भारत में भूतापीय ऊर्जा की क्षमता
हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भारत के विशाल भूतापीय संसाधनों पर प्रकाश डाला गया है, जो ऊर्जा की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हैं।
मुख्य निष्कर्ष
- विशाल संसाधन: भारत के पास भूतापीय संसाधन मौजूद हैं जिनमें निम्नलिखित क्षमताएं हैं:
- 11,000 गीगावाट (GW) औद्योगिक ऊष्मा
- 1,500 गीगावाट से अधिक शीतलन
- 450 गीगावाट बिजली उत्पादन
- रोजगार सृजन और आर्थिक प्रभाव: भूतापीय विकास से 350,000 से 700,000 रोजगार सृजित हो सकते हैं, जिससे कृषि क्षेत्र को काफी लाभ होगा।
रणनीतिक महत्व
CEEW के कार्तिक गणेशन ने भूतापीय ऊर्जा को एक विश्वसनीय, पर्यावरण के अनुकूल स्रोत के रूप में रेखांकित किया है जो मौसम या जलवायु परिवर्तन से अप्रभावित रहता है और भारत के ऊर्जा विविधीकरण के लिए आवश्यक है।
ऐतिहासिक संदर्भ और प्रगति
- ऐतिहासिक अन्वेषण: भारत में प्रारंभिक भूतापीय अन्वेषण उच्च जोखिमों और अनिश्चित प्रतिफलों के कारण पायलट परियोजनाओं तक ही सीमित थे।
- तकनीकी प्रगति: ड्रिलिंग प्रौद्योगिकियों में हालिया प्रगति और बेहतर भूमिगत डेटा ने बड़े पैमाने पर भूतापीय ऊर्जा परियोजनाओं की व्यवहार्यता को बढ़ाया है।
नीतिगत ढांचा
भारत की भूतापीय ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीति की शुरुआत से पायलट परियोजनाओं से व्यापक कार्यान्वयन की ओर संक्रमण को समर्थन मिलता है, जो विस्तार की महत्वपूर्ण क्षमता को दर्शाता है।