नीति आयोग की रिपोर्ट किफायती आवास (Affordable House) के लिए एक कार्यशील परिभाषा प्रदान करती है। इस परिभाषा के अनुसार:
- महानगरीय शहरों में: एक ऐसी आवासीय इकाई, जिसका कारपेट एरिया 60 वर्ग मीटर तक और मूल्य ₹60 लाख तक हो, किफायती आवास है।
- गैर-महानगरीय क्षेत्रों में: एक ऐसी आवासीय इकाई, जिसका कारपेट एरिया 90 वर्ग मीटर तक और मूल्य ₹45 लाख तक हो, किफायती आवास है।
- प्रधान मंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) 2.0, 2024 किफायती आवास को उपर्युक्त कारपेट एरिया और ₹45 लाख से अनधिक (not exceeding) मूल्य के रूप में परिभाषित करती है।

किफायती आवास को लेकर की गई मुख्य सिफारिशें
- ज़ोनिंग सुधार: शहर के मास्टर प्लान और टाउन प्लानिंग योजनाओं के भीतर 'किफायती आवास क्षेत्र' नामित किए जाने चाहिए। इसमें सभी आवासीय भूमि का कम-से-कम 10% किफायती आवास के लिए चिह्नित होना चाहिए।
- उदाहरण के तौर पर वियना और दक्षिण कोरिया ने इस दृष्टिकोण को अपनाया है।
- संक्रमण-उन्मुख विकास (Transit-oriented development: TOD): शहरों द्वारा मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन स्टेशनों के निकटवर्ती क्षेत्रों को अनन्य रूप से मिश्रित-उपयोग विकास के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में कार्यालय, वाणिज्यिक स्थान और किफायती आवास का संयोजन होना चाहिए।
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)/ निम्न आय वर्ग (LIG) आवास के लिए आरक्षण: 10,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र (Built-up area) या 5,000 वर्ग मीटर से अधिक के प्लॉट वाली सभी आवासीय एवं वाणिज्यिक परियोजनाओं में EWS/ LIG आवास के लिए 10-15% निर्मित क्षेत्र का अनिवार्य आरक्षण होना चाहिए।
- किराया आवास कानूनी ढांचे में सुधार: राज्यों को PMAY-U 2.0 के 'किफायती किराया आवास' (ARH) घटक के अनुरूप, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से समर्पित किराया आवास स्टॉक नीतियां अपनानी चाहिए।