भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने अपने 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक नया मानकीकरण पोर्टल तथा महिलाओं के लिए SHINE जैसी पहलें शुरू कीं।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के बारे में
- BIS भारत की राष्ट्रीय मानक-निर्धारक संस्था है। यह संस्था केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत कार्य करती है।
- इसकी स्थापना भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के तहत हुई है।
- अधिदेश (Mandate): यह संस्था वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता, संरक्षा, विश्वसनीयता तथा दक्षता सुनिश्चित करने हेतु भारतीय मानकों का निर्धारण करती है।
- कार्य: BIS उत्पादों के प्रमाणन, स्वर्ण व चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग, अनिवार्य पंजीकरण योजनाएं आदि का संचालन करता है।
Article Sources
1 sourceएक अध्ययन के अनुसार डूम्सडे ग्लेशियर की बर्फ में दरारें बढ़ रही हैं। यह परिघटना अंटार्कटिक हिमशैल (आइस शेल्फ) के ढहने की आशंका का संकेत देती हैं।
डूम्सडे ग्लेशियर के बारे में
- थ्वेट्स हिमनद को सामान्यतः ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ कहा जाता है।
- इसे यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इसमें वैश्विक समुद्री जल स्तर को बहुत अधिक बढ़ाने की क्षमता है। यह पृथ्वी की सबसे तेजी से बदलने वाली हिम–महासागर प्रणालियों में से एक है।
- इस हिमनद के पूरी तरह पिघलने से वैश्विक समुद्री जल स्तर में लगभग 65 सेंटीमीटर तक की वृद्धि हो सकती है।
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) की संशोधित स्टार रेटिंग प्रणाली लागू हो गई है।
- ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की स्थापना ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत एक सांविधिक निकाय के रूप में की गई है।
‘BEE स्टार रेटिंग’ के बारे में
- यह मानक एवं लेबलिंग (S&L) कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता है।
- उद्देश्य: उपभोक्ताओं को बाजार में उपलब्ध उपकरणों की ऊर्जा बचत और उससे होने वाली लागत से संबद्ध बचत की क्षमता के बारे में जानकारी आधारित विकल्प प्रदान करना।
- जिन उपकरणों के लिए रेटिंग अनिवार्य है: सीलिंग फैन, इलेक्ट्रिक गीजर, ट्यूबलर फ्लोरोसेंट लैंप, कलर टेलीविजन, आदि।
- जिन उपकरणों के लिए रेटिंग स्वैच्छिक है: सामान्य प्रयोजन औद्योगिक मोटर, कंप्यूटर, माइक्रोवेव ओवन आदि।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक अत्याधुनिक रेसिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी (RUF) का संचालन शुरू किया है।
- इसकी क्षमता 3.55 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है।
- यह सुविधा उन्नत रेसिड्यू हाइड्रोक्रैकिंग (Residue Hydrocracking) प्रौद्योगिकी का उपयोग करती है।
- यह स्वदेशी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
हाइड्रोक्रैकिंग प्रौद्योगिकी के बारे में
- यह एक उत्प्रेरक (कैटेलिटिक) प्रक्रिया है। इसका उपयोग तेल परिशोधनशालाओं (रिफाइनरियों) में भारी तेल के अंशों को उच्च गुणवत्ता वाले मध्य आसवन उत्पादों और हल्के उत्पादों (डीजल, नेफ्था और LPG) में बदलने के लिए किया जाता है।
- इस प्रक्रिया में उच्च आणविक भार वाले अणुओं को खंडित करके हल्के यौगिकों का निर्माण किया जाता है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने सुपरकंप्यूटर आधारित पहली सिमुलेशन विकसित की है, जिससे मपेंबा प्रभाव को समझा और दर्शाया जा सका।
मपेंबा प्रभाव के बारे में
- यह दीर्घकाल से चला आ रहा एक विरोधाभास है। इसके अनुसार कुछ विशेष परिस्थितियों में गर्म पदार्थ, ठंडे पदार्थों की तुलना में तीव्र गति से जम सकते हैं।
- यह प्रभाव विशेष रूप से जल में देखा गया है, लेकिन यह प्रभाव केवल जल तक सीमित नहीं है। यह प्रभाव अन्य पदार्थों तथा भौतिक प्रणालियों में भी दिखाई देता है।
- महत्त्व:
- ऊष्मा इंजन और प्रशीतन प्रणालियों में उपयोगी;
- क्वांटम कंप्यूटिंग में उपयोगी;
- पदार्थ विज्ञान में उपयोगी, आदि।
हाल ही में, 'W उर्स मेजरिस' (W Ursae Majoris) नामक तारकीय जुड़वाँ (Stellar twin) पर किए गए अध्ययन से द्विक तारा प्रणाली (Binaries) के विकास और उनकी अंतिम परिणति के बारे में नई अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई है।
- ये तारें एक-दूसरे की बहुत निकट से परिक्रमा करते हैं।
तारकीय जुड़वां (Stellar twin) क्या हैं?
