RBI ने एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) द्वारा कर्जदारों के बकाये के निपटान पर दिशा-निर्देशों को संशोधित किया | Current Affairs | Vision IAS
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ये दिशा-निर्देश वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन (सरफेसी/ SARFAESI) अधिनियम, 2002” द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए गए हैं। 

  • सरफेसी अधिनियम का उद्देश्य गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) और डूबे कर्जों की वसूली करना है। यह बैंकों और वित्तीय संस्थानों को न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना गिरवी रखी गई संपत्तियों की नीलामी के माध्यम से चूक (डिफॉल्ट) वाले ऋण वसूलने की शक्ति प्रदान करता है। 

मुख्य दिशा-निर्देशों पर एक नजर

  • प्रत्येक ARC द्वारा बोर्ड-स्वीकृत नीति तैयार करना: कर्जदारों द्वारा भुगतान किए जाने वाले बकाये के निपटान (settlement) के लिए बोर्ड-स्वीकृत नीति बनानी होगी। इसमें वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) के लिए पात्रता मानदंड जैसे पहलू शामिल होंगे।
  • एक करोड़ रुपये से अधिक बकाया राशि वाले खातों का निपटान: ऐसे मामलों में निपटान केवल एक स्वतंत्र सलाहकार समिति (IAC) द्वारा गहन मूल्यांकन के बाद किया जा सकता है। IAC में वित्तीय व कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे।।
    • बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, IAC की सिफारिशों पर विचार करेंगे और ऋण वसूली के वैकल्पिक उपायों का मूल्यांकन करेंगे। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में कम-से-कम दो स्वतंत्र निदेशक शामिल होंगे।  
  • 1 करोड़ रुपये या उससे कम की बकाया राशि वाले खातों का निपटान: ऐसे मामलों का तेजी से समाधान करने के लिए, इन्हें बोर्ड-स्वीकृत नीति के तहत स्थापित एक सक्षम प्राधिकरण द्वारा निपटाया जा सकता है। 
    • वित्तीय परिसंपत्ति का अधिग्रहण करने वाले अधिकारी निपटान को मंजूरी देने की प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते। इसका उद्देश्य हितों के टकराव (conflict of interest) को रोकना है। 

 एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (ARC) क्या है?

  • परिभाषा: ARCs ऐसी वित्तीय संस्थाएं हैं, जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों से गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां या डूब चुकी परिसंपत्तियां खरीदती हैं। इससे बैंकों को अपनी बैलेंस शीट सुधारने में मदद मिलती है।
  • पंजीकरण: ARCs को सरफेसी अधिनियम, 2002 के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा कंपनी के रूप में पंजीकृत किया जाता है।

एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) का महत्त्व:

  • तनावपूर्ण वित्तीय परिसंपत्तियों (distressed assets) का शीघ्र समाधान हो पाता है। साथ ही बैंक, डेब्ट रिकवरी की बजाय अपनी मुख्य गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
  • तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान वाले बाजार का विकास होता है। साथ ही, निवेश के वैकल्पिक अवसरों को बढ़ावा मिलता है।
  • ARCs, बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ाती हैं, बैंक की बैलेंस शीट में सुधार करती हैं और पूंजी जुटाने की बैंकों की क्षमता बढ़ाती हैं।
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