भुवनेश्वर में भारत की पहली ‘एडवांस्ड 3D सेमीकंडक्टर पैकेजिंग यूनिट’ की आधारशिला रखी गई | Current Affairs | Vision IAS

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यह परियोजना घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण प्रणाली को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • यह केंद्र एक वर्टिकली इंटीग्रेटेडअसेम्बली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP)’ इकाई के रूप में कार्य करेगा।

घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता और महत्व:

  • आयात पर निर्भरता में कमी: इससे घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता सुदृढ़ होगी, जिससे आयात पर अधिक निर्भरता कम होगी।
    • वर्तमान में, भारत अपनी 90% से अधिक सेमीकंडक्टर (चिप) आवश्यकताएं आयात करता है।
  • आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने के लिए: वर्तमान में, विश्व के लगभग 70% सेमीकंडक्टर विनिर्माण दक्षिण कोरिया, ताइवान, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान में केंद्रित हैं।
  • उभरते क्षेत्रकों को बढ़ावा देने के लिए: देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण प्रणाली डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, 5G/6G संचार, रक्षा, एयरोस्पेस और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रकों के विकास में योगदान देगी।
  • आर्थिक सुरक्षा के लिए: इससे कोविड-19 और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकटों के समय चिप की कमी जैसी स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी। 

सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए की शुरू की गई पहलें

  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) और सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम: इनका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले की सुदृढ़ प्रणाली तैयार करना है, ताकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजाइन के क्षेत्र में  वैश्विक हब बन सके।
  • प्रतिभा और कौशल विकास: इसमें 'चिप्स टू स्टार्टअप' (C2S) कार्यक्रम, AICTE पाठ्यक्रम अपडेट (विशेष इंजीनियरिंग कार्यक्रम शुरू किए गए) आदि शामिल हैं।
  • स्वदेशी प्रौद्योगिकियां: माइक्रोप्रोसेसर विकास और 'डिजिटल इंडिया RISC-V' कार्यक्रमों के तहत शक्ति (SHAKTI), विक्रम (VIKRAM) और ध्रुव64 (DHRUV64) जैसे नेटिव (स्थानिक) प्रोसेसर बनाए गए हैं।
  • वैश्विक सहयोग: उदाहरण के लिए, ‘भारत-अमेरिका महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पहल (iCET)', अमेरिका के नेतृत्व वाली 'पैक्स सिलिका' (Pax Silica) पहल में शामिल होना, आदि।
  • राज्यों की नीतियां: जैसे 'गुजरात सेमीकंडक्टर नीति 2022-27'।
  • अन्य पहलें: इलेक्ट्रॉनिक घटक और सेमीकंडक्टर विनिर्माण संवर्धन योजना (SPECS), इलेक्ट्रॉनिक्स घटक और विनिर्माण योजना (ECMS), आदि।
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भारत-अमेरिका महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पहल (iCET)

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय पहल जो महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, जैसे सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 5G, में सहयोग को बढ़ावा देती है।

डिजिटल इंडिया RISC-V (Digital India RISC-V)

RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसरों के विकास को बढ़ावा देने वाली एक पहल, जो ओपन-सोर्स और लचीली है।

चिप्स टू स्टार्टअप (Chips to Startup - C2S)

एक कार्यक्रम जो भारत में सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

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