अमेरिकी राष्ट्रपति के एक ज्ञापन में संयुक्त राज्य अमेरिका को 66 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का निर्देश दिया गया | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • अमेरिका उन 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों और 31 संयुक्त राष्ट्र संगठनों से अपना वित्तपोषण और भागीदारी वापस ले रहा है जिन्हें अमेरिकी हितों के विपरीत माना जाता है।
  • वापसी से जलवायु परिवर्तन के प्रयासों, बहुपक्षवाद, विकास सहायता और वैश्विक शांति पहलों पर प्रभाव पड़ेगा।

In Summary

यह आदेश अमेरिकी एजेंसियों और विभागों को 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों तथा 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं में भागीदारी और वित्त-पोषण बंद करने का निर्देश देता है।

  • अमेरिका के अनुसार, ये संस्थाएं अमेरिकी राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि या संप्रभुता के विपरीत कार्य करती हैं। 
  • इससे पहले भी अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते, WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से हट चुका है।

वे महत्वपूर्ण संगठन जिनसे अमेरिका हट रहा है:

  • संयुक्त राष्ट्र के संगठन: जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC), व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD), शांति निर्माण आयोग, जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC), पारंपरिक हथियारों का संयुक्त राष्ट्र रजिस्टर आदि।
  • गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा मंच (IEF), अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN), 24/7 कार्बन-फ्री एनर्जी कॉम्पैक्ट आदि।

अमेरिका के हटने के संभावित प्रभाव

  • जलवायु परिवर्तन: इससे ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के वैश्विक प्रयासों में बाधा उत्पन्न होगी। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इससे अन्य देशों को अपनी प्रतिबद्धताओं व कार्रवाइयों में देरी करने का बहाना मिल सकता है।
  • बहुपक्षवाद का विखंडन: अमेरिका के हटने से अंतर्राष्ट्रीय शासन व्यवस्था कमजोर होगी, देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी तथा विश्व संरक्षणवाद एवं छोटे क्षेत्रीय गुटों की ओर झुकेगा। 
  • विकास में बाधा: अमेरिका ने ऐतिहासिक रूप से वैश्विक संस्थाओं में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। साथ ही, अमेरिका के हटने के बाद वित्त-पोषण में कटौती से पहले से ही कम हो रही अंतर्राष्ट्रीय मानवीय एवं विकास सहायता की स्थिति और खराब हो जाएगी।
  • वैश्विक शांति: शांति निर्माण आयोग में अमेरिकी योगदान की अनुपस्थिति से संघर्षग्रस्त क्षेत्रों (जैसे अफ्रीका या कैरिबियन) में शांति प्रयास बाधित होंगे।
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IUCN (अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ)

यह एक सदस्यता संघ है जो प्रकृति और टिकाऊ मानव उपयोग के संरक्षण के लिए समर्पित है। यह वैज्ञानिक अनुसंधान, संरक्षण परियोजनाओं और नीति निर्माण में शामिल है।

ISA (अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन)

यह एक संधि-आधारित संगठन है जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा को अधिक सुलभ, किफायती और टिकाऊ बनाना है। यह विशेष रूप से कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित देशों पर केंद्रित है।

IEF (अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा मंच)

यह ऊर्जा उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने वाला एक मंच है। इसका उद्देश्य ऊर्जा बाजारों में स्थिरता और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।

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