यह पाइपलाइन निवेशकों, विकासकर्ताओं और अन्य हितधारकों को संभावित PPP परियोजनाओं की शुरुआती जानकारी प्रदान करेगी। इससे वे योजना निर्माण और निवेश संबंधी बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
- इस पाइपलाइन में अवसंरचना के विकास में तेजी लाने के लिए विभिन्न क्षेत्रकों में ₹17 लाख करोड़ से अधिक मूल्य की 852 परियोजनाएं शामिल की गई हैं।
सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) के बारे में
- PPP सार्वजनिक अवसंरचना या सेवाओं के प्रावधान के लिए सरकार (या सार्वजनिक प्राधिकरण) और निजी क्षेत्रक की एक संस्था के बीच एक दीर्घकालिक संविदात्मक व्यवस्था है।
- प्रमुख PPP मॉडल्स
- निर्माण-परिचालन-हस्तांतरण/ बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (BOT): निजी संस्था एक निश्चित अवधि के लिए सुविधा का वित्त-पोषण, डिजाइन, निर्माण और संचालन करती है। यह उपयोगकर्ता शुल्क के माध्यम से आय अर्जित करती है। बाद में स्वामित्व सार्वजनिक क्षेत्रक को हस्तांतरित कर दिया जाता है।
- डिजाइन-निर्माण-वित्तपोषण-परिचालन/ डिजाइन बिल्ड फाइनेंस ऑपरेट (DBFO): निजी संस्था डिजाइन से लेकर संचालन तक के पूरे चक्र को संभालती है। सरकार पूर्ण समय स्वामित्व बनाए रखती है और निजी संस्था को सेवा शुल्क या एकत्रित टोल के माध्यम से भुगतान करती है।
- अभियांत्रिकी खरीद और निर्माण/ इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC): सरकार परियोजना का वित्त-पोषण करती है और प्रबंधन अपने पास रखती है। निजी संस्था केवल डिजाइन और निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदार होती है।
- हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM): यह EPC और BOT का मिश्रण है। सरकार लागत का 40% हिस्सा किश्तों में देती है। विकासकर्ता शेष 60% जुटाता है और इसे एन्युटी के माध्यम से वसूल करता है।
PPP मॉडल की आवश्यकता
- अवसंरचना वित्त-पोषण अंतराल को समाप्त करना: भारत को 2030 तक अवसंरचना में अनुमानित $4.5 ट्रिलियन निवेश की आवश्यकता होगी।
- सरकार पर वित्तीय बोझ कम करना: भौतिक संपत्ति निर्माण का बोझ निजी क्षेत्रक पर डालकर, यह सार्वजनिक कर राजस्व को सामाजिक कल्याण (स्वास्थ्य और शिक्षा) के लिए मुक्त करता है।
- उन्नत तकनीक और नवाचार तक पहुंच: यह निजी क्षेत्रक की अत्याधुनिक विशेषज्ञता तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को एकीकृत करता है।
- अन्य: दक्षता में सुधार करता है; परियोजनाओं का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है आदि।
PPP को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलें
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