमैप का अनावरण किया।
- उन्होंने भारत के सैन्य विकास के लिए चार प्रमुख आधारों पर भी प्रकाश डाला - आत्मनिर्भरता, अनुसंधान, अनुकूलन और एकीकरण।
तीन चरणीय योजना के बारे में
- चरण 1: 2032 तक (परिवर्तन का दशक) - एक आधुनिक व चुस्त सेना के निर्माण के लिए क्षमताओं, बल संरचना और परिचालन संबंधी तत्परता में तीव्र वृद्धि करना।
- चरण 2: 2032-2037 तक (समेकन) - संगठन, प्रौद्योगिकी और सिद्धांत में पहले चरण में प्राप्त लाभों को मजबूत व एकीकृत करना।
- चरण 3: 2037-2047 तक (पूर्णतः एकीकृत भावी सेना) - अगली पीढ़ी के युद्ध के लिए तैयार; तकनीकी रूप से उन्नत; नेटवर्कयुक्त और पूर्णतः एकीकृत सेना प्राप्त करना।
एडडेटा (AidData) ने चीन के विदेशी ऋण पोर्टफोलियो पर प्रकाश डालते हुए एक चेज़िंग चाइना रिपोर्ट प्रकाशित की।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- ऋण देने का पैमाना: चीन ने सन 2000 से विश्व में 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के ऋण और अनुदान प्रदान किए हैं।
- सन 2000-2023 के बीच 80% से अधिक देशों ने चीन के सरकारी स्वामित्व वाले ऋणदाताओं से ऋण प्राप्त किए थे।
- सबसे बड़े उधारकर्ता: संयुक्त राज्य अमेरिका चीन के ऋणों का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता है, उसके बाद रूस एवं ऑस्ट्रेलिया का स्थान आता है।
- सड़क पहल (BRI) संबंधी गिरावट: BRI के तहत अब केवल लगभग 25% नई परियोजनाएं ही अवसंरचना से जुड़ी हुई हैं। इसका अर्थ है कि निर्धन क्षेत्रों में भारी निर्माण वाली परियोजनाएं कम हो गई हैं।
- भारत का उधार पैटर्न: भारतीय संस्थाओं को 11.1 बिलियन डॉलर का ऋण प्राप्त हुआ है। इसमें से अधिकांश ऋण ऊर्जा और वित्तीय सेवा क्षेत्रकों के लिए था।
एक वैश्विक अध्ययन में पाया गया कि पिछले 40 वर्षों में 788 उभयचर प्रजातियों की संरक्षण स्थिति में गिरावट दर्ज की गई है।
- उभयचरों के समक्ष खतरे: पर्यावास नष्ट होना और इनका क्षरण होना, कृषि कार्य का विस्तार, लकड़ी और पौधों की कटाई, अवसंरचना विकास, आदि।
- IUCN की लाल सूची में सूचीबद्ध सभी संकटापन्न कशेरुकी जीवों में 25.2% उभयचर हैं।
- इनमें 185 उभयचर क्रिटिकली एंडेंजर्ड और, 37 उभयचर विलुप्त श्रेणी में हैं।
उभयचर के बारे में
- वे ठंडे रक्त वाले कशेरुकी जीव हैं। ये अपने जीवन के विभिन्न चरणों में जल और भूमि, दोनों पर जीवित रह सकते हैं। उदाहरण के लिए: मेंढक।
- पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका: उभयचर पोषक तत्वों के चक्रण, मृदा वातन (Soil aeration) और उत्पादकता बढ़ाने में योगदान देते हैं। इसके अलावा, वे पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं भी प्रदान करते हैं, जैसे कि कीट नियंत्रण।