- इनका आशय ऐसे दो तारों से है जो एक साथ उत्पन्न हुए हों और जिनकी आयु, द्रव्यमान तथा रासायनिक संरचना समान या बहुत मिलती-जुलती हो।
अध्ययन के मुख्य मुख्य बिंदु:
- W उर्स मेजरिस (W UMa) तारे: ये कम अवधि वाले और डंबल के आकार वाले द्विक तारा होते हैं।
- इस प्रणाली में दोनों तारे एक-दूसरे के संपर्क में होते हैं और एकल वायुमंडल साझा करते हैं।
- ये तारे प्राकृतिक प्रयोगशालाओं के रूप में कार्य करते हैं, जो तारों के द्रव्यमान, त्रिज्या जैसे मूलभूत मापदंडों को निर्धारित करने में वैज्ञानिकों की सहायता करते हैं।
- अध्ययन के निष्कर्ष: इस अध्ययन ने तारों की कक्षाओं में होने वाले बदलावों जैसी महत्वपूर्ण विशेषताओं को उद्घाटित किया है।
- इसमें यह भी बताया गया है कि तारों के बीच द्रव्यमान का स्थानांतरण कैसे होता है।
- अध्ययन में 'स्टार स्पॉट्स' जैसी सतह जनित गतिविधियों के प्रमाण भी मिले हैं।
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1 sourceभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पहले स्वदेशी डस्ट डिटेक्टर ने पृथ्वी से टकराने वाले दूसरे आकाशीय पिंडों के (अंतरग्रहीय) धूल-कणों का पता लगाया है।
- आंकड़ों के अनुसार, ये धूल कण औसतन प्रत्येक 1,000 सेकंड में पृथ्वी से टकराते हैं।
डस्ट एक्सपेरिमेंट (DEX) के बारे में
- यह अंतरग्रहीय धूल कणों का पता लगाने और उनका अध्ययन करने के लिए निर्मित पहला भारतीय उपकरण है।
- अंतरग्रहीय धूल कण धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से उत्पन्न सूक्ष्म कण होते हैं।
- मिशन का क्रियान्वयन: इस उपकरण को PSLV-C58 के POEM (PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल) के साथ प्रक्षेपित किया गया।
- विकासकर्ता: भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL), अहमदाबाद।
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को 'अंतरराष्ट्रीय चरागाह एवं पशुपालक वर्ष' (International Year for Rangelands and Pastoralists) घोषित किया है।
चरागाह और पशुपालकों के बारे में
- चरागाह (Rangelands): ये पृथ्वी की लगभग आधी स्थलीय सतह पर विस्तृत हैं। इनमें घास के मैदान, सवाना, झाड़ीदार भूमि, रेगिस्तान, आर्द्रभूमि या पर्वतीय क्षेत्र शामिल हैं।
- प्रमुख उदाहरण: मध्य एशिया के स्टेपी, अफ्रीकी सवाना, यूरोप के आल्प्स और पिरेनीज, दक्षिण अमेरिका के एंडीज और संयुक्त राज्य अमेरिका के 'ग्रेट प्लेन्स'।
- महत्व: ये अद्वितीय जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का संरक्षण करते हैं तथा कार्बन भंडारण और जल प्रबंधन जैसी आवश्यक सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- पशुपालक (Pastoralists): ये पशुपालन करते हैं और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इनके पास विविध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय व स्वदेशी ज्ञान का बहुमूल्य भंडार होता है।