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ड्रोन हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शाह गैस क्षेत्र में परिचालन निलंबित कर दिया गया है। 

शाह गैस क्षेत्र के बारे में:

  • स्थान: यह सऊदी अरब की सीमा के पास संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित है। 
  • प्रकार: यह दुनिया के सबसे बड़े 'सौर गैस क्षेत्रों' (sour gas fields) में से एक है। इसमें प्राकृतिक गैस के साथ हाइड्रोजन सल्फाइड की बहुत अधिक मात्रा है। 
  • उत्पादन: यहाँ प्राकृतिक गैस और सल्फर का उत्पादन होता है। 

वसा कोशिकाएं (सफेद वसा और भूरी वसा, दोनों) वजन घटाने के भावी उपचारों के लिए एक आशाजनक लक्ष्य बन सकती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे ऊष्मा के लिए ऊर्जा का उपयोग करती हैं। 

सफेद और भूरी वसा के बारे में:

  • वयस्कों में सफेद वसा सबसे प्रचुर मात्रा में होती है। भूरी वसा मुख्य रूप से गर्दन और ऊपरी छाती में पाई जाती है। 
  • प्राथमिक कार्य: सफेद वसा ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करती है।
    • भूरी वसा ऊर्जा का उपयोग करती है और कैलोरी को जलाती है। यह रासायनिक ऊर्जा को ऊष्मा (Heat) में परिवर्तित करती है। 
  • सफेद वसा एक अंतःस्रावी अंग के रूप में कार्य करती है। यह लेप्टिन (भूख कम करने के लिए) और एडिपोनेक्टिन (इंसुलिन को नियमित करने के लिए) जैसे हार्मोन छोड़ती है।
  • ठंडे तापमान के संपर्क में आने पर मस्तिष्क द्वारा भूरी वसा प्राकृतिक रूप से सक्रिय हो जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर में ऊष्मा उत्पन्न करना है। 

उच्चतम न्यायालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4) को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। यह धारा केवल तभी दत्तक माता को मातृत्व हितलाभ की अनुमति देती थी, जब गोद लिया गया बच्चा 3 महीने से कम उम्र का हो। 

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: यह मातृत्व हितलाभ अधिनियम 1961 सहित नौ मौजूदा सामाजिक सुरक्षा अधिनियमों का विलय करती है। 

न्यायालय के मुख्य विचार:

  • न्यायालय ने कहा कि दत्तक माताएं बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह के सवेतन अवकाश की हकदार हैं।
  • प्रजनन स्वायत्तता का अधिकार केवल जन्म देने के जैविक कार्य तक सीमित नहीं है। बच्चों को गोद लेना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन और निर्णय लेने की स्वायत्तता के अधिकार का एक समान प्रयोग है।
  • उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने वाले कानून बनाने का आग्रह किया। 

वैज्ञानिकों ने उत्तर-पश्चिम हिमालय में 'लद्दाख मैग्मैटिक आर्क' (LMA) के विकास की प्रक्रिया का विश्लेषण किया है। 

लद्दाख मैग्मैटिक आर्क (LMA) के बारे में:

  • यह ट्रांस-हिमालय में स्थित आग्नेय चट्टानों की एक पट्टी और लंबे समय से विलुप्त ज्वालामुखी प्रणाली है। यह प्लेट विवर्तनिकी के 130 मिलियन वर्ष पुराने रिकॉर्ड के रूप में कार्य करती है। 
    • यह प्रविष्ठन (Subduction), परिपक्वता और भारतीय तथा यूरेशियन प्लेटों के बीच टकराव की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण करता है। 
  • वर्तमान लद्दाख क्षेत्र नियो-टेथिस महासागर के ऊपर स्थित है। उस महासागर के नीचे, भू-पर्पटी के विशाल स्लैब धीरे-धीरे मेंटल में समा गए। इस प्रक्रिया को प्रविष्ठन के रूप में जाना जाता है, जिसके कारण LMA का निर्माण हुआ।

उच्चतम न्यायालय ने पर्यावरणविद् एम.सी. मेहता द्वारा 1985 में दायर ऐतिहासिक जनहित याचिका (PIL) को औपचारिक रूप से निपटा दिया है।

  • एम.सी. मेहता मामले में, उच्चतम न्यायालय ने 'पूर्ण दायित्व के सिद्धांत' (Absolute Liability) को मान्यता दी। इसके साथ ही प्राकृतिक संसाधनों पर 'सार्वजनिक न्यास के सिद्धांत' (Doctrine of Public Trust) को लागू किया। 
    • इसके कारण भारत में सीसा रहित पेट्रोल की शुरुआत हुई। इसके अतिरिक्त राज्यों में तटीय प्रबंधन योजनाएं बनीं और स्टोन क्रशरों को दिल्ली से बाहर स्थानांतरित किया गया।

अन्य ऐतिहासिक पर्यावरणीय मामले:

  • टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद वाद (1995): इस मामले में “वन (Forest)” की व्यापक परिभाषा दी गई, जिसमें ऐसे सभी क्षेत्र शामिल हैं जो शब्दकोश के अनुसार वन की श्रेणी में आते हैं, चाहे उनका स्वामित्व किसी के पास हो या उन्हें आधिकारिक रूप से किसी भी श्रेणी में रखा गया हो। 
  • वेल्लोर सिटीजन्स वेलफेयर फोरम वाद (1996): इसने 'एहतियाती सिद्धांत' (Precautionary Principle) और 'प्रदूषक द्वारा भुगतान सिद्धांत' (Polluter Pays Principle) को भारतीय पर्यावरण कानून की आवश्यक विशेषताओं के रूप में मान्यता दी। 
  • एस.पी. मुथुरमन वाद (2025): उच्चतम न्यायालय ने पूर्व-व्यापी पर्यावरणीय मंजूरी को अवैध घोषित कर दिया। 

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2024-25 के लिए बागवानी फसलों के लिए अंतिम अनुमान जारी किए हैं।

मुख्य विशेषताएं:

  • कुल बागवानी फसल क्षेत्र 2023-24 के 290.86 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 301.36 लाख हेक्टेयर हो गया है।
  • कुल फसल उत्पादन 3547.44 लाख टन से बढ़कर 3707.38 लाख टन हो गया। 
  • फल उत्पादन: वर्ष 2024-25 में फलों का उत्पादन 4.13% (46.71 लाख टन) बढ़कर 1176.49 लाख टन हो गया है। वर्ष 2023-24 में यह उत्पादन 1129.78 लाख टन था। यह वृद्धि मुख्य रूप से केला, आम, संतरा, पपीता, अमरूद, तरबूज और कटहल के उत्पादन में हुए लाभ के कारण हुई है। 
  • सब्जी उत्पादन: सब्जियों का उत्पादन 5.11% (105.89 लाख टन) बढ़ने का अनुमान है। यह 2072.08 लाख टन से बढ़कर 2177.97 लाख टन तक पहुँचने की संभावना है। इस वृद्धि में प्याज, आलू, हरी मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी और बैंगन आदि के उत्पादन में हुई बढ़ोतरी का प्रमुख योगदान है। 

सरकार ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत 'क्वांटम लैब' स्थापित करने के लिए 23 संस्थानों को मंजूरी दी है। 

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के बारे में:

  • परिचय: भारत को क्वांटम प्रौद्योगिकियों में विश्व में अग्रणी बनाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा 2023-2031 की अवधि के लिए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन शुरू किया गया। 
  • उद्देश्य: क्वांटम टेक्नोलॉजी (QT) में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना। इसका लक्ष्य एक जीवंत और अभिनव प्रणाली स्थापित करना है। 
  • मिशन के लक्ष्य:
    • 2,000 किलोमीटर तक फैले एक सुरक्षित और हाई-बैंडविड्थ संचार अवसंरचना की स्थापना करना।
    • 500 से 1,000 क्यूबिट्स (qubits) की प्रसंस्करण क्षमता वाले क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना। यह विशाल कम्प्यूटेशनल क्षमताओं को अनलॉक करेगा।

केंद्रीय बजट 2026-27 में 'नारियल प्रोत्साहन योजना' की घोषणा की गई। इसका उद्देश्य पुराने, गैर-उत्पादक नारियल के बगीचों का कायाकल्प करना और तटीय क्षेत्रों में नारियल की खेती का विस्तार करना है। 

नारियल उत्पादन के बारे में:

  • भारत नारियल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है। यह वैश्विक नारियल उत्पादन में लगभग 30% का योगदान देता है।
  • खेती के लिए आदर्श स्थितियां:
    • अक्षांश: उष्णकटिबंधीय जलवायु में भूमध्य रेखा के 23 डिग्री उत्तर और दक्षिण के बीच। 
    • ऊंचाई: समुद्र तल से 600 मीटर तक। 
    • तापमान: 20° से 32°C के बीच होना चाहिए। 
    • वर्षा: वार्षिक 1000–2500 मिमी। 
    • मृदा: अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट, लैटेराइट और तटीय जलोढ़ मृदा। 
  • प्रमुख उत्पादक: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक। 
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हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S)

हाइड्रोजन सल्फाइड एक रंगहीन गैस है जिसमें सड़े हुए अंडे जैसी गंध होती है। यह प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम में पाई जाने वाली एक आम अशुद्धि है। उच्च सांद्रता में यह विषैली और संक्षारक हो सकती है।

सौर गैस क्षेत्रों (sour gas fields)

सौर गैस क्षेत्र ऐसे प्राकृतिक गैस भंडार होते हैं जिनमें हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) की उच्च सांद्रता होती है। हाइड्रोजन सल्फाइड को हटाना आवश्यक होता है क्योंकि यह संक्षारक होता है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, जिसके लिए विशेष प्रसंस्करण तकनीकों की आवश्यकता होती है।

ड्रोन हमले

ड्रोन हमले वे सैन्य या आतंकवादी हमले होते हैं जिनमें मानव रहित हवाई वाहन (UAVs) का उपयोग मिसाइल, बम या अन्य पेलोड दागने के लिए किया जाता है। ये हमले अचानक, सटीकता और बिना मानव जोखिम के किए जा सकते हैं, जिससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ जाती हैं।

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