संयुक्त राष्ट्र की परिकल्पना सामूहिक सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आधारशिला के रूप में की गई थी। इसका गठन 1945 में हुआ था, इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना, मानवाधिकारों की रक्षा करना और सभी 193 सदस्य देशों में सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इसकी स्थापना अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
वैश्विक संघर्षों को रोकने और विकास को सुगम बनाने में अपनी उपलब्धियों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र को अपनी वैधता, प्रभावशीलता और विश्वसनीयता को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण, जब संयुक्त राष्ट्र अपने 80 वर्ष पूरे कर रहा है, तो इस समय को एक उपलब्धि के साथ-साथ आत्ममंथन का भी क्षण माना जा रहा है। यह विमर्श UN को 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था के अनुरूप ढालने और इसमें सुधार करने पर केंद्रित है।
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