संयुक्त राष्ट्र 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' पुरस्कार | Current Affairs | Vision IAS
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तमिलनाडु की एक IAS अधिकारी सुप्रिया साहू को भारत में प्लास्टिक और वन्यजीव संरक्षण सहित महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौतियों पर उनके अग्रणी नेतृत्व के लिए 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' पुरस्कार प्रदान  किया गया।

‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार के बारे में:

  • यह संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरणीय सम्मान है।
  • यह पुरस्कार 2005 से प्रतिवर्ष दिया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) जलवायु परिवर्तन, प्रकृति व जैव विविधता के नुकसान तथा प्रदूषण व अपशिष्ट के 'तीहरे ग्रहीय संकट' (triple planetary crisis) से निपटने के लिए अभिनव और सतत समाधानों पर कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संगठनों को सम्मानित करता है।

गूगल के CEO ने घोषणा की है कि कंपनी ने दीर्घकालिक अनुसंधान पहल, प्रोजेक्ट सनकैचर पर कार्य करना शुरू कर दिया है। यह पहल अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा संचालित डेटा केंद्रों को स्थापित करने पर केंद्रित है।  

प्रोजेक्ट सनकैचर के बारे में:

  • यह गूगल की एक पहल है। इसका उद्देश्य निम्न भू-कक्षा में सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले उपग्रहों के माध्यम से अंतरिक्ष में मशीन लर्निंग (LM) कंप्यूटिंग की संभावनाओं का परीक्षण करना है।
  • प्रत्येक उपग्रह में गूगल के कस्टम-बिल्ट टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) चिप्स लगाए जाएंगे। 
  • लाभ:
    • पृथ्वी-आधारित डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय प्रभाव से बचाव होगा।
    • अंतरिक्ष में स्थापित डेटा केंद्रों को विद्युत आपूर्ति अवरुद्ध होने या कटने, समुद्र के नीचे की केबल्स के कटने और प्राकृतिक आपदाओं जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। 
    • यह पहल डेटा संप्रभुता को सुविधाजनक बनाएगी, क्योंकि 1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि के तहत बाहरी अंतरिक्ष किसी भी राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार के अधीन नहीं है।

हाल ही में NASA के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने अब तक दर्ज किए गए सबसे शुरुआती सुपरनोवा में से एक का अवलोकन किया है।

JWST के बारे में:

  • यह NASA, यूरोपीय और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच एक सहयोग है। इसका कार्य शुरुआती ब्रह्मांड को समझना है।  
  • यह दूसरे लैग्रेंज बिंदु (L2) पर सूर्य की परिक्रमा करता है। यह मुख्य रूप से इंफ्रारेड स्पेक्ट्रम में ब्रह्मांड का अवलोकन करता है।

सुपरनोवा के बारे में:

  • सुपरनोवा अंतरिक्ष में किसी तारे में होने वाला सबसे बड़ा विस्फोट है। यह निम्नलिखित प्रकार का होता है:
    • "कोर-कोलैप्स" सुपरनोवा: जब किसी विशाल तारे (सूर्य के आकार का 5-8 गुना) का परमाणु ईंधन समाप्त हो जाता है, तो वह ठंडा होने लगता है। इससे बाहर की ओर दबाव काफी कम हो जाता है।
      • जब दबाव गुरुत्वाकर्षण का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं होता, तो तारा ढह जाता है। यह अपने पीछे एक सघन कोर एवं गर्म गैस का बादल, यानी निहारिका (nebula) छोड़ जाता है।
      • यदि तारा सूर्य से लगभग 10 गुना बड़ा था, तो वह अपने पीछे ब्लैक होल छोड़ सकता है।
    • थर्मल रनअवे सुपरनोवा: यह तब बनता है, जब एक दूसरे की परिक्रमा करने वाले 2 तारे {कम-से-कम 1 श्वेत वामन (White Dwarf) हो} आपस में टकराते हैं, या जब श्वेत वामन पास के किसी तारे से बहुत अधिक पदार्थ खींच लेता है।
      • श्वेत वामन लगभग हमारे सूर्य के आकार के तारे का अवशेष होता है। यह तब बनता है, जब उस तारे का ईंधन समाप्त हो जाता है।

