सरकार ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 के मसौदे पर जनता से सुझाव आमंत्रित किए | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • ड्राफ्ट पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025 का मकसद इंसेक्टिसाइड्स एक्ट, 1968 और रूल्स, 1971 की जगह भारत के पेस्टिसाइड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मॉडर्न बनाना है।
  • मुख्य प्रोविज़न में कंसल्टेशन के लिए एक सेंट्रल पेस्टिसाइड्स बोर्ड, डिजिटल एप्लीकेशन स्क्रूटनी के लिए एक रजिस्ट्रेशन कमिटी, और ट्रांसपेरेंसी और नकली प्रोडक्ट्स पर रोक लगाने के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग शामिल हैं।
  • बिल में 18 महीने से ज़्यादा देर से आए जेनेरिक पेस्टिसाइड्स के लिए 'डीम्ड रजिस्ट्रेशन' की शुरुआत की गई है, टेस्टिंग लैब्स के लिए एक्रेडिटेशन ज़रूरी किया गया है, और वर्कर वेलफेयर और टॉक्सिक पेस्टिसाइड्स की हैंडलिंग के लिए स्टैंडर्ड तय किए गए हैं।

In Summary

इस मसौदा विधेयक का उद्देश्य कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 को प्रतिस्थापित करके भारत के कीटनाशक विनियामक ढांचे का आधुनिकीकरण करना है।

मसौदा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 के मुख्य प्रावधान:

  • केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड: यह एक बहु-क्षेत्रकीय निकाय होगा, जो सरकार को सुरक्षा मानकों, निपटान मानदंडों और आधिकारिक अनुसूची में नए अणुओं को शामिल करने पर परामर्श प्रदान करेगा। 
  • पंजीकरण समिति: यह एक तकनीकी समिति होगी। इसे पंजीकरण प्रमाण-पत्र देने से पहले अनिवार्य रूप से डिजिटल मोड में कीटनाशक आवेदनों की जांच करने का कार्य सौंपा जाएगा।
  • डिजिटल पारदर्शिता: कीटनाशकों के राष्ट्रीय रजिस्टर और उनके उत्पादन, स्टॉक एवं बिक्री रिकॉर्ड की ऑनलाइन ट्रैकिंग का प्रावधान किया गया है। इससे नकली उत्पादों के वितरण पर रोक लगाई जा सकेगी।
  • डीम्ड पंजीकरण: नौकरशाही द्वारा विलंब को रोकने के लिए, यदि समिति 18 महीनों के भीतर "जेनेरिक कीटनाशक" के पूर्ण आवेदन पर निर्णय लेने में विफल रहती है, तो पंजीकरण प्रमाण-पत्र को 'प्रदत्त' (granted) मान लिया जाएगा।
  • निगरानी और सुरक्षा: विषाक्तता की घटनाओं की रिपोर्टिंग और विश्लेषण के लिए एक परिभाषित फ्रेमवर्क होगा। साथ ही, ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए चिकित्सा सुविधाओं की एक समर्पित योजना निर्मित की जाएगी।
  • कीटनाशकों की गुणवत्ता: परीक्षण प्रयोगशालाओं के अनिवार्य प्रत्यायन (accreditation) का प्रावधान किया गया है। यह सुनिश्चित करेगा कि किसानों को केवल गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक ही उपलब्ध हों।
  • श्रमिक कल्याण: यह विषाक्त कीटनाशकों को संभालने वाले श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण और कार्य करने की स्थिति के मानक निर्धारित करता है। इससे आजीविकाजन्य स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कमी को दूर किया जाएगा।

भारत में कीटनाशक और उनका उपयोग

  • कीटनाशकों का उपयोग किसी कीट को मारने, रोकने, उनकी संख्या कम करने, नष्ट करने या दूर भगाने के लिए किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से  कीटनाशी  (insecticides) , कवकनाशी (fungicides) , खरपतवारनाशी (herbicides), जैव-कीटनाशी (biopesticides) आदि शामिल होते हैं।
  • 2023 तक के आंकड़ों के अनुसार खरपतवारनाशकों (खरपतवारों को नष्ट करने/उनकी वृद्धि को नियंत्रित करने वाले उत्पाद) की बाजार हिस्सेदारी सबसे अधिक 44% है।
  • 2023 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत में कीटनाशकों की खपत 0.5 किग्रा/ हेक्टेयर है। इसके विपरीत, कुछ देशों में 17 किग्रा/ हेक्टेयर है।
  • सर्वाधिक खपत वाले राज्य: महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब और तेलंगाना।
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खरपतवारनाशी (Herbicides)

यह कीटनाशकों का वह प्रकार है जो अवांछित पौधों (खरपतवारों) को नष्ट करने या उनकी वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

कवकनाशी (Fungicides)

यह कीटनाशकों का वह प्रकार है जो फफूंदी और अन्य कवक रोगों को नियंत्रित करने या रोकने के लिए उपयोग किया जाता है।

कीटनाशी (Insecticides)

यह कीटनाशकों का वह प्रकार है जो विशेष रूप से कीड़ों को मारने, रोकने या नियंत्रित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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