ब्राजील ने आधिकारिक तौर पर 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत को सौंप दी है। भारत की अध्यक्षता चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है: समुत्थानशीलता, नवाचार, सहयोग और पर्यावरणीय स्थिरता/ संधारणीयता।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का महत्त्व:
- वैश्विक शासन में सुधार: भारत पश्चिमी प्रभुत्व से बचने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को बदलने की बजाय उनमें सुधार करने का आह्वान करता है।
- ग्लोबल साउथ का नेतृत्व और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन: भारत 'ग्लोबल साउथ' और पश्चिम के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है, ताकि विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक मंच पर रखा जा सके।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) को बढ़ावा: इसे ग्लोबल साउथ के लिए एक मापन योग्य विकास मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा।
- रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण: पश्चिम के नेतृत्व वाले समूहों तथा चीन के साथ संलग्नता को संतुलित करते हुए भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखने में और सक्षम होगा।
ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका: BRICS) के बारे में जानकारी:
- उत्पत्ति: ब्रिटिश अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने 2001 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए 'BRIC' शब्द का सृजन किया था।
- ब्रिक (ब्राजील, रूस, भारत और चीन: BRIC) ने 2006 में G8 आउटरीच शिखर सम्मेलन के दौरान एक औपचारिक समूह के रूप में कार्य करना शुरू किया था। पहला ब्रिक शिखर सम्मेलन 2009 में रूस में आयोजित किया गया था।
- 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के साथ 'BRIC' बदलकर 'BRICS' हो गया था।
- उद्देश्य: वैश्विक शासन में सुधार करना और पश्चिम के प्रभुत्व वाली संस्थाओं (जैसे- IMF, विश्व बैंक, UNSC आदि) के विकल्प प्रदान करना।
- अध्यक्षता: सदस्य देशों द्वारा वार्षिक रूप से बारी-बारी से ग्रहण की जाती है।
- सहयोग के तीन स्तंभ: ब्रिक्स तीन प्रमुख स्तंभों के तहत महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है। ये तीन स्तंभ हैं: राजनीति और सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक व लोगों के बीच आदान-प्रदान।
- वैश्विक प्रभाव: यह समूह वैश्विक जनसंख्या के लगभग 49.5%, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 40% और वैश्विक व्यापार के लगभग 26% का प्रतिनिधित्व करता है।
- सदस्य देश:
- प्रारंभिक सदस्य (BRICS): ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका।
- नए सदस्य (BRICS+): मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।