बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) कई दशकों के निचले स्तर पर पहुंची | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • भारतीय बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 2025 के अंत तक कई दशकों के निचले स्तर 2.1% पर आ गया, जबकि शुद्ध एनपीए 0.5% रहा।
  • एनपीए में कमी लाने वाले प्रमुख कारकों में आईबीसी 2016, एसएआरएफएईएसआई अधिनियम, एआरसी और इंद्रधनुष जैसी पहल शामिल हैं।

In Summary

हाल ही में, RBI ने 'भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति रिपोर्ट 2024-25' जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकों का NPA कई दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गया है। 2025 के अंत तक सकल NPA (GNPA) अनुपात गिरकर 2.1% हो गया है।

  • मार्च 2025 के अंत तक निवल NPA (NNPA) अनुपात घटकर 0.5% रह गया।
  • बैंकों का GNPA अनुपात 2018 में 11.18% के उच्चतम स्तर पर था।

गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPAs) क्या हैं?

  • जब किसी बकाया ऋण या अग्रिम के मूलधन या ब्याज का भुगतान निर्धारित तिथि से 90 दिनों तक नहीं किया जाता है, तब वह ऋण NPA बन जाता है।
    • सकल NPA: उन ऋणों का कुल मूल्य है, जहां ब्याज या मूलधन बकाया है।
    • निवल NPA: यह GNPA में से 'प्रोविजन' को घटाकर प्राप्त किया जाता है।
      • प्रोविजन: यह वह धनराशि है, जिसे बैंक संभावित नुकसान को कवर करने के लिए अलग रखते हैं। 
  • NPAs के प्रमुख चालक: आर्थिक मंदी, धोखाधड़ी करने वाले कर्जदार, ऋण की खराब निगरानी आदि।
  • NPAs से जुड़ी चुनौतियां: उच्च प्रोविजनिंग, बैंकों की ऋण देने की क्षमता में कमी, बैलेंस शीट पर दबाव आदि।

NPA कम करने के लिए शुरू की गई प्रमुख पहलें: इन सरकारी और विनियामक पहलों ने NPA को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:

  • दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016: इसके तहत तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान के लिए एक समयबद्ध व ऋणदाता-संचालित फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।
  • वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन (सरफेसी/ SARFAESI) अधिनियम, 2002: यह सुरक्षित ऋणदाताओं को ऋण चूक की स्थिति में उस संपार्श्विक/ जमानत (collateral) को कब्जे में लेने की अनुमति देता है, जिसके बदले ऋण दिया गया था।
  • परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियां (ARCs): बैंकों ने अपने NPAs को ARCs को बेचकर अपनी बैलेंस शीट को ठीक करना जारी रखा है।
  • अन्य उपाय: सार्वजनिक क्षेत्रक के बैंकों (PSBs) के सुधार के लिए इंद्रधनुष योजना (PSBs में पूंजी निवेश योजना) संचालित की जा रही है; ऋण वसूली अधिकरणों (DRTs) की स्थापना की गई है आदि।
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Debt Recovery Tribunals (DRTs)

Specialised quasi-judicial bodies established under the Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993, to expedite the recovery of debts owed to banks and financial institutions.

Public Sector Banks (PSBs)

Banks where the majority stake is held by the Government of India. The article mentions reform initiatives like the 'Indradhanush' scheme for capital infusion into PSBs.

Asset Reconstruction Companies (ARCs)

Companies that acquire NPAs from banks and financial institutions. They specialise in the recovery and resolution of these bad loans, thereby helping banks clean up their balance sheets.

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