हाल ही में शोधकर्ताओं ने एक विशाल सोलर टोर्नेडो की तस्वीर प्राप्त की है।
सोलर टोर्नेडो के बारे में
- संरचना: सोलर टोर्नेडो आयनित गैस (प्लाज्मा) से बने होते हैं, जो चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा एक जगह स्थिर रहते हैं। इन्हें औपचारिक रूप से टोर्नेडो प्रोमिनेंस के रूप में जाना जाता है।
- आयाम: ये 1,30,000 किलोमीटर की ऊँचाई तक ऊपर उठ सकते हैं और 2,00,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से घूर्णन कर सकते हैं।
- विशेषताएं: ये बहुत गर्म होते हैं। इनका तापमान लगभग 2,50,000°C तक पहुँच सकता है। इन्हें सूर्य के ध्रुवों पर देखा जा सकता है। किसी भी समय सूर्य की सतह के ऊपर ऐसे 11,000 टोर्नेडो देखे जा सकते हैं।
- महत्त्व: वे सूर्य के वायुमंडल में ऊष्मा पहुंचा सकते हैं और सौर पवन की उत्पत्ति में योगदान कर सकते हैं।
उत्तराखंड राज्य विधानसभा ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 पारित किया। इसमें मदरसा बोर्ड को समाप्त करने और उसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण स्थापित करने का प्रावधान है।
अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों के संरक्षण हेतु संवैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 29(1): इसमें प्रावधान है कि नागरिकों के किसी भी वर्ग को अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति को संरक्षित रखने का अधिकार होगा।
- अनुच्छेद 29(2): राज्य द्वारा पोषित या सहायता प्राप्त शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश के लिए किसी नागरिक के साथ केवल धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा या इनमें से किसी के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।
- अनुच्छेद 30(1): धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रूचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना करने और उनका प्रशासन करने का अधिकार होगा।
- अनुच्छेद 30(2): शिक्षा संस्थाओं को सहायता देने में राज्य किसी शिक्षा संस्था के विरुद्ध केवल इस आधार पर विभेद नहीं करेगा कि वह धर्म या भाषा पर आधारित किसी अल्पसंख्यक वर्ग के प्रबंधन में है।
भारत ने लिपुलेख दर्रा से होकर भारत-चीन सीमा व्यापार फिर से शुरू करने पर नेपाल की आपत्ति को खारिज कर दिया।
- 2020 में नेपाल ने एक संवैधानिक संशोधन पारित किया और एक नया नक्शा जारी किया। इसमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल हिस्सा दर्शाया गया है।
लिपुलेख दर्रा के बारे में
- अवस्थिति: यह उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में स्थित दर्रा है।
- महत्व: यह भारत और तिब्बत (चीन) के बीच एक महत्वपूर्ण मार्ग है और यह व्यापार और तीर्थयात्रा मार्ग (कैलाश मानसरोवर यात्रा) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।
- यह स्थल भारत रणभूमि दर्शन (युद्धक्षेत्र पर्यटन पहल) सूची में भी शामिल है।
Article Sources
1 sourceपश्चिम बंगाल में सुंदरबन बायोस्फीयर रिजर्व में खारे पानी के मगरमच्छों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।
खारे पानी के मगरमच्छ (Crocodylus porosus) के बारे में
- यह मगरमच्छ की सभी प्रजातियों में सबसे बड़ा और विश्व का सबसे बड़ा सरीसृप भी है।
- पर्यावास: यह प्रजाति खारे और लवणीय मैंग्रोव दलदलों, डेल्टाओं, लैगूनों और नदियों के मुहाने वाले क्षत्रों में पाई जाती हैं।
- वितरण: यह प्रजाति पूर्वी हिन्द महासागर और पश्चिमी प्रशांत महासागरों में उष्णकटिबंधीय से गर्म समशीतोष्ण अक्षांशों तक पाई जाती हैं।
