केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026
केंद्र सरकार ने 25 मार्च, 2026 को राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में 'ग्रुप ए जनरल ड्यूटी ऑफिसर' (GAGDO) और अन्य अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों को विनियमित करना है।
मुख्य प्रावधान
- महानिरीक्षक के 50% पद और अतिरिक्त महानिदेशक के कम से कम 67% पद भारतीय पुलिस सेवा (IPS) से प्रतिनियुक्ति द्वारा भरे जाने चाहिए।
- सभी विशेष महानिदेशक और महानिदेशक पदों को IPS प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरा जाएगा।
- उप महानिरीक्षक और उससे नीचे के पदों पर प्रतिनियुक्ति मौजूदा नियमों के अनुसार होगी।
- यह विधेयक पांच सीएपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल), सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल) पर लागू होता है।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से संबंध
इस विधेयक का उद्देश्य सीएपीएफ के अंतर्गत IPS के अंशदान को संस्थागत रूप देना है, जिसे कुछ लोग संजय प्रकाश बनाम भारत संघ (मई 2025) मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के विपरीत मानते हैं। न्यायालय ने दो वर्षों के भीतर सेवा नियमों की समीक्षा करने और SAG रैंक में प्रतिनियुक्ति पदों को कम करने का आदेश दिया था।
नीतिगत औचित्य
- CAPF के स्वरूप को बनाए रखने और राज्य बलों के साथ समन्वय स्थापित करने में IPS अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
- आईपीएस अधिकारियों के पास व्यापक प्रशिक्षण और अनुभव होता है जिससे CAPF को लाभ मिलता है।
- सरदार पटेल की ऐतिहासिक दूरदृष्टि में IPS को केंद्र और राज्यों के बीच एक जोड़ने वाली कड़ी के रूप में देखा गया था।
न्यायिक व्याख्या
न्यायालय ने फैसला सुनाया कि IPS प्रतिनियुक्ति जैसे नीतिगत निर्णय विधायी और कार्यकारी अधिकार क्षेत्र में आते हैं, न कि न्यायिक निर्णय के अंतर्गत। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायालयों को नीति निर्माण में तब तक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जब तक कि नीतियां असंवैधानिक या तर्कहीन न हों।
कुल मिलाकर, विधेयक और संबंधित निर्णय सीएपीएफ में IPS अधिकारियों के महत्व को रेखांकित करते हैं, साथ ही न्यायिक व्याख्या और नीति निर्माण के पृथक्करण को भी स्पष्ट करते हैं।