केंद्र सरकार ने पट्टे पर दी गई वन भूमि पर निजी वनीकरण कार्यों के नियमों में राहत प्रदान की | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में किए गए संशोधनों के अनुसार, अब सहायता प्राप्त प्राकृतिक पुनर्जनन को 'वानिकी गतिविधियों' के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे उन्हें क्षतिपूर्ति वनीकरण और शुद्ध वर्तमान मूल्य भुगतान से छूट दी गई है।
  • क्षतिपूर्ति वनीकरण (सीए) वन भूमि के डायवर्जन की भरपाई करता है, जबकि नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) पारिस्थितिकी तंत्र सेवा हानि के लिए एक शुल्क है, जिसके लिए धनराशि का प्रबंधन राज्य सीएएमपीए द्वारा सीएएफ अधिनियम, 2016 के तहत किया जाता है।
  • वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023, अधिसूचित वन भूमियों तक ही इसकी प्रयोज्यता को सीमित करता है, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के 100 किलोमीटर के भीतर की परियोजनाओं को छूट देता है, और पर्यावरण पर्यटन और चिड़ियाघरों को 'वानिकी गतिविधियों' के रूप में पुनर्वर्गीकृत करता है।

In Summary

यह बदलाव वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 (पूर्व में वन संरक्षण अधिनियम) के समेकित दिशा-निर्देशों में संशोधन करके लागू किया गया है।

प्रमुख संशोधन

  • यह सरकारी या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले 'सहायता प्राप्त प्राकृतिक पुनरुत्पादन', जिसमें वनीकरण और वृक्षारोपण शामिल है, को "वानिकी गतिविधियों" के रूप में मानने की अनुमति देता है।
  • इसके परिणामस्वरूप, ऐसी गतिविधियों पर प्रतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता और निवल वर्तमान मूल्य (NPV) का भुगतान लागू नहीं होंगे। 
    • प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation: CA): इसका अर्थ है गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग के बदले में किया गया वनीकरण।
      • यह वन भूमि के नुकसान की भरपाई के लिए 'भूमि के बदले भूमि' तथा 'वृक्षों के बदले वृक्ष' के नियम को अनिवार्य बनाता है और गैर-वन भूमि पर संपन्न किया जाता है।
    • निवल वर्तमान मूल्य (NPV): यह एक अनिवार्य शुल्क है, जिसका उद्देश्य कार्बन प्रच्छादन (carbon sequestration), जल पुनर्भरण और जैव विविधता जैसी पारिस्थितिकी-तंत्र सेवाओं के नुकसान की भरपाई करना है।
    • प्रतिपूरक वनीकरण और NPV के माध्यम से एकत्र की गई धनराशि को राज्य प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (CAMPA) में जमा किया जाता है। CAMPA को प्रतिपूरक वनीकरण कोष (CAF) अधिनियम, 2016 के तहत स्थापित किया गया है।
  • राज्य सरकार ऐसे वृक्षारोपण के उपयोग और राजस्व साझा करने के लिए एक रूपरेखा तैयार कर सकती है।

वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980

वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 ने 'वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980' का नाम बदल दिया है। अन्य प्रमुख संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • लागू होना: यह अधिनियम को उस भूमि तक सीमित करता है, जिसे भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रावधानों के अनुसार वन घोषित या अधिसूचित किया गया है।
  • रणनीतिक छूट: यह राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजनाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के 100 किलोमीटर दायरे में परियोजनाओं को वन मंजूरी लेने से छूट प्रदान करता है। 
  • अनुमत गतिविधियां: इको-टूरिज्म (पारिस्थितिक पर्यटन), चिड़ियाघर और सिल्वीकल्चरल (वनवर्धन) कार्यों को "वानिकी गतिविधियों" के रूप में पुनर्वर्गीकृत करता है। इससे उन्हें कुछ गैर-वन उपयोग प्रतिबंधों से छूट मिलती है।
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रणनीतिक छूट

यह एक प्रावधान है जो राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजनाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के 100 किलोमीटर के दायरे में आने वाली परियोजनाओं को वन मंजूरी प्राप्त करने से छूट देता है, जिससे ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में परियोजनाओं का तेजी से निष्पादन संभव हो सके।

वानिकी गतिविधियां

यह एक वर्गीकृत गतिविधि है जिसमें सरकारी या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा 'सहायता प्राप्त प्राकृतिक पुनरुत्पादन' (वनीकरण और वृक्षारोपण सहित) और इको-टूरिज्म, चिड़ियाघर तथा सिल्वीकल्चरल कार्य शामिल हैं। ऐसी गतिविधियों पर प्रतिपूरक वनीकरण और NPV की अनिवार्यता लागू नहीं होती।

कार्बन प्रच्छादन (Carbon Sequestration)

यह वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को अवशोषित करने और उसे स्थायी रूप से संग्रहीत करने की प्रक्रिया है, जो मुख्य रूप से वनों और महासागरों द्वारा की जाती है। यह जलवायु परिवर्तन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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