व्यापार समझौते के बारे में
- 'मेड इन इंडिया' उत्पादों पर अमेरिकी पारस्परिक प्रशुल्क (Reciprocal tariffs) को तत्काल प्रभाव से 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। साथ ही, अमेरिका ने अतिरिक्त 25% प्रशुल्क भी वापस ले लिया है।
- अगस्त 2025 में, अमेरिका ने भारत पर 50% तक का प्रशुल्क लगाया था। इसमें 25% पारस्परिक प्रशुल्क और रूसी तेल आयात को लेकर 25% अतिरिक्त प्रशुल्क शामिल था।
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिकी वस्तुओं के आयात को बढ़ाने पर सहमत हुआ है। इसमें ऊर्जा, प्रौद्योगिकी उत्पादों और परमाणु उपकरणों के क्षेत्रक में 500 बिलियन डॉलर से अधिक का आयात शामिल है।
- भारत धीरे-धीरे अमेरिका के खिलाफ अपनी प्रशुल्क और गैर-प्रशुल्क बाधाओं को कम करेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार की स्थिति
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Article Sources
1 sourceपूर्व में भारत और GCC के बीच FTA की संभावना तलाशने के लिए आर्थिक सहयोग फ्रेमवर्क समझौते पर 2004 में नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे।
भारत के लिए भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का महत्व

- आर्थिक संबंधों की पूर्ण क्षमता का दोहन: GCC देशों में मौजूदा कीमतों पर GDP के मामले में 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बाजार है।
- वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संबंधों को मजबूती देना: यह दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा और व्यापार विस्तार को मजबूत करने में मदद करेगा।
- भारत के ऊर्जा स्रोतों में विविधता आएगी।
- व्यापार और निवेश में वृद्धि: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का GCC के साथ 178.56 अरब डॉलर का व्यापार रहा (जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का 15.42% है)।
- यह क्षेत्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके तहत सितंबर 2025 तक 31.14 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हो चुका है।
- लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा: GCC देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय निवास करते हैं।
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बारे में
- उत्पत्ति: GCC खाड़ी क्षेत्र के 6 देशों का एक राजनीतिक और आर्थिक गठबंधन है। इसे 25 मई 1981 को संपन्न एक समझौते द्वारा स्थापित किया गया था।
- सदस्य (6): इसमें शामिल देश हैं- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान तथा बहरीन।
- मुख्यालय: रियाद (किंगडम ऑफ सऊदी अरब)।
- उद्देश्य: सदस्य देशों के बीच एकता बनाए रखने के लिए उनके बीच समन्वय, एकीकरण और अंतर्संबंध स्थापित करना।
- GCC के अंतर्गत मुख्य संगठन:
- सर्वोच्च परिषद (विवाद निपटान आयोग के साथ);
- मंत्रिस्तरीय परिषद; तथा
- महासचिवालय (Secretariat General)।
Article Sources
1 sourceइस आधिकारिक यात्रा के दौरान एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया। इसमें क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक एकीकरण और प्रौद्योगिकी में सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर बल दिया गया।
- अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया राजनयिक संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) के स्तर तक बढ़ा दिया गया था।
संयुक्त वक्तव्य में की गई मुख्य घोषणाओं पर एक नजर
- रणनीतिक और रक्षा सहयोग:
- रणनीतिक मामलों पर कार्य समूह (SAWG) और Su-30 फोरम का गठन किया जाएगा। Su-30 फोरम दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच रखरखाव एवं तकनीकी विशेषज्ञता पर सहयोग को सक्षम बनाएगा। इससे आपूर्ति-श्रृंखला के समक्ष बाधाओं को कम किया जा सकेगा।
- संयुक्त सैन्य अभ्यास 'हरिमऊ शक्ति' (5वां संस्करण) का आयोजन किया गया था।
- ऊर्जा एवं प्रौद्योगिकी: मलेशियाई कंपनियों द्वारा भारत के हरित ऊर्जा क्षेत्र (सौर, हाइड्रोजन) में निवेश तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में संयुक्त कार्यबल विकास।
