नॉर्थ टेक संगोष्ठी-2026 का संक्षिप्त विवरण
प्रयागराज में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'रक्षा त्रिवेणी संगम' शीर्षक से नॉर्थ टेक संगोष्ठी का उद्घाटन किया। 4 से 6 मई, 2026 तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षा प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा देना था।
रक्षा मंत्री के संबोधन की मुख्य बातें
- रक्षा प्रौद्योगिकी में नवाचार: राजनाथ सिंह ने निर्देशित ऊर्जा हथियारों, हाइपरसोनिक प्रणालियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए नवाचार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
- युद्ध का भविष्य: मंत्री ने कहा कि तीव्र तकनीकी परिवर्तन भविष्य के युद्ध को आकार देंगे, और उन्होंने आश्चर्य के तत्वों के महत्व पर प्रकाश डाला।
- ऑपरेशन सिंदूर: इसे भारत की तकनीकी तत्परता के लिए एक मानदंड के रूप में उद्धृत किया गया है, जो स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है।
रक्षा क्षेत्र में तकनीकी विकास
- उन्नत प्लेटफार्म: भारत की रक्षा विनिर्माण में बढ़ती आत्मनिर्भरता के उदाहरण के रूप में आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस का उल्लेख किया गया।
- आधुनिक संघर्ष की गतिशीलता: रूस-यूक्रेन संघर्ष में देखे गए अनुसार, पारंपरिक युद्ध से ड्रोन और सेंसर-आधारित युद्ध की ओर बदलाव का उल्लेख किया गया।
- अपरंपरागत खतरे: रोजमर्रा की तकनीकों के शस्त्रीकरण पर प्रकाश डाला गया, जिसमें पश्चिम एशिया में हुए हमलों का संदर्भ दिया गया।
रक्षा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत पहल
- अनुसंधान एवं विकास बजट आवंटन: रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25% हिस्सा निजी उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए निर्धारित किया गया है, जिसमें से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग पहले ही किया जा चुका है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: डीआरडीओ ने एक नए नीतिगत ढांचे के तहत उद्योग को 2,200 से अधिक प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शुल्क माफ किया है।
- नॉलेज कॉरिडोर प्रस्ताव: हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने और उभरते क्षेत्रों में क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित।
रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये पहलें भारत को भविष्य में एक दुर्जेय सैन्य शक्ति के रूप में उभरने में मदद करेंगी।