भारतीय आर्थिक विकास अनुमानों का अवलोकन
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह पूर्वानुमान विश्लेषकों और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की पिछली अपेक्षाओं से कहीं अधिक है।
वर्ष की पहली छमाही में आर्थिक प्रदर्शन
- अर्थव्यवस्था ने वर्ष की पहली छमाही में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की।
- अनुमान है कि दूसरी छमाही में विकास की गति घटकर 6.8 प्रतिशत हो जाएगी।
- इस मंदी में योगदान देने वाले कारकों में सरकारी खर्च में कमी और माल निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव शामिल है।
क्षेत्रवार प्रदर्शन
- सेवा क्षेत्रक में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जो 2024-25 में 7.2 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 9.1 प्रतिशत हो जाएगी।
- व्यापार, होटल, परिवहन और संचार, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और सार्वजनिक प्रशासन जैसे प्रमुख क्षेत्रक इस वृद्धि में योगदान दे रहे हैं।
- औद्योगिक क्षेत्र में, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार देखने को मिल रहा है जबकि निर्माण और उपयोगिता क्षेत्रों में वृद्धि की गति धीमी है।
चिंताएँ और निहितार्थ
- नामित GDP वृद्धि दर 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो केंद्रीय बजट में अनुमानित 10.1 प्रतिशत से कम है।
- यह लगातार दूसरा वर्ष है जब नामित वृद्धि 10 प्रतिशत से कम रही है, जिससे सरकारी ऋण/घाटे की गतिशीलता प्रभावित हो सकती है।
भविष्य के डेटा संशोधन
GDP का यह अनुमान नवंबर तक उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। 2022-23 को आधार वर्ष मानकर संशोधित GDP अनुमान जारी किए जाएंगे, जिनमें नई कार्य-प्रणालियों और डेटा स्रोतों को शामिल किया जाएगा।
- 2024 को आधार वर्ष मानते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की एक नई श्रृंखला फरवरी में जारी की जाएगी।
- औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के लिए एक नई श्रृंखला की भी उम्मीद है।