वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण (GSTAT) | Current Affairs | Vision IAS
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 केंद्र सरकार ने GST अपीलीय अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2025 अधिसूचित किए। 

  • इन नियमों में GSTAT के समक्ष अपील दायर करने, इसका प्रबंधन करने और इससे जुड़ी निर्णय प्रक्रिया का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है।  
  • GSTAT एक अर्ध-न्यायिक संस्था है।

GST अपीलीय अधिकरण (GSTAT) के बारे में

  • यह केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 (CGST अधिनियम) के तहत स्थापित द्वितीय अपीलीय प्राधिकरण है।
  • कार्य: यह CGST अधिनियम तथा इससे जुड़े राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों के GST अधिनियमों के अंतर्गत दायर की गई विविध अपीलों की सुनवाई करता है।
  • पीठें: इसकी प्रधान पीठ (Principal Bench) दिल्ली में स्थित है। 31 राज्य पीठें (State Benches) अलग-अलग राज्यों में स्थापित की गई हैं।

UN स्पॉटलाइट पहल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन सामाजिक और आर्थिक तनाव को बढ़ा रहा है। इससे महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के स्तर में वृद्धि हो रही है।

  • रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक 1°C वैश्विक तापमान वृद्धि के साथ घनिष्ठ साथी द्वारा हिंसा (Intimate Partner Violence) में लगभग 4.7% की वृद्धि देखी जाती है।

UN स्पॉटलाइट पहल के बारे में 

  • परिचय: यह यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राष्ट्र (UN) के बीच एक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है।
  • प्रारंभ: 2017 में। 
  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि सभी महिलाएं, विशेषकर हाशिए पर रहने वाली और संकट का सामना करने वाली महिलाएं, हिंसा व नुकसान पहुंचाने वाली अन्य गतिविधियों से मुक्त जीवन जी सकें।

रामसर कन्वेंशन के महासचिव ने कहा कि भारत में चीन की तुलना में अधिक संख्या में रामसर साइट्स हैं।

  • वर्तमान में भारत में 89 रामसर साइट्स हैं, जबकि चीन के पास 82 साइट्स हैं।

रामसर कन्वेंशन के बारे में

  • परिचय: यह विविध देशों की सरकारों के बीच एक संधि है। यह संधि आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) और उनके संसाधनों के संरक्षण एवं विवेकपूर्ण उपयोग के लिए फ्रेमवर्क प्रदान करती है।
  • अपनाया गया: इस कन्वेंशन को 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था और यह 1975 में लागू हुआ था।
    • भारत ने 1982 में इस कन्वेंशन की अभिपुष्टि (ratify) की थी।
  • पक्षकार: संयुक्त राष्ट्र के लगभग 90% सदस्य देश इस कन्वेंशन के पक्षकार बन चुके हैं।
  • रामसर साइट्स सूची में शामिल होने हेतु मानदंड:
    • किसी आर्द्रभूमि (Wetland) को रामसर स्थल घोषित करने के लिए उसे कम-से-कम 9 मानदंडों में से किसी एक को पूरा करना होता है। 
    • इन 9 मानदंडों में शामिल हैं- नियमित रूप से 20,000 या अधिक जलपक्षियों को आश्रय प्रदान करना, जैव विविधता के संरक्षण में योगदान देना, आदि।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद -नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज (ICAR-NBFGR) ने दो नई मछली प्रजातियों की खोज की है।

नई मछली प्रजातियों के बारे में

  • लैबियो उरु (Labeo uru):
    • इसका नाम पारंपरिक लकड़ी की नौका (धो) से प्रेरित है, जिसकी तरह इसके फिन लंबे और पाल जैसे हैं।
    • इसे चंद्रगिरि नदी में खोजा गया है।
    • चंद्रगिरि नदी पश्चिम की ओर बहने वाली अंतर्राज्यीय नदी है। यह कर्नाटक के कोडागू जिले के पट्टिमला पहाड़ियों से निकलती है।
  • लैबियो चेकिडा (Labeo chekida)
    • यह छोटी और गहरे रंग की मछली है। इसे स्थानीय भाषा में 'काका चेकीदा' कहा जाता है।
    • यह मछली चालाकुडी नदी में पाई जाती है।
    • पश्चिमी घाट की अन्नामलाई पहाड़ियों से निकलने वाली पांच धाराएं मिलकर आगे चालाकुडी नदी के नाम से बहती है।
  • दोनों मछली प्रजातियां ताजे जल की प्रजातियां हैं। साथ ही, ये अपने-अपने नदी तंत्रों की स्थानिक (एंडेमिक) प्रजातियां भी हैं।
  • यह खोज पश्चिमी घाट के जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में महत्त्व को रेखांकित करती है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में वैज्ञानिकों ने विद्युत चालकता वाले 'CA इलेक्ट्रोथ्रिक्स याकोनेंसिस' नामक बैक्टीरिया की खोज की है।