- खाद्य सुरक्षा और कृषि: मलेशिया ने एक विश्वसनीय ऑयल पाम आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधान मंत्री की हालिया यात्रा के दौरान, भारत और इजरायल प्रमुख रणनीतिक एवं आर्थिक क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा व विस्तारित करने पर सहमत हुए।
यात्रा के मुख्य परिणाम
- संबंधों का उन्नयन: संबंधों को "शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी" के रूप में उन्नत किया गया।
- महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों (CET) पर नई पहल: दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) के नेतृत्व में AI, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्रक को शामिल करने वाली एक नई पहल शुरू की गई।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और 'होराइजन स्कैनिंग/ रणनीतिक दूरदर्शिता तंत्र' का शुभारंभ किया गया।
- कामगार आवागमन: अगले 5 वर्षों में 50,000 तक भारतीय कामगारों का कोटा निर्धारित किया गया।
- साइबर सुरक्षा सहयोग: एक बहुवर्षीय साइबर सुरक्षा रोडमैप विकसित किया जाएगा और भारत में 'भारत-इजरायल साइबर सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र' की स्थापना की जाएगी।
- कृषि और जल प्रौद्योगिकी साझेदारी: 'भारत-इजरायल कृषि नवाचार केंद्र' (IINCA) की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए; कृषि अनुसंधान में 20 संयुक्त फेलोशिप पर सहमति बनी आदि।
- अन्य: UPI-इजरायल भुगतान लिंकेज की संभावना तलाश की जाएगी; 'भारत-इजरायल शैक्षणिक सहयोग मंच' और 'भारत-इजरायल संसदीय मैत्री समूह' का शुभारंभ किया गया आदि।

प्रमुख परिणाम
- क्षेत्रीय सहयोग: सेशेल्स कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (CSC) का पूर्ण सदस्य बनेगा।
- CSC एक क्षेत्रीय सुरक्षा समूह है। इसमें भारत, श्रीलंका, मॉरीशस, मालदीव और बांग्लादेश शामिल हैं।
- इसका उद्देश्य सदस्य देशों के साझा सरोकार वाली अंतर्राष्ट्रीयचुनौतियों और खतरों से निपटकर क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
- आपदा प्रतिरोधकता: सेशेल्स 'आपदा-रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन' (CDRI) में शामिल होने के लिए सहमत हुआ।
- स्वास्थ्य: सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं खरीदने के लिए सेशेल्स 'इंडियन फार्माकोपिया' (दवाओं के मानकों की पुस्तक) को मान्यता देगा।
- डिजिटल परिवर्तन: भारत सेशेल्स में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाने के लिए व्यापक प्रयास करने पर सहमत हुआ।
- समुद्री सहयोग: सेशेल्स भारतीय सहायता से एक हाइड्रोग्राफिक यूनिट (जल सर्वेक्षण इकाई) स्थापित करेगा।
- विशेष आर्थिक पैकेज: भारत ने विकास परियोजनाओं, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा के लिए कुल 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पैकेज की घोषणा की।
भारत के लिए सेशेल्स का महत्व![]()
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इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को 2030 तक $20 बिलियन से बढ़ाकर $30 बिलियन करने का निर्णय लिया।
- दोनों देशों ने अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रकों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
- भविष्य के लिए 'डिजिटल साझेदारी' पर एक संयुक्त घोषणा-पत्र/कार्य योजना को अपनाया गया।

भारत-ब्राजील संबंध: एक नजर में
- राजनयिक संबंध: दोनों देशों के बीच 1948 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे, जिन्हें 2006 में 'रणनीतिक साझेदारी' में बदला गया था।
- बहुपक्षीय सहयोग: दोनों देश BRICS, BASIC, G-20, G-4, IBSA जैसे मंचों और संयुक्त राष्ट्र, WTO, UNESCO एवं WIPO जैसे वैश्विक निकायों में मिलकर सहयोग करते हैं।
- व्यापार: वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार में 25% से अधिक की वृद्धि हुई, जो $15.21 बिलियन तक पहुंच गया।
- दोनों देश भारत-मर्कोसुर (MERCOSUR) अधिमान्य व्यापार समझौते (PTA) के तहत सक्रिय हैं।
- नवीकरणीय ऊर्जा: ब्राजील वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन (GBA) का सह-संस्थापक सदस्य बना।
- ब्राजील ने 2022 में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) समझौते की अभिपुष्टि की थी।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में पावर गैप इंडेक्स का उल्लेख किया गया है। इसमें यह दिखाया गया है कि भारत अपनी पूरी रणनीतिक क्षमता का कम से कम उपयोग कर रहा है।
