प्रथम चरण (मकान सूचीकरण): यह अभियान अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच सभी राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में संचालित किया जाएगा।
- द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना): मुख्य गणना फरवरी 2027 के लिए निर्धारित है।
- संघ राज्यक्षेत्र लद्दाख व संघ राज्यक्षेत्र जम्मू-कश्मीर के हिमपात वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ दुर्गम इलाकों में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी।
16वीं जनगणना (2027) की मुख्य विशेषताएं
- भारत की पहली डिजिटल जनगणना: डेटा संग्रह के लिए प्रगणक (Enumerators) मुख्य रूप से मोबाइल ऐप का उपयोग करेंगे।
- ऐतिहासिक जातिगत गणना: स्वतंत्र भारत में पहली बार सभी समुदायों की राष्ट्रव्यापी जातिगत गणना की जाएगी। यह गणना केवल SC और ST तक सीमित नहीं रहेगी। अंतिम बार ऐसी गणना 1931 में हुई थी।
- डिजिटल विशेषताएं:
- स्व-प्रगणना पोर्टल (Self-Enumeration Portal): एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म होगा, जहां नागरिक स्वतंत्र रूप से स्वयं प्रश्नावली भर सकेंगे।
- जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS): इस डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पर्यवेक्षक तथा जिला अधिकारी जनगणना की प्रगति पर नजर रख सकेंगे।
- हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (HLB) क्रिएटर: यह एक उपग्रह-आधारित वेब मैपिंग एप्लीकेशन है। यह प्रभारी अधिकारियों को सटीक डिजिटल गणना ब्लॉक्स बनाने में सक्षम बनाएगी।
- सेवा के रूप में जनगणना (सेन्सस एज़ ए सर्विस: CaaS): यह मंत्रालयों को साक्ष्य आधारित नीतिगत नियोजन के लिए एक स्वच्छ, मशीन द्वारा पठनीय और खोजने योग्य डेटाबेस प्रदान करेगा।
भारत में जनगणना के बारे में
- संचालन: यह गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा प्रत्येक 10 वर्षों (दशकीय) में आयोजित की जाती है।
- कानूनी प्रावधान: जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियमावली, 1990 के तहत जनगणना आयोजित की जाती है।
- 2027 की जनगणना देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी।
- भारत में पहली समकालिक जनगणना 1881 में डब्ल्यू.सी. प्लोडेन के नेतृत्व में आयोजित की गई थी।