अफगानिस्तान के विदेश मंत्री भारत की यात्रा पर आए | Current Affairs | Vision IAS
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भारत ने अफगानिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को बढ़ाया, वहां एक दूतावास की स्थापना की, सुरक्षा सहयोग में संलग्न हुआ, तथा भू-राजनीतिक बदलावों और क्षेत्रीय चिंताओं के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों की खोज की।

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अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा के मुख्य परिणामों पर एक नजर

  • भारत ने काबुल स्थित अपने “तकनीकी मिशन” को ‘पूर्ण दूतावास’ का दर्जा देने की घोषणा की। 
  • भारत ने तालिबान को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में अपने राजनयिक नियुक्त करने की अनुमति दी।
    • गौरतलब है कि अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया था।
    • जून 2022 में, भारत ने “तकनीकी टीम” को तैनात कर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अपनी राजनयिक उपस्थिति फिर से दर्ज कराई थी।
  • दोनों देशों ने सभी प्रकार के आतंकवाद से निपटने के लिए समन्वित प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की।
  • अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने आश्वासन दिया कि अफगानिस्तान की जमीन का उपयोग किसी भी अन्य देश के खिलाफ कोई गतिविधि चलाने के लिए नहीं किया जाएगा।
  • भारत-अफगानिस्तान एयर फ्रेट कॉरिडोर की शुरुआत की गई। 
    • अफगानिस्तान ने भारतीय कंपनियों को अपने खनन क्षेत्र में अवसरों की खोज करने के लिए आमंत्रित किया। 

तालिबान के साथ भारत के हालिया संपर्क के कारण

  • अपने राष्ट्रीय हितों को साधना और सुरक्षा चिंताओं को दूर करना, ताकि अफगानिस्तान से संचालित आतंकवादी संगठनों पर अंकुश लगाया जा सके।
  • पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को प्रतिसंतुलित करना।
  • पाकिस्तान और तालिबान के बीच संबंध बिगड़ने के कारण उत्पन्न भूराजनीतिक बदलावों तथा व्यावहारिक राजनीति (रियल पॉलिटिक) को ध्यान में रखना।
  • अफगानिस्तान में क्षमता निर्माण और मानवतावादी पहलों के माध्यम से सद्भाव एवं विश्वास का निर्माण करना । 

भारत-अफगानिस्तान संबंधों के समक्ष प्रमुख चुनौतियां

  • तालिबान की शासन व्यवस्था निरंकुश है, जो विशेष रूप से महिलाओं के मानवाधिकारों की अनदेखी करती है।
  • तालिबान सरकार को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक राजनयिक मान्यता नहीं मिली है।
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