असम का माजुली द्वीप एशिया के प्रथम संरक्षित शाही पक्षी अभयारण्य को पुनर्जीवित करने के लिए चराइचुंग महोत्सव की मेजबानी कर रहा है।

  • यह महोत्सव 'चराइचुंगकी 392 वर्ष पुरानी विरासत की याद दिलाता है। 1633 ई. में अहोम राजा स्वर्गदेव प्रताप सिंह ने एशिया के पहले संरक्षित शाही पक्षी अभयारण्य ‘चराइचुंग’ की स्थापना की थी। 

माजुली के बारे में

  • माजुली असम में ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप है।

किश्तवाड़ में रतले परियोजना पर निर्माण कार्य बंद होने का खतरा उत्पन्न हो रहा है।

रतले जलविद्युत परियोजना के बारे में

  • यह चेनाब नदी पर एक रन-ऑफ-रिवर परियोजना है।
    • चेनाब नदी सिंधु की एक प्रमुख सहायक नदी है। यह चंद्रा और भागा धाराओं से मिलकर बनती है।
  • अवस्थिति: जम्मू और कश्मीर (J&K) के किश्तवाड़ जिले में।
  • क्षमता: 850 मेगावाट (MW)।

यूनेस्को ने "शिक्षा का अधिकार: अतीत, वर्तमान और भविष्य" शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की। इसमें यूनेस्को शिक्षा में भेदभाव के विरुद्ध अभिसमय, 1960 की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है।

‘शिक्षा में भेदभाव के विरुद्ध अभिसमय’ के बारे में 

  • उत्पत्ति: इसे 1960 में यूनेस्को द्वारा अपनाया गया था।
  • वैधानिकता: यह पूरी तरह से शिक्षा के अधिकार के प्रति समर्पित पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय साधन है।
  • अधिकार और दायित्व: यह शिक्षा की एक मूल मानवाधिकार के रूप में पुनः पुष्टि करता है और राष्ट्रों  को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करता है कि:
    • वे निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का प्रावधान करें;
    • सभी के लिए माध्यमिक शिक्षा सुलभ और उपलब्ध कराएं; तथा 
    • व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर सभी के लिए उच्चतर शिक्षा समान रूप से सुलभ कराएं। 
  • यह शिक्षा में किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाता है।
  • भारत ने इस अभिसमय का अनुसमर्थन (Ratify) नहीं किया है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कोई भी जबरन या अनैच्छिक नार्को टेस्ट असंवैधानिक और अवैध होगा।

नार्को टेस्ट के बारे में

  • नार्को टेस्ट एक जांच प्रक्रिया है। इसमें अभियुक्त को बर्बिट्यूरेट्स जैसे पदार्थों (उदाहरण के लिए - सोडियम पेंटोथल) की एक निश्चित श्रेणी देकर शांत (sedate) किया जाता है, ताकि विषय पर संकोच (inhibitions) और तर्क करने की क्षमता को कम किया जा सके।
  • वैधानिकता
    • संविधान का अनुच्छेद 20 स्वयं के विरुद्ध साक्षी होने से संरक्षण प्रदान करता है।
    • उच्चतम न्यायालय ने सेल्वी दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। न्यायालय ने माना है कि स्वतंत्र सहमति के बिना ऐसा कोई भी परीक्षण असंवैधानिक होगा और उससे प्राप्त किसी भी जानकारी को साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
    • मनोज कुमार सैनी वाद (2023) और विनोभाई वाद (2025) में, न्यायालय ने निर्णय दिया कि ऐसे परीक्षण दोष सिद्ध नहीं करते हैं, लेकिन प्राप्त जानकारी जांच में योगदान दे सकती है।
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