सरकार ने “ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (GEI) लक्ष्य” नियम अधिसूचित किए | Current Affairs | Vision IAS
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भारत सरकार ने उच्च उत्सर्जन वाले क्षेत्रों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी 2025 जीईआई लक्ष्यों की घोषणा की, जिससे जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए व्यापार, अनुपालन और ऑफसेट तंत्र के माध्यम से जीएचजी उत्सर्जन को कम करने के लिए एक कार्बन बाजार की स्थापना की जा सके।

In Summary

कानूनी रूप से बाध्यकारी पहला GEI लक्ष्य नियम, 2025 चार उच्च-उत्सर्जन क्षेत्रकों, अर्थात एल्युमीनियम, सीमेंट, लुगदी व कागज और क्लोर-क्षार (chlor-alkali) को लक्षित करता है।

  • GEI, उत्पाद की प्रति इकाई पर उत्पन्न होने वाली GHGs की मात्रा है। उदाहरण के लिए- सीमेंट या एल्युमिनियम जैसे उत्पाद के प्रति टन के उत्पादन में मुक्त गैसें। 

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS), 2023 के बारे में

  • उद्देश्य: भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (NDCs) के अनुरूप देश के भीतर GHG उत्सर्जन तीव्रता को कम करने के लिए भारत का पहला घरेलू कार्बन बाजार विकसित करना।
  • किसके तहत अधिसूचित: ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत।
  • यह दो तंत्रों के तहत कार्बन बाजार स्थापित करता है:
    • अनुपालन तंत्र: ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए अनिवार्य कार्यक्रम, जहां सरकार GHG उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य निर्धारित करेगी।
    • ऑफसेट तंत्र: अनुपालन तंत्र के तहत कवर नहीं की गई संस्थाओं के लिए एक स्वैच्छिक परियोजना-आधारित तंत्र।

नियम क्या हैं? 

  • किसके तहत जारी किए गए: कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS), 2023 के अनुपालन तंत्र के तहत।
  • अनुपालन लागू करने वाला निकाय: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)।
  • उद्देश्य: कार्बन-गहन क्षेत्रों में उत्पादन (उत्पाद के प्रति टन tCO2e) के प्रति इकाई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग को सुगम बनाना।

तंत्र:

  • अनुपालन करने वाली ऐसी संस्था, जो लक्ष्य से नीचे उत्सर्जन करती है, व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट प्रमाण-पत्र अर्जित कर सकती है।
    • BEE कार्बन क्रेडिट प्रमाण-पत्र जारी करेगा।
  • गैर-अनुपालन संस्थाओं (Non-compliant entities) को अतिरिक्त प्रमाण-पत्र खरीदने होंगे या पर्यावरण मुआवजा देना होगा, जो उस अनुपालन वर्ष के लिए औसत कार्बन क्रेडिट मूल्य का दोगुना होगा। 

 

महत्त्व 

  • बाजार-आधारित अनुपालन: अर्जित क्रेडिट्स का घरेलू कार्बन बाजार में व्यापार किया जा सकता है।
    • ये नियम CCTS, 2023 के तहत देश के घरेलू कार्बन बाजार को परिचालन में लाने में मदद करेंगे।
  • पारदर्शिता: भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल के तहत पंजीकरण और दस्तावेजीकरण। 
  • संधारणीयता के लिए राजस्व: पर्यावरण मुआवजा निधियां कार्बन बाजार बुनियादी ढांचे का समर्थन करती हैं। 
  • भारत के जलवायु लक्ष्यों का समर्थन: पेरिस समझौते के तहत प्रतिबद्धताओं का समर्थन करते हैं।
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