राष्ट्रपति ने भारत के 75वें संविधान दिवस के अवसर पर संविधान के महत्त्व को रेखांकित किया | Current Affairs | Vision IAS
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भारत में प्रतिवर्ष 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन भारत के संविधान को अपनाया गया था।  

  • गौरतलब है कि 26 नवंबर, 1949 को भारत की संविधान सभा ने भारत के संविधान को अपनाया था। यह संविधान 26 जनवरी, 1950 से लागू हुआ।
    • संविधान मौलिक सिद्धांतों का एक निकाय है। इन्हीं सिद्धांतों के अनुसार किसी राज्य का गठन या शासन किया जाता है। संविधान लिखित या अलिखित, दोनों रूपों में हो सकता है। 
      • भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान लिखित रूप में हैं, जबकि यूनाइटेड किंगडम का संविधान अलिखित रूप में है। 

भारतीय संविधान का महत्त्व और भूमिका

  • मूल अधिकारों का रक्षक: संविधान के भाग III में निहित अनुच्छेद 12 से 35 में मूल अधिकारों का उल्लेख है।
    • उदाहरण के लिए- न्यायमूर्ति के. एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि “निजता का अधिकार” (Right to privacy) अनुच्छेद 21 के “प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण” के अधिकार का हिस्सा है।
  • सामाजिक न्याय को बढ़ावा: अनुच्छेद 17 के तहत “अस्पृश्यता का उन्मूलन”, अनुच्छेद 29 से 30 के तहत “अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण” जैसे प्रावधान सामाजिक न्याय सुनिश्चित करते हैं।
  • समाज की आकांक्षाओं को पूरा करना: अनुच्छेद 48A के तहत पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण करना, अनुच्छेद 45 के तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल व शिक्षा और अनुच्छेद 21A के तहत बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा जैसे प्रावधानों का उद्देश्य समाज की आकांक्षाओं को पूरा करना है।
  • समाज के सदस्यों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना: भारत का संविधान कानूनों, सिद्धांतों और संस्थानों का एक फ्रेमवर्क प्रदान करता है। इस फ्रेमवर्क के जरिए सरकार की संरचना एवं कार्यों को स्पष्ट किया गया है।
  • पंथनिरपेक्षता की सुरक्षा सुनिश्चित करना: अनुच्छेद 25 से 28 के प्रावधान “धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार” की गारंटी देते हैं।
    • 1994 में एस. आर. बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया था कि पंथनिरपेक्षता संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।
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