भारत के पहले स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल-सेल यात्री पोत का वाराणसी में शुभारंभ हुआ | Current Affairs | Vision IAS
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यह पोत घरेलू एलटी-पीईएम हाइड्रोजन ईंधन सेल पर चलता है, जो शून्य उत्सर्जन के साथ एक विद्युत रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से बिजली का उत्पादन करता है, और एक स्वच्छ, कुशल और शांत समुद्री परिवहन समाधान प्रदान करता है।

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यह पोत समुद्री-उपयोग के लिए विकसित हाइड्रोजन फ्यूल-सेल प्रणाली पर संचालित होता है। इसमें पूरी तरह स्वदेशी ‘लो टेम्परेचर-प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (LT-PEM)’ फ्यूल सेल का उपयोग किया गया है।

प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल (PEMFC) के बारे में

  • यह हाइड्रोजन का दहन किए बिना, केवल एक मेम्ब्रेन की मदद से विद्युत उत्पन्न करता है।
  • इसकी कार्य-प्रणाली एक विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया (Electrochemical reaction) पर आधारित है।
  • इस कार्य-प्रणाली के तहत, हाइड्रोजन एनोड में प्रवेश करता है, जहाँ एक उत्प्रेरक उसे प्रोटॉन्स (H⁺) और इलेक्ट्रॉन्स (e⁻) में विभाजित करता है।
  • प्रोटॉन्स, प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन से होकर गुजर जाते हैं, लेकिन इलेक्ट्रॉन नहीं गुजर पाते
  • इलेक्ट्रॉन बाह्य सर्किट से होकर प्रवाहित होते हैं, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।
  • प्रोटॉन्स कैथोड तक पहुँचते हैं, जहाँ वायु से ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जाती है।
  • ‘प्रोटॉन + इलेक्ट्रॉन + ऑक्सीजन’ कैथोड पर संयोजित होकर जल और आंशिक मात्रा में ऊष्मा बनाते हैं।

PEMFC के लाभ

  • शून्य उत्सर्जन: इस पूरी प्रक्रिया में उप-उत्पाद (Byproduct) के रूप में केवल जल निर्मुक्त होता है।
  • यह फ्यूल सेल उच्च विद्युत घनत्व उत्पन्न करता है। साथ ही, अन्य फ्यूल सेल्स की तुलना में यह कम-वजनी और कम आयतन वाला फ्यूल सेल है।
  • तेजी से संचालन: यह कम तापमान पर कार्य करता है, इसलिए कम समय में संचालित होने लगता है। यह विशेषता इसे दैनिक परिवहन साधनों के लिए उपयुक्त बनाती है।
  • शोर-रहित: इसमें कोई गतिशील पार्ट्स नहीं होते, इसलिए शांतिपूर्ण और शोर-रहित परिवहन की सुविधा देता है।
  • उच्च दक्षता: यह हाइड्रोजन को सीधे विद्युत में बदलता है। इसलिए अन्य दहन इंजनों (Combustion engines) की तुलना में यह अधिक उपयोगी और प्रभावी है।

कुछ प्रमुख चुनौतियां

  • इसमें लगाने वाले पदार्थों की उच्च लागत: विशेषकर प्लैटिनम जैसे महंगे उत्प्रेरक पदार्थ के उपयोग की वजह से इस प्रौद्योगिकी की लागत अधिक हो जाती है।
  • स्वच्छ हाइड्रोजन की उपलब्धता: स्वच्छ हाइड्रोजन उत्पादन में अधिक ऊर्जा की खपत हो सकती है।
  • अधिक समय तक उपयोग में रहने से जुड़ी चिंता: उच्च दबाव की स्थितियों में समय के साथ  प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन का क्षरण (degradation) हो सकता है।
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