पावर गैप इंडेक्स के बारे में
- यह एशिया पावर इंडेक्स से प्रेरित एक द्वितीयक विश्लेषण है। एशिया पावर इंडेक्स ऑस्ट्रेलिया स्थित लोवी इंस्टीट्यूट द्वारा प्रत्येक वर्ष जारी किया जाता है।
- यह एशियाई देशों के संसाधनों और प्रभाव के आधार पर उनकी सापेक्ष शक्ति को मापता है।
- इसमें 27 देशों और क्षेत्रों को 8 प्रमुख विषयों और 131 संकेतकों के आधार पर रैंक प्रदान की गई है। इन विषयों में शामिल हैं:
- सैन्य क्षमता और रक्षा नेटवर्क
- आर्थिक क्षमता और आर्थिक संबंध
- कूटनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाव
- प्रतिरोधकता (Resilience) और भविष्य के संसाधन
- 2025 संस्करण के अनुसार, भारत का पावर गैप अंक –4.0 है। यह अंक दर्शाता है कि भारत अभी अपनी पूरी रणनीतिक क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रथम अति-महत्वपूर्ण खनिज मंत्रिस्तरीय बैठक (Critical Minerals Ministerial) के दौरान ‘फोरम ऑन रिसोर्स, जियोस्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट (FORGE)’ शुरू करने की घोषणा की है।
- यह मंत्रिस्तरीय बैठक वाशिंगटन डीसी में अमेरिका द्वारा आयोजित की गई। इसमें भारत सहित 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।
- इसका उद्देश्य था अति-महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित और विविध बनाने के लिए सहयोग बढ़ाना।
FORGE के बारे में
- FORGE का गठन खनिज सुरक्षा साझेदारी (Minerals Security Partnership: MSP) के उत्तराधिकारी के रूप में किया गया है।
- MSP का उद्देश्य आर्थिक समृद्धि और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अति-महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना था।
- उद्देश्य: FORGE के साझेदार देश नीतिगत स्तर और परियोजना स्तर पर मिलकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य विविध, लचीली और सुरक्षित अति-महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न पहलों को आगे बढ़ाएंगे।
Article Sources
1 sourceभारत ने पहली बार कंबाइंड टास्क फोर्स-154 (CTF-154) की कमान संभाली है। CTF-154, संयुक्त समुद्री बल (Combined Maritime Forces: CMF) के तहत एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण टास्क फोर्स है।
संयुक्त समुद्री बल (CMF) के बारे में
- यह समुद्री क्षेत्र में सहयोग के लिए बहुराष्ट्रीय साझेदारी है। इसे “इच्छुक देशों का गठबंधन” (Coalition of the Willing) कहा जाता है। यह अंतर्राष्ट्रीयनियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कार्य करता है।
- सदस्य: भारत सहित 47 राष्ट्र। इसमें योगदान स्वैच्छिक और लचीला है।
- दायित्व: अवैध गैर-राज्य तत्वों का मुकाबला करना; समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और वैश्विक व्यापार की मुक्त आवागमन को सुनिश्चित करना।
Article Sources
1 sourceहाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रोजेक्ट वॉल्ट (Project Vault) की घोषणा की।
प्रोजेक्ट वॉल्ट के बारे में
- यह एक आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा पहल है। इसके तहत अमेरिका में रणनीतिक अति-महत्वपूर्ण खनिज भंडार (U.S. Strategic Critical Minerals Reserve) स्थापित किया जा रहा है।
- यह स्वतंत्र रूप से संचालित सार्वजनिक–निजी भागीदारी पहल है। इसके तहत अति-महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों (REE) की खरीद और संग्रह की जाएगी।
Article Sources
1 sourceविशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नई स्टार्ट संधि (New START Treaty) की अवधि समाप्त होने से विश्व के दो सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागारों पर अंतिम कानूनी नियंत्रण भी समाप्त हो जाएगा।
नई स्टार्ट संधि (2010 में हस्ताक्षर और 2011 में लागू)
- पूरा नाम: इसका अर्थ है 'सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि' (New Strategic Arms Reduction Treaty)।
- परमाणु हथियार रखने की सीमा: यह संधि अमेरिका और रूस के तैनात सामरिक परमाणु हथियारों (warheads) की संख्या को अधिकतम 1,550 (प्रत्येक) पर सीमित करती है।
