हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने वर्ष 2025 में 37 गीगावाट (GW) से अधिक की सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी। इस तरह वह संयुक्त राज्य अमेरिका (34 GW की क्षमता वृद्धि) से आगे निकल गया है।
- भारत की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 155 गीगावाट को पार कर गई है।
- दिसंबर 2025 तक, देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन का योगदान 51.93% हो गया।
- 'नवीकरणीय ऊर्जा सांख्यिकी 2026' के अनुसार, चीन और अमेरिका के बाद भारत नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है।
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहलें
- पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना: यह घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख सरकारी योजना है। इसके तहत अब तक 40 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हो चुके हैं।
- अवसंरचना विकास: 55 सोलर पार्कों (40 गीगावाट क्षमता) को मंजूरी दी गई है। साथ ही, उपभोक्ताओं तक इनकी आपूर्ति के लिए बिजली उत्पादन स्थल से मुख्य ग्रिड तक 'हरित ऊर्जा गलियारा' का दूसरा चरण शुरू किया गया है।
- सौर ऊर्जा उपकरणों का देश में विनिर्माण: सौर ऊर्जा उपकरणों के लिए 'ALMM' (मॉडल और विनिर्माताओं की अनुमोदित सूची) को लागू कर दिया गया है। इसके तहत सूची में शामिल उपकरणों की देश के विनिर्माताओं से ही खरीद अनिवार्य कर दी गई है।
- विश्व को मार्गदर्शन: भारत 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA) का नेतृत्व कर रहा है, ताकि विश्व भर में सौर ऊर्जा को तेजी से अपनाया जा सके।
सौर ऊर्जा का महत्व
- स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में योगदान: सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता में तीव्र वृद्धि के कारण भारत ने अपनी कुल विद्युत ऊर्जा क्षमता का 50% गैर जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया।
- जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबद्धता को पूरा करना: भारत ने पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) के लक्ष्यों को समय सीमा से पहले पूरा कर लिया है।
- आर्थिक और सामाजिक विकास: सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिल रहा है, परिवारों का बिजली बिल कम हो रहा है, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।