पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की ऊर्जा अन्वेषण पहल
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट ने ऊर्जा आयात पर भारत की भारी निर्भरता को उजागर किया है, जिसके चलते सरकार ने घरेलू स्तर पर तेल और गैस की खोज के प्रयासों में तेजी लाने का निर्णय लिया है। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य गहरे और अति गहरे जल में स्थित तेल और गैस के अनछुए भंडारों से संबंधित भूकंपीय डेटा एकत्र करना होगा।
समुद्र मंथन कार्यक्रम
- सरकार की इस पहल का उद्देश्य भूकंपीय डेटा अधिग्रहण के लिए धन जुटाना है।
- इस अभ्यास का नेतृत्व हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) करेगा।
- इस पहल की पूंजी-गहन प्रकृति को देखते हुए, सरकार इस पर पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तपोषण करेगी या नहीं, इस पर निर्णय लंबित है।
इस पहल के उद्देश्य
- अपतटीय क्षेत्रों में अब तक अप्रयुक्त क्षेत्रों में डेटा संग्रह को प्राथमिकता देना।
- अपर्याप्त आंकड़ों की उपलब्धता संबंधी चिंताओं को दूर करके भारत के अन्वेषण क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करना।
- लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर के पूर्व प्रतिबंधित अपतटीय क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए खोलना।
संदर्भ और चुनौतियाँ
- वित्त वर्ष 2026 तक कच्चे तेल पर भारत की आयात निर्भरता 89% और प्राकृतिक गैस पर 51% रही, जो कि उच्च स्तर पर बनी हुई है।
- तेल क्षेत्रों में प्राकृतिक गिरावट और नए भंडारों की खोज न होने के कारण घरेलू उत्पादन स्थिर बना हुआ है।
खुली भूमि लाइसेंसिंग नीति (OALP)
- सरकार ने ग्यारहवें दौर (OALP-XI) की शुरुआत की, जिसमें 80,228 वर्ग किलोमीटर में फैले 21 अन्वेषण ब्लॉकों की पेशकश की गई।
- पिछले दौर (OALP-X) में 182,000 वर्ग किलोमीटर में फैले 25 ब्लॉकों की पेशकश की गई थी, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा अपतटीय बोली दौर है।
नव गतिविधि
- LPG वाहक पोत MT सर्व शक्ति ने सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है और इसके विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है, जो क्षेत्रीय तनाव के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति मार्गों के निरंतर बने रहने का संकेत देता है।