- परमाणु हथियार ले जाने वाली प्रणालियों पर नियंत्रण: यह संधि परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs), पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBMs) और भारी बमवर्षकों की संख्या को सीमित करती है।
- हथियार नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करना: यह अमेरिका और रूस के बीच कानूनी रूप से बाध्यकारी एकमात्र द्विपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण संधि है। यह संधि वैश्विक “परमाणु अप्रसार मानकों” को सुदृढ़ करती है।
Article Sources
1 sourceअमेरिकी ऊर्जा विभाग (DOE) ने वैश्विक विकिरण सुरक्षा के लिए अपने निर्देशों और विनियमों से "एज़ लॉ एज़ रीज़नेबली अचीवेब्ल" (ALARA) यानी "जितना संभव हो उतना कम" सिद्धांत को हटाने की घोषणा की।
- यह जोखिम-आधारित दृष्टिकोण की ओर एक बदलाव है, जिसमें परिचालन दक्षता और लागत-प्रभावशीलता को प्राथमिकता दी गई है।
- वैधानिक सीमाओं से नीचे विकिरण की मात्रा को कम करने की अनिवार्यता को हटाकर, यह श्रमिकों के विकिरण जोखिम को बढ़ाने का खतरा उत्पन्न करता है।
विकिरण सुरक्षा के आधार
विकिरण सुरक्षा का वैश्विक फ्रेमवर्क ऐतिहासिक रूप से निम्नलिखित दो मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
- ALARA: यह एक मुख्य सुरक्षा सिद्धांत है, जो यह निर्देश देता है कि सामाजिक और आर्थिक कारकों को संतुलित करते हुए, विकिरण जोखिम को जितना संभव हो उतना कम रखा जाना चाहिए।
- LNT (लीनियर नो-थ्रेसहोल्ड): यह ALARA के पीछे का वैज्ञानिक मॉडल है, जो यह मानता है कि विकिरण की कोई भी मात्रा, चाहे वह कितनी भी कम क्यों न हो, कैंसर का कुछ जोखिम उत्पन्न करती है।
- राफा क्रॉसिंग (गाज़ा): राफा क्रॉसिंग सीमा को आंशिक रूप से फिर से खोल दिया गया है।
- यह गाज़ा से बाहर निकलने का सबसे दक्षिणी पोस्ट है। यह मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप के साथ सीमा साझा करता है।
- गाज़ा पट्टी में आने-जाने के लिए केवल दो अन्य सीमा क्रॉसिंग हैं। इनके नाम इरेज़ और केरेम शालोम हैं।
- डोनेट्स्क क्षेत्र (पूर्वी यूक्रेन):
- यह डोनबास के दो प्रमुख क्षेत्रों में से एक (दूसरा क्षेत्र लुहान्स्क) है।
- इसकी सीमाएं दक्षिण में अज़ोव सागर से लगती हैं। यह सागर कर्च जलडमरूमध्य के माध्यम से काला सागर से जुड़ा है। इसके पूर्व में रूस स्थित है।
- चागोस द्वीप समूह: संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूनाइटेड किंगडम से चागोस को मॉरीशस को न सौंपने का आग्रह किया।
- डिएगो गार्सिया चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है। इसका उपयोग UK और US द्वारा संयुक्त सैन्य अड्डे के रूप में किया जाता है।
- अवस्थिति: हिंद महासागर में मॉरीशस के उत्तर-पूर्व में।
- अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के 2019 के फैसले और बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद, UK ने 2025 में मॉरीशस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत चागोस को वापस करना है, लेकिन डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को 99 साल के पट्टे पर अपने पास रखना है।
- अल-फाशर (सूडान): एक अर्धसैनिक समूह द्वारा अल-फाशर शहर की घेराबंदी में नरसंहार के संकेत मिले हैं। सूडान संघर्ष में प्रभावित प्रमुख स्थानों में शामिल हैं:
- खार्तूम (राजधानी शहर)
- दारफुर क्षेत्र (पश्चिमी सूडान), अल जेनेना, ज़मज़म विस्थापन शिविर आदि।
- अन्य क्षेत्र: कोरडोफन क्षेत्र (राजधानी- अल ओबेद), ब्लू नाइल राज्य।
- प्रभावित समुदाय: मसालिट, ज़गावा, फर
उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) ने आर्कटिक में सुरक्षा बढ़ाने के लिए 'आर्कटिक सेंट्री' (Arctic Sentry) नामक एक नया मिशन शुरू किया है।
आर्कटिक सेंट्री के बारे में:
- नेतृत्व: इसका नेतृत्व जॉइंट फोर्स कमांड नॉरफ़ॉक (JFC Norfolk) द्वारा किया जाता है। यह नाटो के लिए उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है।
- सामरिक उद्देश्य:
- नाटो सदस्य देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- सदस्य देशों के प्रादेशिक क्षेत्रों की रक्षा करना।
- रूस की बढ़ती सैन्य गतिविधियों तथा चीन के बढ़ते प्रभाव जैसे चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
