CBIC ने कच्चे कपास के आयात पर सभी सीमा शुल्कों से छूट की अधिसूचना जारी की है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के बारे में
- मुख्यालय: नई दिल्ली
- स्थापना: CBIC की स्थापना केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के अंतर्गत किया गया था। यह एक वैधानिक संस्था है।
- इसे पहले केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) कहा जाता था।
- उद्देश्य: सीमा शुल्क, केंद्रीय उत्पाद शुल्क तथा वस्तु एवं सेवा कर (GST) से संबंधित नीतियों का निर्माण और उनका क्रियान्वयन।
- यह तस्करी की रोकथाम का कार्य करता है। साथ ही यह सीमा शुल्क, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) और मादक पदार्थों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों का भी प्रबंधन करता है।
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1 sourceICSSR महाराष्ट्र में चुनाव से संबंधित डेटा में ‘हेरफेर’ के आरोप के मामले में ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS)’ को नोटिस जारी करेगा।
ICSSR के बारे में
- यह सामाजिक और मानविकी विज्ञान में अनुसंधान हेतु भारत सरकार की सर्वोच्च संस्था है।
- इसकी स्थापना 1969 में हुई थी। ICSSR केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
- यह अलग-अलग सामाजिक मुद्दों और चुनौतियों की समझ तथा ज्ञान को आगे बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
- साथ ही यह राष्ट्र के विकास हेतु पहलें और योजनाओं के माध्यम से नीति-निर्माताओं और हितधारकों को शोध-आधारित समाधान प्रदान करती है।
पलमायरा ताड़ के वृक्ष आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों को कम करने में उपयोगी साबित हो रहे हैं। साथ ही ये वृक्ष लीन सीजन के दौरान हाथियों के लिए आहार के स्रोत भी हैं।
ताड़ के वृक्ष के बारे में
- नेटिव: यह उष्णकटिबंधीय अफ्रीका का स्थानिक (नेटिव) वृक्ष है। यह तमिलनाडु का राजकीय वृक्ष (स्टेट ट्री) भी है।
- जलवायु संबंधी दशाएं:
- मृदा: यह अलग-अलग प्रकार की मृदाओं जैसे- रेतीली, लाल, काली और जलोढ़ मृदा के साथ-साथ शुष्क और बंजर भूमि में भी उग सकता है।
- वर्षा: यह 750 मिलीमीटर से कम वार्षिक वर्षा वाले अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
- ऊंचाई: यह समुद्र तल से 800 मीटर तक की ऊंचाई पर उगता है।
- उपयोग: इस वृक्ष का प्रत्येक हिस्सा उपयोगी होता है। यह घर बनाने, दवा, छाया और भोजन आदि के लिए महत्वपूर्ण है।
- इसीलिए, इसे भारत के सबसे संसाधन-युक्त वृक्षों में से एक माना जाता है।
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1 sourceहाल ही में केंद्रीय मंत्री ने आयुष मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता की।
संसदीय सलाहकार समिति (PCC) के बारे में
- संसदीय कार्य मंत्रालय का एक प्रमुख कार्य भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम, 1961 के तहत सलाहकार समितियों का गठन करना है।
- समिति का उद्देश्य:
- सांसदों के बीच सरकार की कार्यप्रणाली के बारे में जागरूकता पैदा करना।
- सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर सरकार तथा सांसदों के बीच अनौपचारिक विचार-विमर्श को बढ़ावा देना।
- उपर्युक्त समितियों की संरचना का निर्णय सरकार करती है।
- किसी सलाहकार समिति में न्यूनतम 10 और अधिकतम 30 सदस्य हो सकते हैं।
- सलाहकार समितियों की सदस्यता स्वैच्छिक होती है।
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1 sourceराष्ट्रपति ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक अपर न्यायाधीश की नियुक्ति की है।
अपर न्यायाधीश के बारे में
- नियुक्ति की वजह: यदि राष्ट्रपति को यह प्रतीत हो कि किसी उच्च न्यायालय में कार्यभार बढ़ गया हो या लंबित मामलों की संख्या बढ़ गई हो तो संबंधित न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
- या फिर यदि उच्च न्यायालय का कोई न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) अनुपस्थिति होने या अन्य कारणों से अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर सकता, तब भी अपर न्यायाधीश की नियुक्ति की जा सकती है।
- नियुक्ति करने वाला व्यक्ति: भारत का राष्ट्रपति, अनुच्छेद 224(1) के अंतर्गत।
- नियुक्ति के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
- कार्यकाल: अधिकतम 2 वर्ष तक, जैसा कि राष्ट्रपति निर्धारित करें।
- ऐसे न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद अपने पद पर नहीं रह सकते।
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1 sourceनेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज़ (NABL) ने एक नया मेडिकल एप्लीकेशन पोर्टल लॉन्च किया।
- गौरतलब है कि NABL भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के तहत कार्य करता है।
भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के बारे में
- स्थापना: इसकी स्थापना 1996 में सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत हुई। यह एक स्वायत्त गैर-लाभकारी संगठन है।
- इसकी स्थापना भारत सरकार तथा ASSOCHAM, FICCI और CII जैसे उद्योग संघों द्वारा संयुक्त रूप से की गई।
- नोडल विभाग: भारत सरकार का उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)।
- गवर्नेंस: इसकी शासी परिषद् में 39 सदस्य होते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत एक व्यक्ति इसकी अध्यक्षता करता है।
- QCI के कार्य:
- राष्ट्रीय अभियानों के माध्यम से गुणवत्ता को बढ़ावा देना।
- थर्ड पार्टी द्वारा मूल्यांकन सुनिश्चित करना।
- वैश्विक मानकों के अनुरूप नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
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1 sourceनिजी क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत के रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड 22.56% की हिस्सेदारी हासिल की है। यह लगातार तीसरा साल है जब इनकी हिस्सेदारी में वृद्धि दर्ज की गई है।
- सबसे बड़ी हिस्सेदारी: वित्तीय वर्ष 2024-25 में, कुल रक्षा उत्पादन में डिफेन्स सेक्टर के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) की 57.50% हिस्सेदारी रही।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX),
- रक्षा परीक्षण अवसंरचना योजना (DTIS),
- एसिंग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज़ विथ iDEX (ADITI),
- प्रौद्योगिकी विकास निधि (TTDF),
- मेक इन इंडिया, और
- सकारात्मक स्वदेशीकरण (Positive Indigenisation) सूचियां।