- संरक्षण की स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट: लिस्ट कंसर्न।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-1
- CITES: परिशिष्ट-1
हाल के पक्षी सर्वेक्षण में थट्टेकड पक्षी अभयारण्य में पक्षियों की नौ नई प्रजातियां दर्ज की गई हैं।
थट्टेकड पक्षी अभयारण्य के बारे में
- इसे सलीम अली पक्षी अभयारण्य के नाम से भी जाना जाता है।
- अवस्थिति: एर्नाकुलम जिला, केरल।
- यह केरल का पहला पक्षी अभयारण्य है। इसे पश्चिमी घाट के सबसे विविध पारिस्थितिक क्षेत्रों में से एक माना जाता है।
- पेरियार और इडामलयार नदियों से लगे कुछ क्षेत्रों में दलदली भूमि या वायल प्राप्त होती हैं।
- प्राप्त वनस्पतियां: सागौन, शीशम, महोगनी, फ्रूट ऑर्चर्ड।
- प्राप्त जीव-जंतु: तेंदुआ, स्लॉथ बीयर, पॉर्क्यूपाइन (साही) आदि।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन भारत में वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित करने की योजना बना रहा है। यह "सौर ऊर्जा की सिलिकॉन वैली " होगी।
वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) के बारे में
- यह किसी बहुराष्ट्रीय संगठन/कंपनी की एक रणनीतिक इकाई होती है। यह तकनीक, प्रतिभा और नवाचार के माध्यम से उस संगठन के विश्व में संचालन में मदद करती है।
- उद्देश्य: वैश्विक प्रतिभा संसाधनों और तकनीकी प्रगति का लाभ उठाकर संगठन की क्षमताओं को मजबूत करना और व्यवसाय के रूपांतरण को गति देना।
- भारत में GCC की स्थापना के प्रमुख कारक:
- संचालन लागत कम होना,
- प्रतिभा की उपलब्धता (अंग्रेजी में दक्ष और अत्यधिक कुशल कार्यबल की मौजूदगी), आदि।
नीति आयोग ने भारत में उत्पादित कोयले में राख की उच्च मात्रा (ash content) को देखते हुए गैसीकरण प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन को लेकर चिंताएं जताई है।
- भारतीय कोयले में राख की मात्रा लगभग 30-45% होती है जो बहुत अधिक है। साथ ही इसमें एल्यूमिना-सिलिका का उच्च अनुपात भी होता है। इसके चलते कोयला गैसीकरण की कई वैश्विक प्रौद्योगिकियां अनुपयुक्त हो जाती हैं।
कोयला गैसीकरण के बारे में
- कोयला गैसीफिकेशन तकनीकी के द्वारा कोयले को सिंथेटिक गैस (सिंगैस) में बदला जाता है।
- सिंथेटिक गैस का उपयोग बिजली उत्पादन और ऊर्जा दक्ष फ्यूल सेल तकनीक में किया जा सकता है। साथ ही, इसका उपयोग मेथनॉल, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक नेचुरल गैस (SNG) तथा उर्वरकों जैसे डाउनस्ट्रीम उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEB) ने स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने की इच्छुक कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) मानदंडों को सरल बना दिया है।
न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के बारे में
- लागू होना: यह भारत में सभी सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू होती है।
- किसी सूचीबद्ध कंपनी के कम-से-कम 25% शेयर आम जनता (नॉन-प्रमोटर शेयरधारकों) के पास होने चाहिए।
- कानूनी स्थिति: इससे संबंधित प्रावधान प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 और प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) नियम, 1957 में किए गए हैं।
- उद्देश्य:
- किसी कंपनी के स्वामित्व में अधिक सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करना;
- कंपनी के स्वामित्व को कुछ लोगों के हाथ में केंद्रित होने से रोकना;
- कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता को बढ़ाना;
- शेयरों के लेनदेन के लिए बाजार में अधिक तरलता (अधिक शेयर की उपलब्धता) सुनिश्चित करना।