CA इलेक्ट्रोथ्रिक्स याकोनेंसिस के बारे में

  • इसका नाम याकोना समुदाय के सम्मान में रखा गया है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के याक्विना-बे क्षेत्र के देशज लोग हैं।
  • यह बैक्टीरिया विद्युत चालकता (Electric Conductivity) के लिए जाना जाता है। बैक्टीरिया में यह गुण दुर्लभ है।
  • इसकी विद्युत चालकता तलछट (sediment) से युक्त वातावरण में चयापचय कार्यों (metabolic functions) को बेहतर बनाने में मदद करती है।
  • महत्त्व  
    • बायो-इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास की संभावना: इस बैक्टीरिया का उपयोग भविष्य में चिकित्सा, उद्योग, खाद्य सुरक्षा आदि के लिए बायो-इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाने में किया जा सकता है।
    • प्रदूषण नियंत्रण में: ये बैक्टीरिया इलेक्ट्रॉन्स को स्थानांतरित कर सकते हैं। इससे तलछट से प्रदूषकों को हटाने में मदद मिल सकती है और पर्यावरण को स्वच्छ किया जा सकता है।

एक अध्ययन के अनुसार, 1961 से अब तक वैश्विक भूमि क्षेत्र के 60% से अधिक हिस्से में टेंपरेचर फ्लिप्स देखे गए हैं। 

  • शोधकर्ता ने पाया कि पहले तीव्र फ्लिप्स संभवतः 20वीं सदी की शुरुआत में आरंभ हुए थे, जिनमें हाल के दशकों में तेजी आई है।

टेंपरेचर फ्लिप के बारे में

  • इसका अर्थ है बहुत कम समय में तापमान का अचानक बहुत गर्मी से ठंड में बदल जाना या ठंड से अचानक गर्मी में बदल जाना।
  • अनुकूलन के लिए समय की कमी के कारण यह गंभीर स्वास्थ्य तथा पर्यावरण और अवसंरचना संबंधी संकट उत्पन्न कर सकता है।

फोनॉन के गुणों को नियंत्रित करने की एक सफल विधि की खोज की गई।

फोनॉन के बारे में

  • फोनॉन एक कंपन ऊर्जा की इकाई है, जो किसी क्रिस्टल के अंदर परमाणुओं के सामूहिक दोलन से उत्पन्न होती है।
    • ये कंपन, ध्वनि तरंगों की तरह पदार्थ में फैलते हैं और ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं।
  • फोनॉन मुख्य रूप से पदार्थों में ऊष्मा के रूप में ऊर्जा ले जाने के लिए जिम्मेदार हैं।
  • महत्त्व: फोनॉन की कस्टम थर्मल, ऑप्टिकल और इलेक्ट्रॉनिक गुणों के साथ सामग्री को डिजाइन करने में अहम भूमिका है। ये विशेषताएं उन्हें क्वांटम तकनीक में प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बनाती हैं।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित HPV परीक्षण किट को मान्यता प्रदान की।

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के बारे में

  • HPV एक आम यौन संचारित संक्रमण है। यह त्वचा, जननांग क्षेत्र और गले को प्रभावित कर सकता है।
  • ज्यादातर मामलों में, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वयं ही वायरस को मार देती है।
  • यदि उच्च जोखिम वाला HPV संक्रमण शरीर में लगातार बना रहता है, तो यह असामान्य कोशिकाओं को विकसित कर सकता है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेती हैं।
    • सर्वाइकल कैंसर HPV के कारण होने वाला सबसे सामान्य प्रकार का कैंसर है।
    • उपचार: वर्तमान में HPV संक्रमण का कोई उपचार नहीं है।
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