कृषि और स्वास्थ्य को समेकित करने वाली “सेहत (SEHAT)” पहल की शुरुआत की गई | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • SEHAT, जो ICMR और ICAR की एक संयुक्त पहल है, का उद्देश्य कृषि को पोषण और कल्याण के चालक के रूप में परिवर्तित करना है।
  • यह जैव-संवर्धनित फसलों, एकीकृत खेती, व्यावसायिक स्वास्थ्य, गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम और एक स्वास्थ्य संबंधी तैयारियों पर केंद्रित है।
  • SEHAT कुपोषण और अतिपोषण दोनों से निपटने के लिए एक सक्रिय, समग्र स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।

In Summary

सेहत (SEHAT) से आशय है; ‘साइंस एक्सीलेंस फॉर हेल्थ थ्रू एग्रीकल्चरल ट्रांसफॉर्मेशन' (कृषि परिवर्तन के ज़रिए स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक उत्कृष्टता)’। यह भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की एक संयुक्त पहल है। 

'सेहत' (SEHAT) पहल की मुख्य विशेषताएं

  • विज़न: कृषि को केवल खाद्य उत्पादन प्रणाली से आगे बढ़ाकर भारत में पोषण, स्वास्थ्य एवं समग्र सेहतमंदी का सशक्त माध्यम बनाना।
  • राष्ट्रीय महत्व के पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्र:
    • बायोफोर्टिफाइड और पोषक तत्वों से प्रचुर फसल किस्मों का विकास और मूल्यांकन: इससे कुपोषण को दूर करने और पोषण स्तर में सुधार करने में मदद मिलेगी।
      • बायोफोर्टिफिकेशन: यह वह प्रक्रिया है जिसमें पारंपरिक पौध प्रजनन (प्लांट ब्रीडिंग)बेहतर कृषि तकनीकों या आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी की सहायता से खाद्य फसलों में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई जाती है, बिना उनकी मूल विशेषताओं को प्रभावित किए।
        • उदाहरण के लिए: खाद्य फसलों को जिंक, आयरन (लौह) और अन्य पोषक तत्वों से समृद्ध करना।
    • एकीकृत कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देना: आहार विविधीकरण यानी दैनिक आहार में विभिन्न प्रकार के खाद्य समूहों  को शामिल करने पर बल दिया जाएगा, कृषि आय में वृद्धि की जाएगी और जलवायु अनुकूलता विकसित की जाएगी।
    • व्यवसाय से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का समाधान: कृषि श्रमिकों के बीच लक्षित और प्रमाण-आधारित उपायों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी खतरों को कम जाएगा। 
    • गैर-संचारी रोगों (NCDs) की रोकथाम और प्रबंधन: फंक्शनल फूड्स और पोषण की दृष्टि से श्रेष्ठ फसल किस्मों को बढ़ावा देकर कृषि-आधारित रणनीतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
    • 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण अपनाना: मानव-पशु-पर्यावरण के आपसी संबंधों पर एकीकृत निगरानी, जांच और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा।

महत्व

  • स्वास्थ्य-देखभाल सेवा में प्रतिक्रियात्मक एवं उपचारात्मक मॉडल के बजाय सक्रिय (Proactive), निवारक (Preventive) एवं समग्र (Holistic) दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया गया है।
  • अल्पपोषण और अतिपोषण के दोहरे बोझ तथा मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रसार से निपटने को प्राथमिकता दी गई है।
  • “सम्पूर्ण सरकार” और “संपूर्ण व्यवस्था” आधारित दृष्टिकोण को अपनाकर विज्ञान, नीति निर्माण और क्रियान्वयन को एक साथ जोड़कर समन्वित तरीके से कार्य करने पर बल दिया गया है। 
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Holistic Approach

A comprehensive approach to health that considers the whole person and their interconnectedness with their environment and lifestyle, rather than just focusing on specific symptoms or diseases. In SEHAT, this translates to moving from a reactive to a proactive, preventive, and all-encompassing model of healthcare.

One Health Approach

A framework that recognizes the interconnectedness of human health, animal health, and environmental health, emphasizing that these are intrinsically linked and should be considered holistically.

Non-communicable diseases (NCDs)

Chronic diseases that are not passed from person to person. They are often of long duration and generally progress slowly. Major NCDs include cardiovascular diseases, cancers, chronic respiratory diseases, and diabetes, often linked to lifestyle factors and environmental conditions.

Title is required. Maximum 500 characters.

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